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मूल मंत्र Meaning — Line by Line

मूल मंत्र

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of मूल मंत्र with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Verse 1#

Ik Onkar

ਸਤਿ ਨਾਮੁ करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुर प्रसादि ।।

Ik Onkar Sat Naam Karta Purakh Nirbhau Nirvair Akal Murat Ajooni Saibhang Gur Prasad ||

Meaningएक ही सर्वव्यापक सृष्टिकर्ता परमेश्वर है। उसका नाम सत्य है। वह सबका रचयिता है। वह भयरहित है। वह बैररहित है। वह कालातीत और निराकार है। वह जन्म-मृत्यु से परे, स्वयंभू है। वह गुरु की कृपा से प्राप्त होता है।

Verse 2#

Om Ik Onkar

इक ओंकार सतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुर प्रसादि

Om Ik Onkar Sat Naam Karta Purakh Nirbhau Nirvair Akal Murat Ajooni Saibhang Gur Prasad

Meaningॐ। एक परमेश्वर। सत्य ही उसका नाम है। वह सबका रचयिता है। भयरहित। बैररहित। कालातीत स्वरूप। जन्म-मृत्यु से परे। स्वयं-प्रकाशित। गुरु की कृपा से जाना जाता है।

Word-by-Word Breakdown

इक ओंकार
Ik Onkar
एक ही परमेश्वर है, सर्वव्यापक सृष्टिकर्ता
सतिनामु
Sat Naam
उसका नाम सत्य है, शाश्वत सत्य
करता पुरखु
Karta Purakh
वह सबका रचयिता है
निरभउ
Nirbhau
भयरहित
निरवैरु
Nirvair
बैररहित, शत्रुतारहित
अकाल मूरति
Akal Murat
कालातीत स्वरूप, मृत्यु से परे
अजूनी
Ajooni
जन्म-मृत्यु से परे, अजन्मा
सैभं
Saibhang
स्वयंभू, स्वयं-प्रकाशित
गुर प्रसादि
Gur Prasad
गुरु की कृपा से प्राप्त

Origin & History

Source: Guru Granth Sahib (opening verse)

Author: Guru Nanak Dev Ji

Period: 1469-1539 CE

गुरु नानक ने सुल्तानपुर लोधी में बेईं नदी पर अपने रूपांतरकारी अनुभव के बाद मूल मंत्र की रचना की। तीस वर्ष की आयु में नानक नदी में स्नान करने गए और तीन दिन तक लुप्त रहे। उनके परिवार को भय हुआ कि वे डूब गए। जब वे प्रकट हुए, तो एक दिन मौन रहे, फिर अपने पहले शब्द कहे: 'न कोई हिंदू है, न कोई मुसलमान। तो मैं किसका मार्ग अपनाऊँ? मैं परमात्मा का मार्ग अपनाऊँगा।' मूल मंत्र वह पहला प्रकाश था जो उन्होंने साझा किया — समस्त मानवीय विभाजनों से परे एक परमात्मा का वर्णन।

Frequently Asked Questions

मूल मंत्र क्या है?
मूल मंत्र गुरु ग्रंथ साहिब, सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ, का आरंभिक छंद है। गुरु नानक देव जी द्वारा रचित, इसे वह मूल मंत्र माना जाता है जो परमात्मा के स्वरूप के विषय में सिख विश्वास के संपूर्ण सार को समेटे है।
मूल मंत्र किसने लिखा?
गुरु नानक देव जी (1469-1539), सिख धर्म के संस्थापक, ने मूल मंत्र की रचना की। यह बेईं नदी पर उनके आत्मज्ञान के अनुभव के बाद उनकी पहली रचना थी, जहाँ वे तीन दिन तक लुप्त रहे और इस घोषणा के साथ लौटे: 'न कोई हिंदू है, न कोई मुसलमान।'
क्या गैर-सिख मूल मंत्र का पाठ कर सकते हैं?
हाँ। मूल मंत्र का संदेश सार्वभौमिक है — यह उस एक परमात्मा का वर्णन करता है जो सभी धर्मों, भयों और द्वेषों से परे है। गुरु नानक की शिक्षाएँ बल देती हैं कि परमात्मा समस्त मानवता का है।
इक ओंकार का क्या अर्थ है?
इक का अर्थ है एक। ओंकार का अर्थ है परमात्मा/सृष्टिकर्ता (ओम से व्युत्पन्न)। मिलकर, इक ओंकार का अर्थ है 'एक ही परमात्मा है' — सिख धर्म का मूल विश्वास कि एक ही सार्वभौमिक सृजनात्मक शक्ति है।

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