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श्री सीता आरती Meaning — Line by Line

श्री सीता आरती

Every verse and every word explained in English & Hindi

Meaning — Line by Line

Every verse of श्री सीता आरती with its Hindi meaning. Tap any word to hear it, or ▶ to recite the verse.

Verse 1#

Arati shri janakadulari ki

आरती श्री जनकदुलारी की सीता जी रघुवर प्यारी की

Arati shri janakadulari ki Sita ji raghuvara pyari ki

Meaningश्री जनक की प्यारी पुत्री, रघुवर (राम) की प्रिया सीता जी की आरती।

Verse 2#

Jagata janani jaga ki vistarini, nitya satya saketa viharini

जगत जननी जग की विस्तारिणी, नित्य सत्य साकेत विहारिणी परम दयामयी दीनोद्धारिणी, सीता मैया भक्तन हितकारी की

Jagata janani jaga ki vistarini, nitya satya saketa viharini Parama dayamayi dinoddharini, sita maiya bhaktana hitakari ki

Meaningजगत की माता, जो सृष्टि का विस्तार करती हैं, सदा सत्यस्वरूपा, साकेत में निवास करने वाली; परम करुणामयी, दीनों का उद्धार करने वाली — भक्तों की हितकारिणी माता सीता।

Verse 3#

Sati shiromani patihitakarini, pati seva hita vana vana charini

सती शिरोमणि पतिहितकारिणी, पति सेवा हित वन वन चारिणी पति हित पति वियोग स्वीकारिणी, त्यागधर्म मूर्ति धरी की

Sati shiromani patihitakarini, pati seva hita vana vana charini Pati hita pati viyoga svikarini, tyagadharma murti dhari ki

Meaningपतिव्रताओं की शिरोमणि, सदा पति के कल्याण में तत्पर, उनकी सेवा में वन-वन भटकने वाली; जिन्होंने उनके लिए स्वामी से वियोग भी स्वीकार किया — त्याग के धर्म की साक्षात् मूर्ति।

Verse 4#

Vimala kirti saba lokana chhai, nama leta pavana mati ai

विमल कीर्ति सब लोकन छाई, नाम लेत पावन मति आई सुमिरत काटत कष्ट दुखदाई, शरणागत जन भय हरी की

Vimala kirti saba lokana chhai, nama leta pavana mati ai Sumirata katata kashta dukhadai, sharanagata jana bhaya hari ki

Meaningउनकी निर्मल कीर्ति समस्त लोकों में फैली है; उनका नाम लेने मात्र से मन पवित्र हो जाता है; उनका स्मरण शोक और दुःख को काट देता है — वे जो समस्त शरणागतों का भय दूर करती हैं।

Word-by-Word Breakdown

Origin & History

Source: Traditional Hindi devotional aarti

Author: Traditional

Period: Devotional era

माता सीता, मिथिला के राजा जनक की पुत्री जो धरती से प्रकट हुईं, भगवान राम की पत्नी तथा पत्नीव्रत भक्ति, पवित्रता और त्याग की परम प्रतिमूर्ति हैं — धर्म के लिए राम के साथ वनवास में जाकर और प्रत्येक परीक्षा सहकर। देवी लक्ष्मी के स्वरूप रूप में पूजित, उनकी आरती पूजा के अंत में राम की आरती के साथ गाई जाती है।

Frequently Asked Questions

सीता आरती क्या है?
यह सीता की स्तुति में गाई जाने वाली पारंपरिक हिंदी आरती है, जो पूजा के अंत में दीप और घंटी के साथ की जाती है। इस पृष्ठ पर हिंदी में पूर्ण बोल, लिप्यंतरण और छंद-दर-छंद अर्थ हैं।
यह आरती कब गाई जानी चाहिए?
प्रातः और संध्या पूजा के अंत में, तथा विशेष रूप से देवता के पर्व दिनों पर। दीप जलाएँ, उसे देवता के समक्ष घुमाते हुए गाएँ, और आरती का आशीर्वाद लेकर समाप्त करें।
इस आरती को गाने के क्या लाभ हैं?
भक्ति के साथ गाई गई आरती से माना जाता है कि देवता प्रसन्न होते हैं, बाधाएँ, रोग और दुःख दूर होते हैं, तथा हृदय की सच्ची इच्छाएँ, आरोग्य, समृद्धि और रक्षा प्राप्त होती है।

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