सरस्वती गायत्री मंत्र
अन्य नाम / खोज: om saraswatyai cha vidmahe brahma putryai cha dhimahi
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✦ अर्थ
सरस्वती गायत्री मंत्र देवी सरस्वती का गायत्री मंत्र है, जो पवित्र गायत्री छंद में रचा गया है। यह ज्ञान, बुद्धि, विद्या, वाणी और कलाओं के लिए सरस्वती की कृपा का आह्वान करता है तथा 'विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्' की शाश्वत शैली में बुद्धि को प्रेरित और प्रकाशित करता है।
उत्पत्ति और कथा
The Gayatri mantra of Goddess Saraswati · Traditional (Vedic)
सार्वभौमिक गायत्री मंत्र के अतिरिक्त, वैदिक परम्परा प्रत्येक महान देवता को अपनी गायत्री देती है — पवित्र गायत्री छंद में एक प्रार्थना जो उस देवता को बुद्धि प्रकाशित करने के लिए पुकारती है। सरस्वती गायत्री मंत्र ज्ञान, बुद्धि, विद्या, वाणी और कलाओं की दात्री सरस्वती का आह्वान 'विद्महे… धीमहि… प्रचोदयात्' की शाश्वत शैली में करता है — 'हम जानें, हम ध्यान करें, देवी हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।' संध्या समयों में जपने पर यह एक सम्पूर्ण और सौम्य दैनिक साधना है।
मंत्र
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ॐ सरस्वत्यै च विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै च धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥
Om Saraswatyai cha Vidmahe Brahma-putryai cha Dhimahi. Tanno Devi Prachodayat.
अर्थ:ॐ। हम Goddess Saraswati को जानें, उनका ध्यान करें; वे Goddess Saraswati हमारी बुद्धि को प्रेरित व प्रकाशित करें।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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सरस्वती गायत्री मंत्र पाठ के लाभ
देवी सरस्वती का गायत्री मंत्र — पवित्र गायत्री छंद, समस्त वैदिक छंदों में सर्वाधिक शक्तिशाली, के माध्यम से सरस्वती की कृपा का आह्वान।
ज्ञान, बुद्धि, विद्या, वाणी और कलाओं के लिए तथा बुद्धि को जगाने और प्रकाशित करने के लिए जपा जाता है (हर गायत्री का सार यही है)।
सरस्वती का एक सम्पूर्ण, दैनिक वैदिक मंत्र, ध्यान, जप और पूजा के आरम्भ के लिए उपयुक्त।
बुधवार और बसंत पंचमी को, तीनों संध्या समय (प्रातः, मध्याह्न, सायं), पूर्व की ओर मुख करके सर्वाधिक शक्तिशाली।
माला पर शांत, एकाग्र मन से 108 बार पढ़ा जाता है; कहा जाता है कि यह स्पष्टता, शांति और सरस्वती के स्थिर आशीर्वाद लाता है।
प्रायः महान गायत्री मंत्र ('ॐ भूर्भुवः स्वः…') के साथ दैनिक साधना के अंग रूप में जपा जाता है।
सरस्वती गायत्री मंत्र जप विधि
स्नान के पश्चात्, प्रातःकाल पूर्व की ओर मुख करके शांत मन से बैठें और 'ॐ सरस्वत्यै च विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै च धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्' को माला पर 108 बार जपें। समस्त गायत्री मंत्रों की भाँति इसे आदर्श रूप से संध्या समयों (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में पढ़ा जाता है। सरस्वती को हृदय में धारण करें और मंत्र को मन को स्थिर करने दें। इसे सार्वभौमिक गायत्री मंत्र के साथ एक सम्पूर्ण साधना के रूप में प्रतिदिन जपा जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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