आञ्जनेय मङ्गलाष्टकम्
अन्य नाम / खोज: kapishreshthaya shuraya sugrivapriyamantrine · anjaneya mangalashtakam lyrics
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✦ अर्थ
आञ्जनेय मङ्गलाष्टकम् हनुमान को समर्पित आठ श्लोकों की 'मङ्गल' स्तुति है, जो उनके लिए कल्याण और शुभता का आशीर्वाद माँगती है। यह उन्हें वानरश्रेष्ठ, वीर, सुग्रीव के प्रिय मंत्री और राम के भक्त दूत के रूप में वंदन करती है। श्रद्धा से इसका पाठ करने पर देवता की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्राप्त होती है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional · Traditional · Classical
आञ्जनेय मङ्गलाष्टकम् एक प्रिय परंपरागत स्तुति है। यह आञ्जनेय (हनुमान) की आठ श्लोकों की 'मङ्गल' (शुभता का आशीर्वाद) स्तुति है — वानरश्रेष्ठ, वीर, सुग्रीव के प्रिय मंत्री, राम के भक्त दूत — जो कल्याण का आशीर्वाद माँगती है। इसका प्रत्येक श्लोक हनुमान को 'मङ्गलम्' का आशीर्वाद अर्पित करते हुए समाप्त होता है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि शुद्ध और भक्तिपूर्ण हृदय से आञ्जनेय मङ्गलाष्टकम् का पाठ करना उस दिव्य कृपा के निकट पहुँचना है, जो प्रेम से उसे पुकारने वालों को कभी नहीं त्यागती।
मंत्र
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कपिश्रेष्ठाय शूराय सुग्रीवप्रियमन्त्रिणे । जानकीशोकनाशाय आञ्जनेयाय मङ्गलम् ॥ १॥ मनोवेगाय उग्राय कालनेमिविदारिणे । लक्ष्मणप्राणदात्रे च आञ्जनेयाय मङ्गलम् ॥ २॥ महाबलाय शान्ताय दुर्दण्डीबन्धमोचन । मैरावणविनाशाय आञ्जनेयाय मङ्गलम् ॥ ३॥ पर्वतायुधहस्ताय राक्षःकुलविनाशिने । श्रीरामपादभक्ताय आञ्जनेयाय मङ्गलम् ॥ ४॥ विरक्ताय सुशीलाय रुद्रमूर्तिस्वरूपिणे । ऋषिभिस्सेवितायास्तु आञ्जनेयाय मङ्गलम् ॥ ५॥ दीर्घबालाय कालाय लङ्कापुरविदारिणे । लङ्कीणीदर्पनाशाय आञ्जनेयाय मङ्गलम् ॥ ६॥ नमस्तेऽस्तु ब्रह्मचारिन् नमस्ते वायुनन्दन । नमस्ते ब्रह्मचर्याय नमस्ते गानलोलाय आञ्जनेयाय मङ्गलम् ॥ ७॥ प्रभवाय सुरेशाय शुभदाय शुभात्मने । वायुपुत्राय धीराय आञ्जनेयाय मङ्गलम् ॥ ८॥ आञ्जनेयाष्टकमिदं यः पठेत्सततं नरः । सिद्ध्यन्ति सर्वकार्याणि सर्वशत्रुविनाशनम् ॥ ९॥ इति श्रीआञ्जनेयमङ्गलाष्टकं सम्पूर्णम् ।
kapiśreṣṭhāya śūrāya sugrīvapriyamantriṇe | jānakīśokanāśāya āñjaneyāya maṅgalam || 1|| manovegāya ugrāya kālanemividāriṇe | lakṣmaṇaprāṇadātre ca āñjaneyāya maṅgalam || 2|| mahābalāya śāntāya durdaṇḍībandhamocana | mairāvaṇavināśāya āñjaneyāya maṅgalam || 3|| parvatāyudhahastāya rākṣaḥkulavināśine | śrīrāmapādabhaktāya āñjaneyāya maṅgalam || 4|| viraktāya suśīlāya rudramūrtisvarūpiṇe | ṛṣibhissevitāyāstu āñjaneyāya maṅgalam || 5|| dīrghabālāya kālāya laṅkāpuravidāriṇe | laṅkīṇīdarpanāśāya āñjaneyāya maṅgalam || 6|| namaste'stu brahmacārin namaste vāyunandana | namaste brahmacaryāya namaste gānalolāya āñjaneyāya maṅgalam || 7|| prabhavāya sureśāya śubhadāya śubhātmane | vāyuputrāya dhīrāya āñjaneyāya maṅgalam || 8|| āñjaneyāṣṭakamidaṃ yaḥ paṭhetsatataṃ naraḥ | siddhyanti sarvakāryāṇi sarvaśatruvināśanam || 9|| iti śrīāñjaneyamaṅgalāṣṭakaṃ sampūrṇam |
अर्थ:आञ्जनेय (हनुमान) की आठ श्लोकों की "मङ्गल" स्तुति — वानरश्रेष्ठ, वीर, सुग्रीव के प्रिय मंत्री, राम के भक्त दूत — मंगल आशीर्वाद की कामना करती है।
आञ्जनेय मङ्गलाष्टकम् पाठ के लाभ
आञ्जनेय मङ्गलाष्टकम् के पाठ से देवता की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्राप्त होती है, ऐसा माना जाता है।
यह भक्ति बढ़ाता है, मन को शांत करता है और हृदय को प्रभु के स्मरण में स्थिर करता है।
मंगलवार और शनिवार को, तथा हनुमान जयंती पर इसका पाठ सर्वाधिक शुभ है।
यह एक अनमोल संस्कृत स्तुति है, जो श्रद्धा से प्रतिदिन पाठ के लिए उपयुक्त है।
आञ्जनेय मङ्गलाष्टकम् जप विधि
स्नान करके देवता की प्रतिमा के सम्मुख पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। दीप जलाकर आञ्जनेय मङ्गलाष्टकम् का धीरे-धीरे और भक्तिभाव से पाठ करें। इसका पाठ प्रतिदिन, अथवा विशेषकर मंगलवार और शनिवार को तथा हनुमान जयंती पर किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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