वसुदेवसुतं देवं — Word-by-Word Meaning
वसुदेवसुतं देवं
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
वसुदेवसुतं देवं
Vasudevasutam devam
वसुदेव के दिव्य पुत्र
कंसचाणूरमर्दनम्
Kamsa-chanura-mardanam
कंस और चाणूर का संहार करने वाले
देवकीपरमानन्दं
Devaki-paramanandam
माता देवकी के परम आनन्द
कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्
Krishnam vande jagadgurum
जगद्गुरु श्रीकृष्ण को मैं नमन करता हूँ
Complete Translation
वसुदेव के पुत्र, कंस और चाणूर का संहार करने वाले, देवकी के परम आनंद स्वरूप, जगद्गुरु श्रीकृष्ण को मैं नमस्कार करता हूँ।
Origin & History
Source: Krishnashtakam (opening dhyana verse)
Author: Traditional (attributed to Adi Shankaracharya)
Period: Classical / Medieval
यह कृष्णाष्टकम् का प्रिय आरंभिक श्लोक है, जो भगवान कृष्ण को किए जाने वाले सर्वाधिक प्रचलित नमस्कारों में से एक है। एक ही श्लोक में यह उनके वसुदेव-देवकी के पुत्र रूप में जन्म, अत्याचारी कंस व मल्ल चाणूर के संहार, और जगद्गुरु — संसार के आचार्य — रूप में उनकी महिमा का स्मरण कराता है। इसे प्रतिदिन और विशेषतः जन्माष्टमी पर कृष्ण को पूर्ण नमन के रूप में पढ़ा जाता है।
Frequently Asked Questions
वसुदेवसुतं देवं श्लोक कहाँ से है?▼
यह कृष्णाष्टकम् का सुप्रसिद्ध आरंभिक ध्यान श्लोक है, जो कृष्ण की उपासना के आरंभ में और विशेषतः जन्माष्टमी पर पढ़ा जाता है।
वसुदेवसुतं देवं का अर्थ क्या है?▼
यह भगवान कृष्ण को वसुदेव के दिव्य पुत्र, अत्याचारी कंस व चाणूर के संहारक, माता देवकी के परम आनंद स्वरूप और जगद्गुरु — समस्त संसार के आचार्य — रूप में नमस्कार करता है।
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