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गवैया गधा

पंचम तंत्र — अपरीक्षितकारक

पात्र: उद्धत गधा · सियार · खेत के रखवाले किसान

किसी नगर में एक धोबी के पास उद्धत नाम का गधा था। दिन भर वह कपड़ों के भारी गट्ठर लादकर घाट आता-जाता, पर रात को उसे खुला छोड़ दिया जाता था। रात की आवारागर्दी में उसकी दोस्ती एक सियार से हो गई, और दोनों ने बढ़िया जुगत बैठा ली। रोज़ रात गधा अपने मज़बूत कंधों से किसी सब्ज़ी के खेत की बाड़ तोड़ता, सियार उस दरार से भीतर घुस जाता, और दोनों जी भरकर दावत उड़ाकर भोर से पहले खिसक लेते।

एक रात वे पके खीरों के खेत में जा पहुँचे — ऐसे मीठे और रसीले खीरे उन्होंने पूरे साल नहीं चखे थे। फिर तो वे हर रात वहीं आने लगे, और गधा खा-खाकर खूब चिकना और मोटा हो गया। फिर एक शाम खेत के ऊपर पूरा चाँद चाँदी-सा चमका, और गधे का मन उमंग से भर उठा। वह बोला, “भांजे, देख तो, रात कितनी सुहानी है! मेरी आत्मा में संगीत उमड़ रहा है। मन करता है, एक राग छेड़ ही दूँ।”

सियार के कान खड़े हो गए। “मामा, भूलकर भी ऐसा मत करना! हम इस खेत में चोर हैं। तुम्हारा गाना सुनते ही किसान लाठियाँ लेकर दौड़े आएँगे। चुपचाप खाओ और चलो यहाँ से।” पर गधा तो बुरा मान गया। अकड़कर बोला, “तू ठहरा जंगल का जीव। तू राग-रागिनियों का, ताल और सुर का क्या जाने? संगीत तो दैवी वस्तु है!” सियार बाड़ की ओर खिसकते हुए बोला, “राग-रागिनी मैं सच में नहीं जानता मामा, पर इतना ज़रूर जानता हूँ कि तुम्हारी इस महफ़िल का इनाम तुम्हें अच्छा नहीं लगेगा। मैं बाहर खड़ा तमाशा देखता हूँ।”

सियार चुपके से खेत के बाहर निकल गया, और गधे ने चाँद की ओर थूथन उठाकर पूरे दम से ढेंचू-ढेंचू शुरू कर दी। पलक झपकते ही खेत के रखवाले किसान उस पर टूट पड़े। उन्होंने उस सुरीले चोर की लाठियों से खूब मरम्मत की और गले में लकड़ी की भारी ओखली बाँधकर उसे खेत से खदेड़ दिया। चोट खाया गधा लँगड़ाता हुआ निकला, तो झाड़ियों में से सियार ने मीठे स्वर में पुकारा, “वाह मामा, क्या गाया! देखो, श्रोताओं ने कैसा सुंदर पदक भेंट किया है।”

शिक्षा (Moral)

हर काम का एक उचित समय और स्थान होता है — बेमौके किया गया अच्छा काम भी मुसीबत बन जाता है।

गवैया गधा कहानी की शिक्षा क्या है?

हर काम का एक उचित समय और स्थान होता है — बेमौके किया गया अच्छा काम भी मुसीबत बन जाता है।

यह कहानी किस ग्रंथ से है?

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