त्रिपुरसुन्दरी स्तोत्रम् — Word-by-Word Meaning
त्रिपुरसुन्दरी स्तोत्रम्
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
Complete Translation
त्रिपुरसुन्दरी (ललिता) की द्वादश-श्लोकी स्तुति — तीनों लोकों की परम सुन्दरी, जो गणेश, ग्रह, नक्षत्र व योगिनियों का स्वरूप हैं — श्रीविद्या परम्परा की दिव्य माता।
Origin & History
Source: Traditional
Author: Traditional
Period: Classical
त्रिपुरसुन्दरी स्तोत्रम् एक प्रिय परंपरागत स्तोत्र है। यह त्रिपुरसुन्दरी (ललिता) की द्वादश-श्लोकी स्तुति है — तीनों लोकों की परम सुन्दरी, जो गणेश, ग्रह, नक्षत्र व योगिनियों का स्वरूप हैं — श्रीविद्या परम्परा की दिव्य माता।
Frequently Asked Questions
त्रिपुरसुन्दरी स्तोत्रम् क्या है?▼
त्रिपुरसुन्दरी (ललिता) की द्वादश-श्लोकी स्तुति — तीनों लोकों की परम सुन्दरी, जो गणेश, ग्रह, नक्षत्र व योगिनियों का स्वरूप हैं — श्रीविद्या परम्परा की दिव्य माता।
इसकी रचना किसने की और इसका पाठ कब किया जाता है?▼
यह एक परंपरागत स्तोत्र है। इसका पाठ प्रातः या सायंकाल श्रद्धा से किया जाता है, विशेषकर शुक्रवार को तथा नवरात्रि में।
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