शान्ताकारं भुजगशयनं — Complete Lyrics
शान्ताकारं भुजगशयनं
Sanskrit text with English transliteration and translation
Verse 1
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ।
Shantakaram bhujagashayanam padmanabham suresham
Vishvadharam gaganasadrisham meghavarnam shubhangam
शान्त रूप वाले, सर्प (शेष) पर शयन करने वाले, नाभि से कमल प्रकट करने वाले, देवों के स्वामी; विश्व के आधार, आकाश-समान असीम, मेघवर्ण, समस्त शुभ अंगों वाले;
Verse 2
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥
Lakshmikantam kamalanayanam yogibhirdhyanagamyam
Vande vishnum bhavabhayaharam sarvalokaikanatham
लक्ष्मी के प्रिय, कमलनयन, ध्यान में योगियों द्वारा प्राप्य — मैं उन विष्णु को नमस्कार करता हूँ, जो सांसारिक भय के हरण करने वाले और समस्त लोकों के एकमात्र स्वामी हैं।
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