पवनज अष्टकम्
अन्य नाम / खोज: bhavabhayapaham bharatipatim bhajakasaukhyadam bhanudidhitim · pavanaja ashtakam lyrics
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✦ अर्थ
पवनज अष्टकम् पवनज (पवन-पुत्र हनुमान) की आठ श्लोकों की स्तुति है — सूर्य-से तेजस्वी, संसार-भय के नाशक, वाणी-पति के प्रिय, परम सुख व ज्ञान के दाता। श्रद्धा से इसका पाठ करने पर देवता की कृपा और रक्षा प्राप्त होती है। यह मन को शांत करता है और भक्ति को बढ़ाता है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional (Hanumat Stuti Manjari) · Traditional · Classical
पवनज अष्टकम् एक प्रिय पारंपरिक स्तोत्र है। यह पवनज (पवन-पुत्र हनुमान) की आठ श्लोकों की स्तुति है — सूर्य-से तेजस्वी, संसार-भय के नाशक, वाणी-पति के प्रिय, परम सुख व ज्ञान के दाता।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि सच्चे और भक्तिमय हृदय से पवनज अष्टकम् का पाठ करना उस दिव्यता की कृपा के निकट जाना है, जो प्रेम से उसे पुकारने वालों को कभी नहीं त्यागती।
मंत्र
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भवभयापहं भारतीपतिं भजकसौख्यदं भानुदीधितिम् । भुवनसुन्दरं भूतिदं हरिं भजत सज्जना मारुतात्मजम् ॥ १॥ अमितविक्रमं ह्यञ्जनासुतं भयविनाशनं त्वब्जलोचनम् । असुरघातिनं ह्यब्धिलङ्घिनं भजत सज्जना मारुतात्मजम् ॥ २॥ परभयङ्करं पाण्डुनन्दनं पतितपावनं पापहारिणम् । परमसुन्दरं पङ्कजाननं भजत सज्जना मारुतात्मजम् ॥ ३॥ कलिविनाशकं कौरवान्तकं कलुषसंहरं कामितप्रदम् । कुरुकुलोद्भवं कुम्भिणीपतिं भजत सज्जना मारुतात्मजम् ॥ ४॥ मतविवर्धनं मायिमर्दनं मणिविभञ्जनं मध्वनामकम् । महितसन्मतिं मानदायकं भजत सज्जना मारुतात्मजम् ॥ ५॥ द्विजकुलोद्भवं दिव्यविग्रहं दितिजहारिणं दीनरक्षकम् । दिनकरप्रभं दिव्यमानसं भजत सज्जना मारुतात्मजम् ॥ ६॥ कपिकुलोद्भवं केसरीसुतं भरतपङ्कजं भीमनामकम् । विबुधवन्दितं विप्रवंशजं भजत सज्जना मारुतात्मजम् ॥ ७॥ पठति यः पुमान् पापनाशकं पवनजाष्टकं पुण्यवर्धनम् । परमसौख्यदं ज्ञानमुत्तमं भुवि सुनिर्मलं याति सम्पदम् ॥ ८॥
bhavabhayāpahaṃ bhāratīpatiṃ bhajakasaukhyadaṃ bhānudīdhitim | bhuvanasundaraṃ bhūtidaṃ hariṃ bhajata sajjanā mārutātmajam || 1|| amitavikramaṃ hyañjanāsutaṃ bhayavināśanaṃ tvabjalocanam | asuraghātinaṃ hyabdhilaṅghinaṃ bhajata sajjanā mārutātmajam || 2|| parabhayaṅkaraṃ pāṇḍunandanaṃ patitapāvanaṃ pāpahāriṇam | paramasundaraṃ paṅkajānanaṃ bhajata sajjanā mārutātmajam || 3|| kalivināśakaṃ kauravāntakaṃ kaluṣasaṃharaṃ kāmitapradam | kurukulodbhavaṃ kumbhiṇīpatiṃ bhajata sajjanā mārutātmajam || 4|| matavivardhanaṃ māyimardanaṃ maṇivibhañjanaṃ madhvanāmakam | mahitasanmatiṃ mānadāyakaṃ bhajata sajjanā mārutātmajam || 5|| dvijakulodbhavaṃ divyavigrahaṃ ditijahāriṇaṃ dīnarakṣakam | dinakaraprabhaṃ divyamānasaṃ bhajata sajjanā mārutātmajam || 6|| kapikulodbhavaṃ kesarīsutaṃ bharatapaṅkajaṃ bhīmanāmakam | vibudhavanditaṃ vipravaṃśajaṃ bhajata sajjanā mārutātmajam || 7|| paṭhati yaḥ pumān pāpanāśakaṃ pavanajāṣṭakaṃ puṇyavardhanam | paramasaukhyadaṃ jñānamuttamaṃ bhuvi sunirmalaṃ yāti sampadam || 8||
अर्थ:पवनज (पवन-पुत्र हनुमान) की आठ श्लोकों की स्तुति — सूर्य-से तेजस्वी, संसार-भय के नाशक, वाणी-पति के प्रिय, परम सुख व ज्ञान के दाता।
पवनज अष्टकम् पाठ के लाभ
पवनज अष्टकम् के पाठ से देवता की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्राप्त होती है, ऐसा माना जाता है।
यह भक्ति को बढ़ाता है, मन को शांत करता है और भगवान के स्मरण में हृदय को स्थिर करता है।
मंगलवार और शनिवार को तथा हनुमान जयंती के समय यह सर्वाधिक शुभ है।
यह एक मूल्यवान संस्कृत स्तोत्र है, जो श्रद्धा सहित प्रतिदिन पाठ के लिए उपयुक्त है।
पवनज अष्टकम् जप विधि
स्नान करके देवता की मूर्ति के समक्ष पूर्व की ओर मुख करके बैठें। दीपक जलाएं और पवनज अष्टकम् का धीरे-धीरे भक्ति के साथ पाठ करें। इसे प्रतिदिन पढ़ा जा सकता है, अथवा विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को तथा हनुमान जयंती के समय।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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