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गुरु वंदना Meaning — Line by Line

गुरु वंदना

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of गुरु वंदना with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Verse 1#

Gurur Brahma Gurur Vishnu

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुर्साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

Gurur Brahma Gurur Vishnu Gurur Devo Maheshwarah Gurur Sakshat Param Brahma Tasmai Shri Gurave Namah

Meaningगुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं, गुरु ही साक्षात् महेश्वर (शिव) हैं; गुरु ही साक्षात् परब्रह्म हैं — उन श्रीगुरु को नमस्कार।

Verse 2#

Akhandamandalakaram

अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्। तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः॥

Akhandamandalakaram Vyaptam Yena Characharam Tatpadam Darshitam Yena Tasmai Shri Gurave Namah

Meaningजो अखण्ड मण्डलाकार रूप में समस्त चराचर जगत् में व्याप्त हैं — उस (ब्रह्मरूप) पद को दिखाने वाले श्रीगुरु को नमस्कार।

Verse 3#

Agyaana Timirandhasya

अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया। चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः॥

Agyaana Timirandhasya Gyananjana Shalakaya Chakshur Unmilitam Yena Tasmai Shri Gurave Namah

Meaningअज्ञान के अन्धकार से अन्धे (मुझ) के नेत्रों को ज्ञान-अंजन की शलाका से खोलने वाले श्रीगुरु को नमस्कार।

Verse 4#

Tvameva Mata Cha Pita Tvameva

त्वमेव माता पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देव देव॥

Tvameva Mata Cha Pita Tvameva Tvameva Bandhush Cha Sakha Tvameva Tvameva Vidya Dravinam Tvameva Tvameva Sarvam Mama Deva Deva

Meaningतुम ही माता हो, तुम ही पिता; तुम ही बन्धु और सखा हो; तुम ही विद्या और धन हो; हे देवदेव! तुम ही मेरा सर्वस्व हो।

Word-by-Word Breakdown

गुरु
Guru
गुरु — शिक्षक, अंधकार के नाशक (गु=अंधकार, रु=नाशक)
ब्रह्मा
Brahma
ब्रह्मा — सृष्टिकर्ता देव
विष्णुः
Vishnu
विष्णु — पालनकर्ता देव
महेश्वरः
Maheshwarah
महेश्वर — महान् ईश्वर (शिव)
साक्षात्
Sakshat
साक्षात् — प्रत्यक्ष, स्वयं
परं ब्रह्म
Param Brahma
परं ब्रह्म — परम परब्रह्म सत्य
अखण्डमण्डलाकारं
Akhandamandalakaram
अखण्डमण्डलाकारं — जिनका रूप ब्रह्माण्ड का अखण्ड मण्डल है
चराचरम्
Characharam
चराचरम् — समस्त चर और अचर प्राणी
अज्ञान
Agyaana
अज्ञान — अज्ञानता
तिमिरान्धस्य
Timirandhasya
तिमिरान्धस्य — के अंधकार से अंधे हुए
ज्ञानाञ्जन
Gyananjana
ज्ञानाञ्जन — ज्ञान का अंजन (काजल)
शलाकया
Shalakaya
शलाकया — शलाका (सलाई) से
चक्षुः उन्मीलितं
Chakshuh Unmilitam
चक्षुः उन्मीलितं — नेत्र खोले गए
त्वमेव
Tvameva
त्वमेव — तुम ही हो
माता
Mata
माता — माता
पिता
Pita
पिता — पिता
बन्धु
Bandhu
बन्धु — बन्धु, सगा-सम्बन्धी
सखा
Sakha
सखा — मित्र
विद्या
Vidya
विद्या — ज्ञान
द्रविणं
Dravinam
द्रविणं — धन

Origin & History

Source: Guru Gita (Skanda Purana)

Author: Attributed to Lord Shiva (taught to Parvati)

Period: Ancient (Puranic era)

गुरु गीता स्कन्द पुराण में भगवान शिव और देवी पार्वती के बीच एक संवाद है। पार्वती शिव से गुरु के स्वरूप और महत्त्व के विषय में पूछती हैं। शिव इन श्लोकों से उत्तर देते हैं, यह घोषित करते हुए कि गुरु सम्पूर्ण देवत्रयी — ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर — का स्वरूप हैं, क्योंकि गुरु ज्ञान का सृजन करते हैं, विद्या का पालन करते हैं और अज्ञान का नाश करते हैं। 'त्वमेव माता' श्लोक एक भिन्न स्रोत से है और समर्पण की एक सार्वभौमिक प्रार्थना है।

Frequently Asked Questions

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है कि गुरु (शिक्षक) ब्रह्मा (ज्ञान के स्रष्टा) हैं, गुरु विष्णु (ज्ञान के पालक) हैं, गुरु शिव (ज्ञान द्वारा रूपान्तरकर्ता) हैं, और गुरु ही साक्षात् परम सत्य हैं। यह शिक्षक को देवत्रयी के स्तर तक उन्नत करता है।
गुरु वंदना किसने लिखी?
ये श्लोक गुरु गीता से हैं, जो स्कन्द पुराण का एक अंश है, और गुरु के महत्त्व पर भगवान शिव तथा देवी पार्वती के बीच संवाद के रूप में प्रस्तुत है।
गुरु वंदना का पाठ कब किया जाता है?
पारम्परिक भारतीय शिक्षा में प्रत्येक कक्षा के पूर्व, आध्यात्मिक साधनाओं के आरम्भ में, गुरु पूर्णिमा (जुलाई की पूर्णिमा) के समय, और जब भी ज्ञान या मार्गदर्शन की कामना हो।
त्वमेव माता च पिता का अर्थ क्या है?
तुम ही मेरी माता, पिता, बन्धु, सखा, विद्या और धन हो — तुम ही मेरा सर्वस्व हो। यह श्लोक ईश्वर या गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति को व्यक्त करता है, उन्हें जीवन में सबकुछ का स्रोत मानते हुए।

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