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गंडमूल नक्षत्र

गंडमूल वे छह नक्षत्र हैं जो राशि-संधि पर पड़ते हैं — अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल व रेवती। इनमें जन्मे बालक हेतु मूल शांति की जाती है।

आज गंडमूल?
नहीं
नई दिल्ली सूर्योदय अनुसार

छह गंडमूल नक्षत्र

अश्विनीआश्लेषामघाज्येष्ठामूलरेवती

आगामी गंडमूल तिथियाँ (अगले ~4 माह)

गंडमूल दोष व मूल शांति

गंडमूल नक्षत्र राशियों की संधि (गंडांत) पर स्थित होते हैं और केतु व बुध द्वारा शासित हैं। जब बालक का जन्म चंद्रमा के इन नक्षत्रों में होता है तो गंडमूल दोष बनता है; परंपरा अनुसार उसी नक्षत्र के पुनः आने पर (लगभग 27 दिन बाद) मूल शांति पूजा की जाती है। नए शुभ कार्य गंडमूल काल में आरंभ करने से बचा जाता है, पर इन नक्षत्रों में जन्मे अनेक व्यक्ति प्रतिभाशाली भी होते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंडमूल नक्षत्र कौन-से हैं?
छह गंडमूल नक्षत्र हैं — अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। ये केतु व बुध द्वारा शासित हैं और राशि-संधि (गंडांत) पर पड़ते हैं।
गंडमूल दोष क्या है?
जब किसी बच्चे का जन्म चंद्रमा के गंडमूल नक्षत्र में होने पर होता है, तो उसे गंडमूल दोष कहते हैं। परंपरा अनुसार उसी नक्षत्र के पुनः आने पर (लगभग 27 दिन बाद) मूल शांति पूजा की जाती है।
क्या गंडमूल अशुभ है?
गंडमूल काल नए शुभ कार्यों के आरंभ हेतु टाला जाता है, पर यह केवल अशुभ नहीं — मूल, अश्विनी आदि में जन्मे अनेक व्यक्ति तेजस्वी होते हैं। मूल शांति से दोष शांत माना जाता है।
मूल शांति पूजा कब की जाती है?
सामान्यतः बच्चे के जन्म के लगभग 27 दिन बाद, जब वही गंडमूल नक्षत्र पुनः आता है, तब मूल शांति पूजा की जाती है। पंडित से शुभ दिन निश्चित करें।

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