वाहेगुरु — Word-by-Word Meaning
वाहेगुरु
Every Sanskrit word explained in English
Word-by-Word Breakdown
वाहि
Wahe
अद्भुत, विस्मयकारी — विस्मय और प्रेम का उद्गार
गुरू
Guru
गुरु — अंधकार (गु) से प्रकाश (रु) की ओर ले जाने वाला; यहाँ स्वयं परमात्मा
Complete Translation
वाहेगुरु — 'हे अद्भुत प्रभु!' यह सिख धर्म का गुरमंत्र है, परमात्मा का पावन नाम, जो ईश्वर के प्रति विस्मय और प्रेम की अभिव्यक्ति है। सिख इसे सिमरन रूप में — हर श्वास के साथ प्रभु-नाम के निरंतर, प्रेममय स्मरण के रूप में — जपते हैं।
Origin & History
Source: Sikh tradition — the Gurmantar revealed through the Guru lineage
Author: Sikh Guru tradition
Period: From the time of Guru Nanak (15th–16th century) onward
वाहेगुरु सिखी का गुरमंत्र है — परमात्मा का वह नाम जो गुरु द्वारा शिष्य को दिया जाता है। जहाँ गुरु नानक का मूल मंत्र उस एक के स्वरूप का वर्णन करता है, वहीं 'वाहेगुरु' वह एकमात्र शब्द है जिसमें एक सिख उस एक को धारण करता और प्रेम करता है, उसे सिमरन में तब तक दोहराता है जब तक साधक और नाम अभिन्न न हो जाएँ। इसे हर्ष और शोक में, गुरुद्वारे और हृदय में, समस्त विश्व के सिख उच्चारित करते हैं।
Frequently Asked Questions
वाहेगुरु का क्या अर्थ है?▼
'वाहे' विस्मय और आश्चर्य की अभिव्यक्ति है ('अद्भुत!'), और 'गुरु' अंधकार का नाशक है — दिव्य गुरु, यहाँ अर्थात् परमात्मा। मिलकर वाहेगुरु अद्भुत प्रभु के प्रति प्रेममय विस्मय की पुकार है, और सिखों के लिए परमात्मा का पावन नाम है।
वाहेगुरु सिमरन क्या है?▼
सिमरन परमात्मा के नाम का प्रेममय जप और स्मरण है। सिख 'वाहेगुरु' को — ऊँचे स्वर में, फुसफुसाहट में, या श्वास के साथ मौन रूप से — दोहराते हैं, ताकि मन शांत हो और परमात्मा की उपस्थिति में निवास हो सके। निरंतर करने पर यह अजपा (सहज, स्वयं-चलने वाला) स्मरण बन जाता है।
क्या वाहेगुरु शब्द का कोई गहरा अर्थ है?▼
एक पारंपरिक चिंतन इसकी ध्वनियों को विभिन्न परंपराओं में दिव्यता को समाहित करने वाला मानता है — वा (विष्णु), ह (हरि/हर), गु तथा रु — जो सभी नामों से परे एक परमात्मा की ओर संकेत करता है। परंतु सिखों के लिए इसका जीवंत अर्थ केवल अद्भुत प्रभु का विस्मय-भरा नाम है।
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