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वसुदेवसुतं देवं

🕉️ hindu·📿 3× जप·🕐 प्रतिदिन; जन्माष्टमी, एकादशी व बुधवार को·📜 Krishnashtakam (opening dhyana verse)

अन्य नाम / खोज: vasudeva sutam devam kamsa chanura mardanam · vasudevasutam devam · krishnam vande jagadgurum · krishna dhyana shloka

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अर्थ

वसुदेवसुतं देवं कृष्णाष्टकम् का प्रसिद्ध आरंभिक ध्यान श्लोक है, जो कृष्ण की उपासना में प्रतिदिन पढ़ा जाता है। यह वसुदेव-देवकी के पुत्र, कंस व चाणूर के संहारक और जगद्गुरु श्रीकृष्ण को एक ही श्लोक में नमस्कार करता है। यह सरल, सहज स्मरणीय श्लोक भक्ति, मनःशांति और भगवान की कृपा हेतु गाया जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Krishnashtakam (opening dhyana verse) · Traditional (attributed to Adi Shankaracharya) · Classical / Medieval

यह कृष्णाष्टकम् का प्रिय आरंभिक श्लोक है, जो भगवान कृष्ण को किए जाने वाले सर्वाधिक प्रचलित नमस्कारों में से एक है। एक ही श्लोक में यह उनके वसुदेव-देवकी के पुत्र रूप में जन्म, अत्याचारी कंस व मल्ल चाणूर के संहार, और जगद्गुरु — संसार के आचार्य — रूप में उनकी महिमा का स्मरण कराता है। इसे प्रतिदिन और विशेषतः जन्माष्टमी पर कृष्ण को पूर्ण नमन के रूप में पढ़ा जाता है।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि जो इस श्लोक से कृष्ण को नमन करता है, उन्हें देवकी के आनंद व अत्याचारियों के संहारक रूप में स्मरण करता है, वह अपने भीतरी शत्रुओं से मुक्त होकर भक्ति से भर जाता है।

मंत्र

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वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्

Vasudevasutam devam kamsachanuramardanam Devakiparamanandam krishnam vande jagadgurum

अर्थ:वसुदेव के पुत्र, कंस और चाणूर का संहार करने वाले, देवकी के परम आनंद स्वरूप, जगद्गुरु श्रीकृष्ण को मैं नमस्कार करता हूँ।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

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वसुदेवसुतं देवं🔊Vasudevasutam devamवसुदेव के दिव्य पुत्र
कंसचाणूरमर्दनम्🔊Kamsa-chanura-mardanamकंस और चाणूर का संहार करने वाले
देवकीपरमानन्दं🔊Devaki-paramanandamमाता देवकी के परम आनन्द
कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्🔊Krishnam vande jagadgurumजगद्गुरु श्रीकृष्ण को मैं नमन करता हूँ

वसुदेवसुतं देवं पाठ के लाभ

कृष्णाष्टकम् का प्रसिद्ध आरंभिक ध्यान श्लोक, जो कृष्ण की उपासना में प्रतिदिन पढ़ा जाता है।

कृष्ण को वसुदेव-देवकी के पुत्र, अत्याचारी कंस व चाणूर के संहारक तथा जगद्गुरु — समस्त लोकों के आचार्य — रूप में नमन करता है।

भक्ति, मनःशांति और भगवान की रक्षा हेतु, विशेषतः जन्माष्टमी व बुधवार को गाया जाता है।

एक ही सरल, सहज स्मरणीय श्लोक में कृष्ण को पूर्ण नमस्कार।

प्रायः बच्चों को सिखाए जाने वाले पहले कृष्ण श्लोकों में से एक।

वसुदेवसुतं देवं जप विधि

जप संख्या3बार
उत्तम समयप्रतिदिन; जन्माष्टमी, एकादशी व बुधवार को
दिशाEast or towards a Krishna image

श्याम वर्ण भगवान कृष्ण, देवकी व वसुदेव के आनंद, का ध्यान करते हुए भक्तिपूर्वक पाठ करें, और जगद्गुरु रूप में उन्हें नमन करें। तीन बार या अधिक दोहराएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह कृष्णाष्टकम् का सुप्रसिद्ध आरंभिक ध्यान श्लोक है, जो कृष्ण की उपासना के आरंभ में और विशेषतः जन्माष्टमी पर पढ़ा जाता है।
यह भगवान कृष्ण को वसुदेव के दिव्य पुत्र, अत्याचारी कंस व चाणूर के संहारक, माता देवकी के परम आनंद स्वरूप और जगद्गुरु — समस्त संसार के आचार्य — रूप में नमस्कार करता है।

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