ਤ੍ਵ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ਸਵੱਯੇ — Word-by-Word Meaning
ਤ੍ਵ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ਸਵੱਯੇ
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
Origin & History
Source: Dasam Granth (Akal Ustat)
Author: Guru Gobind Singh Ji
Period: 17th–18th century CE
अकाल उस्तति से ली गई ये दस सवैयाँ सिखों द्वारा प्रति प्रातः पढ़ी जाती हैं। ये बाह्य धार्मिकता के सहारे को नकारती हैं और साधक को एक सर्वव्यापक अकाल पुरख को पहचानने तथा प्रेम करने का आह्वान करती हैं।
Frequently Asked Questions
त्व प्रसादि सवैये का क्या अर्थ है?▼
“त्व प्रसादि” का अर्थ है “आपकी कृपा से”। यह बाणी सिखाती है कि केवल वाहिगुरु की कृपा और सच्ची भक्ति से ही — न कि कर्मकांड या तप से — मनुष्य का उद्धार होता है।
त्व प्रसादि सवैये किसने रचा?▼
इसकी रचना गुरु गोबिंद सिंह जी ने की और यह दशम ग्रंथ तथा प्रतिदिन के प्रातःकालीन नित्नेम का अंग है।
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