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बगुला भगत और केकड़ा

प्रथम तंत्र — मित्रभेद

पात्र: बूढ़ा बगुला · झील की मछलियाँ · केकड़ा

मछलियों से भरी एक झील के किनारे एक बगुला रहता था, जो अब बूढ़ा और सुस्त हो चला था। आँखें तो उसकी अब भी पैनी थीं, पर टाँगों में शिकार पकड़ने की फुर्ती नहीं बची थी। तब उस धूर्त पक्षी ने ऐसी चाल सोची जिसमें फुर्ती की ज़रूरत ही न थी — बस झूठ की। वह पानी के किनारे उदास खड़ा हो गया, आँखों से आँसू टपकाता हुआ, पैरों के पास तैरती मछलियों की ओर देखे बिना।

आखिर जिज्ञासु मछलियों ने पूछा, “भगत जी, रोते क्यों हो?” बगुला किसी संत की तरह ठंडी साँस भरकर बोला, “बच्चो, मैंने मछली खाना त्याग दिया है; अब तो भजन-पूजन ही मेरा आधार है। पर एक भयानक समाचार सुना है — मछुआरे बड़े-बड़े जाल लेकर इस झील को खाली करने आ रहे हैं, और जो बचेगा उसे सूखा मार डालेगा। तुम सबके लिए मेरा हृदय फटा जा रहा है।” मछलियाँ थर-थर काँपने लगीं और उससे रक्षा की गुहार करने लगीं। बगुला धीरे से बोला, “यहाँ से थोड़ी दूर एक गहरी, सुंदर झील है। कहो तो मैं तुम्हें अपनी चोंच में बिठाकर थोड़ा-थोड़ा करके वहाँ पहुँचा दूँ।”

कृतज्ञ मछलियाँ होड़ लगाकर कतार में लग गईं, और बगुला हर सुबह चोंच भर सवारियाँ लेकर उड़ता। पर वह उन्हें पहाड़ी के पीछे की एक बड़ी चट्टान से आगे कभी नहीं ले गया — वहीं बैठकर आराम से उन्हें खा जाता। दिन पर दिन वह दुष्ट पक्षी मोटा होता गया, और चट्टान पर हड्डियों का ढेर ऊँचा होता गया।

आखिर केकड़े की बारी आई। स्वाद बदलने के लालच में बगुला उसे भी ले जाने को तैयार हो गया, और केकड़ा यात्रा के लिए अपने पंजों से बगुले की गर्दन थामकर बैठ गया। पर उड़ते-उड़ते केकड़े ने नीचे झाँका — चट्टान मछलियों की हड्डियों से सफ़ेद चमक रही थी। उसका कलेजा धक रह गया; सारा भेद खुल गया। जैसे ही बगुला चट्टान की ओर झपटा, केकड़े ने अपने मज़बूत पंजे उस कपटी की पतली गर्दन पर कसने शुरू किए — और कसता ही गया, जब तक बगुले के पंख सदा के लिए न सिमट गए। फिर केकड़ा धीरे-धीरे झील में लौट आया और मछलियों को बताया कि वह दयालु बगुला भगत असल में उनकी कैसी सेवा कर रहा था। सारी झील ने उस बाल-बाल बचने पर ईश्वर को धन्यवाद दिया।

शिक्षा (Moral)

जो भोले-भाले प्राणियों को छलकर जीता है, अंत में उसका छल ही उसे ले डूबता है।

बगुला भगत और केकड़ा कहानी की शिक्षा क्या है?

जो भोले-भाले प्राणियों को छलकर जीता है, अंत में उसका छल ही उसे ले डूबता है।

यह कहानी किस ग्रंथ से है?

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