मूल मंत्र Meaning — Line by Line
मूल मंत्र
Every verse and every word explained in English & Hindi
Meaning — Line by Line
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Ik Onkar
ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुर प्रसादि ।।
Ik Onkar Sat Naam Karta Purakh Nirbhau Nirvair Akal Murat Ajooni Saibhang Gur Prasad ||
Meaningएक ही सर्वव्यापक सृष्टिकर्ता परमेश्वर है। उसका नाम सत्य है। वह सबका रचयिता है। वह भयरहित है। वह बैररहित है। वह कालातीत और निराकार है। वह जन्म-मृत्यु से परे, स्वयंभू है। वह गुरु की कृपा से प्राप्त होता है।
Om Ik Onkar
ॐ इक ओंकार सतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुर प्रसादि
Om Ik Onkar Sat Naam Karta Purakh Nirbhau Nirvair Akal Murat Ajooni Saibhang Gur Prasad
Meaningॐ। एक परमेश्वर। सत्य ही उसका नाम है। वह सबका रचयिता है। भयरहित। बैररहित। कालातीत स्वरूप। जन्म-मृत्यु से परे। स्वयं-प्रकाशित। गुरु की कृपा से जाना जाता है।
Word-by-Word Breakdown
Origin & History
Source: Guru Granth Sahib (opening verse)
Author: Guru Nanak Dev Ji
Period: 1469-1539 CE
गुरु नानक ने सुल्तानपुर लोधी में बेईं नदी पर अपने रूपांतरकारी अनुभव के बाद मूल मंत्र की रचना की। तीस वर्ष की आयु में नानक नदी में स्नान करने गए और तीन दिन तक लुप्त रहे। उनके परिवार को भय हुआ कि वे डूब गए। जब वे प्रकट हुए, तो एक दिन मौन रहे, फिर अपने पहले शब्द कहे: 'न कोई हिंदू है, न कोई मुसलमान। तो मैं किसका मार्ग अपनाऊँ? मैं परमात्मा का मार्ग अपनाऊँगा।' मूल मंत्र वह पहला प्रकाश था जो उन्होंने साझा किया — समस्त मानवीय विभाजनों से परे एक परमात्मा का वर्णन।
Frequently Asked Questions
मूल मंत्र क्या है?▼
मूल मंत्र किसने लिखा?▼
क्या गैर-सिख मूल मंत्र का पाठ कर सकते हैं?▼
इक ओंकार का क्या अर्थ है?▼
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