सरस्वती चालीसा
अन्य नाम / खोज: janaka janani pada kamala raja nija mastaka para dhari · saraswati chalisa lyrics
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✦ अर्थ
सरस्वती चालीसा ज्ञान, संगीत और वाणी की देवी सरस्वती की चालीस पदों वाली स्तुति है। यह स्मरण कराती है कि किस प्रकार उनकी कृपा से डाकू वाल्मीकि आदिकवि बन गए और कालिदास, तुलसीदास तथा सूरदास को प्रतिभा प्राप्त हुई। विद्यार्थी इसे अध्ययन और परीक्षा से पूर्व पढ़ते हैं।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Hindi devotional hymn · Traditional (signed 'Ramsagar') · Devotional era
सरस्वती चालीसा विद्या, संगीत और वाणी की देवी की चालीस पदों वाली हिन्दी स्तुति है। यह बताती है कि जब-जब पाप-बुद्धि संसार को ढक लेती है, तब माता धर्म की ज्योति पुनः प्रकाशित करने अवतार लेती हैं, और केवल उनकी कृपा से ही हत्यारा वाल्मीकि आदिकवि बना तथा कालिदास, तुलसीदास और सूरदास जैसे कवियों ने अपनी प्रतिभा पाई — हर भक्त को जो उन्हें खोजता है, ज्ञान का यह वचन है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
यह चालीसा सरस्वती की शक्ति केवल विद्या पर नहीं, अपितु हर संकट पर बताती है — क्रोधित राजा, वन के हिंसक पशु, तूफान में टूटता जहाज, बंदी के बंधन — और घोषणा करती है कि जो उनका नाम जपता है, उसके लिए सब मंगलमय हो जाता है। सबसे बढ़कर यह उनका परम उपहार स्मरण कराती है: उन्होंने एक वन के डाकू को वाल्मीकि, आदिकवि बना दिया — यह प्रमाण कि उनकी कृपा किसी को भी बदल सकती है।
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जनक जननि पद कमल रज, निज मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥
Janaka janani pada kamala raja, nija mastaka para dhari Bandaum matu sarasvati, buddhi bala de datari
अर्थ:अपने माता-पिता के चरण-कमलों की रज को अपने मस्तक पर धारण कर, मैं माता सरस्वती को नमन करता हूँ — हे दात्री, मुझे बुद्धि और बल प्रदान करो।
पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। रामसागर के पाप को, मातु तुही अब हन्तु॥
Purna jagata mem vyapta tava, mahima amita anamtu Ramasagara ke papa ko, matu tuhi aba hantu
अर्थ:आपकी महिमा सम्पूर्ण जगत में व्याप्त है, असीम और अनंत; हे माता, अब (कवि) रामसागर के पापों का नाश करो।
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥
Jaya shri sakala buddhi balarasi Jaya sarvajna amara avinasi
अर्थ:जय हो, हे यशस्विनी, समस्त बुद्धि और बल की राशि; जय हो, हे सर्वज्ञ, अमर और अविनाशी।
जय जय जय वीणाकर धारी। करती सदा सुहंस सवारी॥
Jaya jaya jaya vinakara dhari Karati sada suhamsa savari
अर्थ:जय, जय, जय, हे वीणा धारण करने वाली; जो सदा सुन्दर हंस पर सवारी करती हैं।
रूप चतुर्भुजधारी माता। सकल विश्व अन्दर विख्याता॥
Rupa chaturbhujadhari mata Sakala vishva andara vikhyata
अर्थ:हे चतुर्भुजधारी माता, जो समस्त विश्व में विख्यात हैं।
जग में पाप बुद्धि जब होती। जबहि धर्म की फीकी ज्योती॥
Jaga mem papa buddhi jaba hoti Jabahi dharma ki phiki jyoti
अर्थ:जब जगत में पापमय बुद्धि उत्पन्न होती है, और धर्म की ज्योति मंद पड़ जाती है —
तबहि मातु ले निज अवतारा। पाप हीन करती महि तारा॥
Tabahi matu le nija avatara Papa hina karati mahi tara
अर्थ:— तब माता अपना अवतार लेती हैं, और उसे पापरहित कर पृथ्वी का उद्धार करती हैं।
बाल्मीकि जी थे हत्यारा। तव प्रसाद जानै संसारा॥
Balmiki ji the hatyara Tava prasada janai samsara
अर्थ:वाल्मीकि हत्यारे थे; आपकी कृपा से अब संसार उन्हें जानता है —
रामायण जो रचे बनाई। आदि कवी की पदवी पाई॥
Ramayana jo rache banai Adi kavi ki padavi pai
अर्थ:— क्योंकि उन्होंने रामायण की रचना की और आदि कवि की पदवी प्राप्त की।
कालिदास जो भये विख्याता। तेरी कृपा दृष्टि से माता॥
Kalidasa jo bhaye vikhyata Teri kripa drishti se mata
अर्थ:कालिदास विख्यात हुए, हे माता, आपकी कृपा-दृष्टि से।
तुलसी सूर आदि विद्धाना। भये और जो ज्ञानी नाना॥
Tulasi sura adi viddhana Bhaye aura jo jnani nana
अर्थ:तुलसीदास, सूरदास और अन्य विद्वान, तथा अनेक ज्ञानीजन हुए —
तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा। केवल कृपा आपकी अम्बा॥
Tinhahim na aura raheu avalamba Kevala kripa apaki amba
अर्थ:— उन्हें कोई और सहारा नहीं था, हे माता अम्बा, केवल आपकी कृपा थी।
करहु कृपा सोइ मातु भवानी। दुखित दीन निज दासहि जानी॥
Karahu kripa soi matu bhavani Dukhita dina nija dasahi jani
अर्थ:ऐसी कृपा करो, हे माता भवानी, अपने सेवक को दुखी और दीन जानकर।
पुत्र करै अपराध बहूता। तेहि न धरइ चित सुन्दर माता॥
Putra karai aparadha bahuta Tehi na dharai chita sundara mata
अर्थ:यद्यपि पुत्र अनेक अपराध करता है, फिर भी कृपालु माता उसे मन में नहीं लातीं।
राखु लाज जननी अब मेरी। विनय करूं बहु भांति घनेरी॥
Rakhu laja janani aba meri Vinaya karum bahu bhamti ghaneri
अर्थ:अब मेरी लाज रखो, हे जननी; मैं अनेक प्रकार से बहुत प्रार्थना करता हूँ।
मैं अनाथ तेरी अवलंबा। कृपा करउ जय जय जगदंबा॥
Maim anatha teri avalamba Kripa karau jaya jaya jagadamba
अर्थ:मैं अनाथ हूँ, आप मेरी अवलम्ब हैं; कृपा करो — जय, जय, हे जगदम्बा।
मधु कैटभ जो अति बलवाना। बाहुयुद्ध विष्णू ते ठाना॥
Madhu kaitabha jo ati balavana Bahuyuddha vishnu te thana
अर्थ:मधु और कैटभ, अत्यंत बलवान, ने विष्णु से बाहुयुद्ध किया।
समर हजार पांच में घोरा। फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा॥
Samara hajara pamcha mem ghora Phira bhi mukha unase nahim mora
अर्थ:पाँच हजार वर्षों तक घोर युद्ध चला, फिर भी उन्होंने उनसे मुख नहीं मोड़ा।
मातु सहाय भई तेहि काला। बुद्धि विपरीत करी खलहाला॥
Matu sahaya bhai tehi kala Buddhi viparita kari khalahala
अर्थ:उस समय माता उनकी सहायक हुईं, और उन दुष्टों की बुद्धि विपरीत कर दी।
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी। पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥
Tehi te mrityu bhai khala keri Puravahu matu manoratha meri
अर्थ:उसी से उन दुष्टों की मृत्यु हुई; हे माता, मेरे मनोरथ पूर्ण करो।
चंड मुण्ड जो थे विख्याता। छण महुं संहारेउ तेहि माता॥
Chamda munda jo the vikhyata Chhana mahum samhareu tehi mata
अर्थ:चंड और मुंड, जो विख्यात थे, उन्हें माता ने क्षण भर में संहार कर दिया।
रक्तबीज से समरथ पापी। सुर-मुनि हृदय धरा सब कांपी॥
Raktabija se samaratha papi Sura-muni hridaya dhara saba kampi
अर्थ:रक्तबीज, वह समर्थ पापी, जिससे देवताओं और मुनियों के हृदय सब काँप उठे —
काटेउ सिर जिम कदली खम्बा। बार बार बिनवउं जगदंबा॥
Kateu sira jima kadali khamba Bara bara binavaum jagadamba
अर्थ:— आपने उसका सिर ऐसे काट डाला जैसे कोई केले का तना काटता है; बार-बार मैं विनती करता हूँ, हे जगदम्बा।
जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा। छिन में बधे ताहि तू अम्बा॥
Jaga prasiddha jo shumbha nishumbha Chhina mem badhe tahi tu amba
अर्थ:जगत्प्रसिद्ध शुम्भ और निशुम्भ — क्षण भर में आपने उन्हें वध कर दिया, हे अम्बा।
भरत-मातु बुधि फेरेउ जाई। रामचंद्र बनवास कराई॥
Bharata-matu budhi phereu jai Ramachamdra banavasa karai
अर्थ:आपने भरत की माता (कैकेयी) की बुद्धि फेर दी, जिससे रामचंद्र का वनवास हुआ।
एहि विधि रावन वध तुम कीन्हा। सुर नर मुनि सब कहुं सुख दीन्हा॥
Ehi vidhi ravana vadha tuma kinha Sura nara muni saba kahum sukha dinha
अर्थ:इस प्रकार आपने रावण का वध करवाया, और देवताओं, मनुष्यों एवं मुनियों सबको सुख दिया।
को समरथ तव यश गुन गाना। निगम अनादि अनंत बखाना॥
Ko samaratha tava yasha guna gana Nigama anadi anamta bakhana
अर्थ:कौन समर्थ है जो आपके यश और गुणों का गान कर सके? वेद आपको अनादि और अनंत कहते हैं।
विष्णु रूद्र अज सकहिं न मारी। जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥
Vishnu rudra aja sakahim na mari Jinaki ho tuma rakshakari
अर्थ:विष्णु, रुद्र और अज (ब्रह्मा) भी मारे नहीं जा सकते — जिनकी आप रक्षाकारिणी हैं।
रक्त दन्तिका और शताक्षी। नाम अपार है दानव भक्षी॥
Rakta dantika aura shatakshi Nama apara hai danava bhakshi
अर्थ:रक्तदन्तिका और शताक्षी — आपके नाम अपार हैं, हे दानवों का भक्षण करने वाली।
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा। दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥
Durgama kaja dhara para kinha Durga nama sakala jaga linha
अर्थ:आपने पृथ्वी पर दुर्गम कार्य किए; समस्त जगत ने 'दुर्गा' नाम ग्रहण किया।
दुर्ग आदि हरनी तू माता। कृपा करहु जब जब सुखदाता॥
Durga adi harani tu mata Kripa karahu jaba jaba sukhadata
अर्थ:आप वह माता हैं जो प्रत्येक दुर्गम (कठिनाई) को हरती हैं; जब-जब आवश्यकता हो कृपा करो, हे सुखदात्री।
नृप कोपित जो मारन चाहै। कानन में घेरे मृग नाहै॥
Nripa kopita jo marana chahai Kanana mem ghere mriga nahai
अर्थ:जब कोई कुपित राजा मारना चाहे, या कोई वन में पशुओं से घिर जाए —
सागर मध्य पोत के भंगे। अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥
Sagara madhya pota ke bhamge Ati tuphana nahim kou samge
अर्थ:— जब समुद्र के बीच महा-तूफान में नौका टूट जाए, और कोई साथी निकट न हो —
भूत प्रेत बाधा या दुःख में। हो दरिद्र अथवा संकट में॥
Bhuta preta badha ya duhkha mem Ho daridra athava samkata mem
अर्थ:— भूत-प्रेत की बाधा में, दरिद्रता में अथवा संकट में —
नाम जपे मंगल सब होई। संशय इसमें करइ न कोई॥
Nama jape mamgala saba hoi Samshaya isamem karai na koi
अर्थ:— आपका नाम जपने से सब मंगलमय हो जाता है; इसमें कोई संशय न करे।
पुत्रहीन जो आतुर भाई। सबै छांड़ि पूजें एहि माई॥
Putrahina jo atura bhai Sabai chhamड़i pujem ehi mai
अर्थ:पुत्रहीन, व्याकुल जन — सब कुछ छोड़कर इस माता की पूजा करें।
करै पाठ नित यह चालीसा। होय पुत्र सुन्दर गुण ईसा॥
Karai patha nita yaha chalisa Hoya putra sundara guna isa
अर्थ:जो प्रतिदिन यह चालीसा पढ़ता है, उसे ईश (शिव) के समान सुन्दर और गुणवान पुत्र प्राप्त होता है।
धूपादिक नैवेद्य चढावै। संकट रहित अवश्य हो जावै॥
Dhupadika naivedya chadhavai Samkata rahita avashya ho javai
अर्थ:धूप और नैवेद्य अर्पित करने से मनुष्य अवश्य संकट से मुक्त हो जाता है।
भक्ति मातु की करै हमेशा। निकट न आवै ताहि कलेशा॥
Bhakti matu ki karai hamesha Nikata na avai tahi kalesha
अर्थ:जो सदा माता की भक्ति करता है — उसके निकट कोई क्लेश नहीं आता।
बंदी पाठ करें शत बारा। बंदी पाश दूर हो सारा॥
Bamdi patha karem shata bara Bamdi pasha dura ho sara
अर्थ:जो बंदी इसे सौ बार पढ़ता है, उसके बंधन के सब पाश दूर हो जाते हैं।
करहु कृपा भवमुक्ति भवानी। मो कहं दास सदा निज जानी॥
Karahu kripa bhavamukti bhavani Mo kaham dasa sada nija jani
अर्थ:कृपा करो और भवमुक्ति प्रदान करो, हे भवानी, मुझे सदा अपना दास जानकर।
माता सूरज कान्ति तव, अंधकार मम रूप। डूबन ते रक्षा करहु, परूं न मैं भव-कूप॥
Mata suraja kanti tava, amdhakara mama rupa Dubana te raksha karahu, parum na maim bhava-kupa
अर्थ:हे माता, आपकी कांति सूर्य की है, मेरा रूप अंधकार है; मुझे डूबने से बचाओ, कि मैं भव-कूप में न गिरूँ।
बल बुद्धि विद्या देहुं मोहि, सुनहु सरस्वति मातु। अधम रामसागरहिं तुम, आश्रय देउ पुनातु॥
Bala buddhi vidya dehum mohi, sunahu sarasvati matu Adhama ramasagarahim tuma, ashraya deu punatu
अर्थ:मुझे बल, बुद्धि और विद्या प्रदान करो; हे माता सरस्वती, मेरी सुनो; हे पुनीत करने वाली, दीन रामसागर को आश्रय दो।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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सरस्वती चालीसा पाठ के लाभ
सरस्वती चालीसा का पाठ ज्ञान, बुद्धि, स्मृति और वाक्पटुता के लिए माँ सरस्वती की कृपा का आह्वान करता है।
विद्यार्थियों, विद्वानों, कलाकारों और संगीतज्ञों को विशेष प्रिय; परीक्षा और अध्ययन से पूर्व पढ़ा जाता है।
बसंत पंचमी, सरस्वती का पर्व, तथा बुधवार को सर्वाधिक शुभ माना जाता है।
यह चालीसा स्मरण कराती है कि उनकी कृपा ने वाल्मीकि को आदिकवि बनाया और कालिदास, तुलसीदास तथा सूरदास को प्रेरित किया।
कहा जाता है कि यह मन की मन्दता दूर करती है, स्पष्ट समझ देती है और विद्या तथा कलाओं में सफलता लाती है।
सौ बार पाठ करने पर इसे बंदी के बंधन भी ढीले करने वाला कहा गया है।
सरस्वती चालीसा जप विधि
माँ सरस्वती की मूर्ति या चित्र के सम्मुख, श्वेत वस्त्र में बैठें, उनके सामने पुस्तकें या वाद्ययंत्र रखें। श्वेत पुष्प अर्पित करें, दीप जलाएँ और शांत, एकाग्र मन से आरम्भिक दोहे तथा चालीस चौपाइयों का पाठ करें। विद्यार्थी इसे अध्ययन और परीक्षाओं से पूर्व पढ़ते हैं; बसंत पंचमी सर्वाधिक शुभ दिन है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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