श्री सीता आरती
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✦ अर्थ
श्री सीता आरती माता सीता (जानकी), राजा जनक की पुत्री और भगवान राम की पत्नी की स्तुति में गाई जाती है, जो पवित्रता, भक्ति और त्याग की आदर्श हैं। यह सुखी वैवाहिक जीवन, वैवाहिक सामंजस्य तथा सीता द्वारा प्रकट भक्ति और धैर्य के आशीर्वाद हेतु गाई जाती है। यह सीता नवमी और विवाह पंचमी पर विशेष शुभ है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Hindi devotional aarti · Traditional · Devotional era
माता सीता, मिथिला के राजा जनक की पुत्री जो धरती से प्रकट हुईं, भगवान राम की पत्नी तथा पत्नीव्रत भक्ति, पवित्रता और त्याग की परम प्रतिमूर्ति हैं — धर्म के लिए राम के साथ वनवास में जाकर और प्रत्येक परीक्षा सहकर। देवी लक्ष्मी के स्वरूप रूप में पूजित, उनकी आरती पूजा के अंत में राम की आरती के साथ गाई जाती है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
सीता की पवित्रता ऐसी थी कि अग्नि भी उन्हें स्पर्श न कर सकी, और अंत में धरती ने उन्हें ग्रहण करने हेतु अपना मार्ग खोल दिया। भक्त उनकी आरती सुखी, सामंजस्यपूर्ण वैवाहिक जीवन तथा उनके द्वारा प्रकट धैर्य और श्रद्धा के बल के लिए गाते हैं।
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आरती श्री जनकदुलारी की । सीता जी रघुवर प्यारी की ॥
Arati shri janakadulari ki Sita ji raghuvara pyari ki
अर्थ:श्री जनक की प्यारी पुत्री, रघुवर (राम) की प्रिया सीता जी की आरती।
जगत जननी जग की विस्तारिणी, नित्य सत्य साकेत विहारिणी । परम दयामयी दीनोद्धारिणी, सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥
Jagata janani jaga ki vistarini, nitya satya saketa viharini Parama dayamayi dinoddharini, sita maiya bhaktana hitakari ki
अर्थ:जगत की माता, जो सृष्टि का विस्तार करती हैं, सदा सत्यस्वरूपा, साकेत में निवास करने वाली; परम करुणामयी, दीनों का उद्धार करने वाली — भक्तों की हितकारिणी माता सीता।
सती शिरोमणि पतिहितकारिणी, पति सेवा हित वन वन चारिणी । पति हित पति वियोग स्वीकारिणी, त्यागधर्म मूर्ति धरी की ॥
Sati shiromani patihitakarini, pati seva hita vana vana charini Pati hita pati viyoga svikarini, tyagadharma murti dhari ki
अर्थ:पतिव्रताओं की शिरोमणि, सदा पति के कल्याण में तत्पर, उनकी सेवा में वन-वन भटकने वाली; जिन्होंने उनके लिए स्वामी से वियोग भी स्वीकार किया — त्याग के धर्म की साक्षात् मूर्ति।
विमल कीर्ति सब लोकन छाई, नाम लेत पावन मति आई । सुमिरत काटत कष्ट दुखदाई, शरणागत जन भय हरी की ॥
Vimala kirti saba lokana chhai, nama leta pavana mati ai Sumirata katata kashta dukhadai, sharanagata jana bhaya hari ki
अर्थ:उनकी निर्मल कीर्ति समस्त लोकों में फैली है; उनका नाम लेने मात्र से मन पवित्र हो जाता है; उनका स्मरण शोक और दुःख को काट देता है — वे जो समस्त शरणागतों का भय दूर करती हैं।
श्री सीता आरती पाठ के लाभ
राजा जनक की पुत्री और भगवान राम की पत्नी, पवित्रता, भक्ति और त्याग की आदर्श माता सीता (जानकी) की स्तुति में गाई जाती है।
सुखी वैवाहिक जीवन, वैवाहिक सामंजस्य, तथा सीता द्वारा प्रकट भक्ति और धैर्य के आशीर्वाद हेतु गाई जाती है।
सीता नवमी (जानकी नवमी), विवाह पंचमी और रामायण पाठ के दौरान विशेष रूप से शुभ, तथा राम आरती के साथ गाई जाती है।
श्री सीता आरती जप विधि
दीप (घी या कपूर) जलाएँ और उसे हाथ में लेकर देवता के समक्ष घुमाते हुए गाते हुए आरती करें, आदर्श रूप से घंटी के साथ। पुष्प और प्रसाद अर्पित करें, और आरती का आशीर्वाद लेकर (ज्योति पर हाथ फेरकर आँखों तक ले जाकर) समाप्त करें। भक्ति तथा स्थिर हृदय से गाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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