सरस्वती आरती — ॐ जय सरस्वती माता
अन्य नाम / खोज: jai saraswati mata · saraswati mata ki aarti
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✦ अर्थ
सरस्वती आरती 'ॐ जय सरस्वती माता' विद्या, संगीत और कला की देवी सरस्वती की स्तुति है। यह बसंत पंचमी पर तथा परीक्षा से पूर्व गाई जाती है, और बुद्धि, ज्ञान तथा कलात्मक प्रतिभा का आशीर्वाद आमंत्रित करती है, अज्ञान व मोह को दूर करती है।
उत्पत्ति और कथा
Hindu devotional tradition · Unknown (folk tradition) · Medieval period
सरस्वती आरती देवता-विशिष्ट आरतियों की परंपरा का पालन करती है जो भक्ति आंदोलन के दौरान विकसित हुई। सरस्वती पूजा विशेष रूप से पूर्वी और उत्तरी भारत में प्रबल है, जहाँ बसंत पंचमी प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह आरती सरस्वती के आवश्यक गुणों को प्रकट करती है — उनके श्वेत वस्त्र (पवित्रता के प्रतीक), उनकी वीणा (संगीत और कला), और समस्त ज्ञान के परम स्रोत के रूप में उनकी भूमिका।
✦ शास्त्रों में वर्णित
बसंत पंचमी के दौरान छोटे बच्चों के लिए विद्या में दीक्षा के रूप में अपने पहले शब्द लिखने की परंपरा है (विद्यारंभ संस्कार)। अनगिनत माता-पिता गवाही देते हैं कि जो बच्चे सरस्वती के आशीर्वाद से अपनी शिक्षा आरंभ करते हैं, वे सीखने में उल्लेखनीय योग्यता दिखाते हैं। देवी को महान विद्वानों को प्रेरित करने का श्रेय भी दिया जाता है — कालिदास, जिन्हें सबसे महान संस्कृत कवि माना जाता है, कहा जाता है कि एक निरक्षर लकड़हारे थे जब तक सरस्वती ने उन्हें असाधारण काव्य प्रतिभा से आशीर्वादित नहीं किया।
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ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता। सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ ॐ जय सरस्वती माता॥
Om Jai Saraswati Mata Jai Jai Saraswati Mata Sadgun Vaibhav Shalini Tribhuvan Vikhyata Om Jai Saraswati Mata
अर्थ:ॐ जय सरस्वती माता! सद्गुण और वैभव से सम्पन्न, तीनों लोकों में विख्यात। ॐ जय सरस्वती माता!
चन्द्रवदनी पद्मासनी, ध्यान धरत जन जोई। षट् दर्शन की वाणी, मन बंसी को खोई॥ ॐ जय सरस्वती माता॥
Chandravadani Padmasani Dhyan Dharat Jan Joi Shat Darshan Ki Vani Man Bansi Ko Khoi Om Jai Saraswati Mata
अर्थ:चन्द्रमुखी, कमल पर विराजमान — जो आपका ध्यान धरता है, षट् दर्शनों की वाणी मन को बाँसुरी की धुन भुला देती है। ॐ जय सरस्वती माता!
शुक्ल वसन परिधानी, शोभत कर में वीणा। शारद पुत्री विद्या दानी, सकल जन हित कीना॥ ॐ जय सरस्वती माता॥
Shukla Vasan Paridhani Shobhat Kar Mein Veena Sharad Putri Vidya Dani Sakal Jan Hit Keena Om Jai Saraswati Mata
अर्थ:श्वेत वस्त्र धारण किए, हाथों में वीणा सुशोभित है। शारद की पुत्री, विद्यादायिनी, समस्त जनों का हित करने वाली। ॐ जय सरस्वती माता!
बुद्धि विद्या दायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञानता हर के, नैन ज्ञान दो भरो॥ ॐ जय सरस्वती माता॥
Buddhi Vidya Dayini Gyan Prakash Bharo Moh Agyanta Har Ke Nain Gyan Do Bharo Om Jai Saraswati Mata
अर्थ:हे बुद्धि और विद्या देने वाली, हमें ज्ञान के प्रकाश से भर दीजिए। मोह और अज्ञान को हरकर हमारे नेत्रों को ज्ञान से भर दीजिए। ॐ जय सरस्वती माता!
तुम्हीं हो सब ज्ञान सार, ज्ञान बक्शो माता। तुम बिन सब सुन जग है, सब ही ज्ञान विहीन॥ ॐ जय सरस्वती माता॥
Tumhi Ho Sab Gyan Saar Gyan Bakasho Mata Tum Bin Sab Sun Jag Hai Sab Hi Gyan Viheen Om Jai Saraswati Mata
अर्थ:आप ही समस्त ज्ञान का सार हैं — हे माता, हमें ज्ञान प्रदान कीजिए। आपके बिना सारा संसार सूना है, सभी ज्ञान से रहित हैं। ॐ जय सरस्वती माता!
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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सरस्वती आरती — ॐ जय सरस्वती माता पाठ के लाभ
विद्यार्थियों, विद्वानों और ज्ञान चाहने वाले सभी के लिए आवश्यक प्रार्थना
पूरे भारत में बसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) पर गाई जाती है
बुद्धि, ज्ञान और कलात्मक प्रतिभा का आशीर्वाद आमंत्रित करती है
जैसा पदों में कहा गया है, अज्ञान और मोह को दूर करती है
विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में व्यापक रूप से पढ़ी जाती है
परीक्षा, अध्ययन, संगीत और रचनात्मक कार्यों में सहायक
सरस्वती आरती — ॐ जय सरस्वती माता जप विधि
सरस्वती की छवि के समक्ष दीया जलाएँ। श्वेत पुष्प और अक्षत (चावल) अर्पित करें। जलते दीये को घुमाते हुए आरती गाएँ। यह आरती बसंत पंचमी (जनवरी-फरवरी) के दौरान विशेष रूप से प्रभावशाली है, जब पूरे भारत में सरस्वती की पूजा होती है। इस त्योहार पर विद्यार्थी अपनी पुस्तकें और वाद्य सरस्वती के समक्ष रखते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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