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एकेनापि सुवृक्षेण — Word-by-Word Meaning

एकेनापि सुवृक्षेण

Every Sanskrit word explained in English

Word-by-Word Breakdown

एकेन अपि
ekena api
एक ही के द्वारा
सुवृक्षेण
suvṛkṣeṇa
एक श्रेष्ठ (सुन्दर) वृक्ष के द्वारा
पुष्पितेन
puṣpitena
जो पुष्पित है, फूलों से भरा
सुगन्धिना
sugandhinā
सुगन्धित, मधुर गन्ध वाला
वासितम्
vāsitam
सुवासित हो जाता है, महक उठता है
तत् वनम्
tat vanam
वह वन, वह उपवन
सर्वम्
sarvam
सम्पूर्ण, समस्त
सुपुत्रेण
suputreṇa
एक सुपुत्र (सद्गुणी पुत्र) के द्वारा
कुलम्
kulam
कुल, वंश
यथा
yathā
जैसे, उसी प्रकार

Complete Translation

जैसे एक ही सुन्दर, पुष्पित और सुगन्धित वृक्ष सम्पूर्ण वन को अपनी सुगन्ध से भर देता है, वैसे ही एक सुपुत्र अपने सम्पूर्ण कुल को सुवासित (गौरवान्वित) कर देता है। यह श्लोक संख्या पर गुण की श्रेष्ठता बताता है: एक सचमुच सुयोग्य सन्तान, एक खिले हुए वृक्ष के समान, अपने चारों ओर सबको उज्ज्वल करने के लिए पर्याप्त है।

Origin & History

Source: Chanakya Niti

Author: Chanakya (Kautilya / Vishnugupta)

Period: Ancient India (c. 4th–3rd century BCE)

चाणक्य, नीति और राजनीति के महान आचार्य, ने व्यावहारिक ज्ञान के संक्षिप्त श्लोकों का संग्रह किया जो दो सहस्राब्दियों से अधिक समय से प्रचलित हैं। उनके सर्वाधिक प्रिय श्लोकों में से यह श्लोक एक ही सुगन्धित वृक्ष द्वारा सम्पूर्ण वन को महकाने के बिम्ब का प्रयोग करके यह सिखाता है कि एक सुपुत्र सम्पूर्ण वंश को गौरव प्रदान करता है — संख्या पर गुण की श्रेष्ठता का एक सजीव उपदेश।

Frequently Asked Questions

एकेनापि सुवृक्षेण कहाँ से आया है?
यह चाणक्य नीति में संरक्षित एक प्रसिद्ध सुभाषित है, जो चाणक्य (कौटिल्य) को आरोपित नैतिक और व्यावहारिक सूत्रों का संग्रह है। यह गुण को संख्या से श्रेष्ठ बताने वाले सर्वाधिक उद्धृत श्लोकों में से एक है।
इस श्लोक की मूल शिक्षा क्या है?
कि एक उत्कृष्ट उदाहरण अनेक साधारण उदाहरणों से बढ़कर है। जैसे एक ही पुष्पित, सुगन्धित वृक्ष सम्पूर्ण वन को महका देता है, वैसे ही एक सुपुत्र सम्पूर्ण कुल को गौरव प्रदान करता है — अतः चरित्र और गुण संख्या से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हैं।
क्या यह श्लोक केवल पुत्रों के विषय में है?
यद्यपि श्लोक में अक्षरशः 'सुपुत्र' (सद्गुणी पुत्र) कहा गया है, अपने काल के अनुरूप इसका भाव किसी भी सद्गुणी सन्तान या व्यक्ति पर लागू होता है। इसका वास्तविक उपदेश सार्वभौम है: सच्ची अच्छाई का एक जीवन उससे जुड़े सबको उज्ज्वल कर देता है।

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