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चार मित्र और शिकारी

द्वितीय तंत्र — मित्र सम्प्राप्ति

पात्र: लघुपतनक कौआ · हिरण्यक चूहा · मंथरक कछुआ · चित्रांग हिरण · शिकारी

लघुपतनक नाम का एक कौआ अपने बरगद के पेड़ से यह देखकर दंग रह गया कि बहेलिये के जाल में फँसे कबूतर एक साथ जाल समेत उड़ गए, और हिरण्यक नाम के एक चतुर चूहे ने जाल की हर गाँठ कुतरकर उन्हें आज़ाद कर दिया। नन्हे चूहे की बुद्धि और मित्रों के प्रति निष्ठा देखकर कौए ने उससे मित्रता की विनती की। हिरण्यक पहले हिचकिचाया — आखिर कौए चूहों को खा जाते हैं — पर कौए की सच्चाई ने उसका दिल जीत लिया, और फिर दोनों में गहरी छनने लगी।

जब बुरे दिन आए तो कौआ अपने नन्हे मित्र को पीठ पर बिठाकर दूर एक झील पर ले गया, जहाँ उसका पुराना साथी मंथरक कछुआ रहता था। कुछ ही दिनों में शिकारियों से भागता हुआ चित्रांग नाम का सुंदर हिरण भी उनसे आ मिला। चारों मित्र झील किनारे साथ भोजन करते, सुख-दुख बाँटते, और हर एक का जीवन बाकी तीनों से सँवर गया।

एक शाम चित्रांग नहीं लौटा। कौए ने ऊँची उड़ान भरकर खोजा, तो देखा हिरण शिकारी के फंदे में बुरी तरह फँसा है। वह झट हिरण्यक को पीठ पर बिठा लाया, और चूहे के पैने दाँतों ने पल भर में हिरण को मुक्त कर दिया। पर मित्र की चिंता में धीमे-धीमे रेंगता मंथरक भी वहाँ आ पहुँचा — और तभी शिकारी लौट आया। फंदा खाली था, पर सामने मोटा-ताज़ा कछुआ! उसने मंथरक को धनुष से बाँधा और चल पड़ा।

तीनों मित्रों ने तुरंत उपाय किया। चित्रांग दौड़कर आगे गया और शिकारी की राह के पास मरे हुए की तरह लेट गया; कौआ उस पर बैठकर आँखें नोचने का नाटक करने लगा। मुफ्त का शिकार देखकर शिकारी ने कछुए को नीचे रखा और हिरण की ओर लपका। उसी क्षण हिरण्यक ने बंधन कुतर डाले — कछुआ सरककर पानी में जा छिपा, हिरण उछलकर भाग निकला, कौआ आकाश में उड़ गया और चूहा बिल में समा गया। शिकारी सूने जंगल में आँखें मलता रह गया कि कहीं यह सपना तो नहीं था, और खाली हाथ घर लौटा। उधर झील किनारे उस शाम चार मित्र साथ बैठे हँस रहे थे — यह जानते हुए कि सच्ची मित्रता ही संसार का सबसे बड़ा खज़ाना है।

शिक्षा (Moral)

सच्ची मित्रता में एकजुट होकर छोटे और कोमल प्राणी भी बलवान शत्रु को मात दे सकते हैं।

चार मित्र और शिकारी कहानी की शिक्षा क्या है?

सच्ची मित्रता में एकजुट होकर छोटे और कोमल प्राणी भी बलवान शत्रु को मात दे सकते हैं।

यह कहानी किस ग्रंथ से है?

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