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अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम्

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 शुक्रवार प्रातः, दीपावली, वरलक्ष्मी व्रत, अथवा प्रतिदिन सायंकालीन दीप (दीपा) अर्पण के समय·📜 Traditional Sanskrit hymn (Lakshmi devotional tradition)

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अर्थ

अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् देवी लक्ष्मी के आठ दिव्य रूपों — आदि, धान्य, धैर्य, गज, सन्तान, विजय, विद्या और धन लक्ष्मी — की स्तुति करता है। प्रत्येक श्लोक 'जयजय हे मधुसूदन कामिनि... सदा पालय माम्' इस प्रेमपूर्ण टेक से समाप्त होता है। यह जीवन के हर क्षेत्र में सम्पूर्ण समृद्धि के लिए गाया जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Sanskrit hymn (Lakshmi devotional tradition) · Traditional (popularized in South Indian temple worship) · Traditional; widely propagated in the modern era

अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् अष्टलक्ष्मी की संकल्पना का गुणगान करता है — वे आठ रूप जिनमें देवी लक्ष्मी सृष्टि को आशीर्वाद देती हैं। केवल धन की कामना के बजाय यह स्तोत्र यह पहचानता है कि सच्ची समृद्धि अष्टविध है: आध्यात्मिक आधार, अन्न, साहस, शक्ति, सन्तति, विजय, ज्ञान और धन। यह घरों और मन्दिरों में, विशेषकर दक्षिण भारत में, सर्वाधिक गाए जाने वाले लक्ष्मी स्तोत्रों में से एक है, तथा वरलक्ष्मी व्रत एवं दीपावली उपासना का प्रमुख अंग है।

शास्त्रों में वर्णित

भक्त मानते हैं कि आठों श्लोकों के श्रद्धापूर्ण पाठ से लक्ष्मी 'दुर्गति' (विपत्ति) और कलियुग के मलों को दूर करने हेतु आती हैं, जैसा स्तोत्र स्वयं घोषित करता है — विपन्न हुए घरों में सौभाग्य लौटाती हैं और आठों रूपों द्वारा नामित प्रत्येक क्षेत्र में परिवार की रक्षा करती हैं।

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

आदिलक्ष्मी सुमनसवन्दित सुन्दरि माधवि चन्द्र सहोदरि हेममये। मुनिगणमण्डित मोक्षप्रदायिनि मञ्जुळभाषिणि वेदनुते॥ पङ्कजवासिनि देवसुपूजित सद्गुणवर्षिणि शान्तियुते। जयजय हे मधुसूदन कामिनि आदिलक्ष्मि सदा पालय माम्॥

|| Adi Lakshmi || Sumanasa Vandita Sundari Madhavi Chandra Sahodari Hemamaye Munigana Mandita Mokshapradayini Manjula Bhashini Vedanute Pankaja Vasini Deva Supujita Sadguna Varshini Shantiyute Jaya Jaya He Madhusudana Kamini Adi Lakshmi Sada Palaya Mam

अर्थ:आदिलक्ष्मी: हे देवताओं से वन्दित, सुन्दरी माधवी, चन्द्र की सहोदरी, स्वर्णमयी; मुनिगणों से अर्चित, मोक्ष देने वाली, मधुरभाषिणी, वेदों से स्तुत; कमलवासिनी, देवपूजिता, सद्गुणों की वर्षा करने वाली, शान्तियुक्ता — जय हो, हे मधुसूदन की प्रिये! हे आदिलक्ष्मी, सदा मेरी रक्षा करो।

श्लोक 2

धान्यलक्ष्मी अहिकलि कल्मषनाशिनि कामिनि वैदिकरूपिणि वेदमये। क्षीरसमुद्भव मङ्गलरूपिणि मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते॥ मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि देवगणाश्रित पादयुते। जयजय हे मधुसूदन कामिनि धान्यलक्ष्मि सदा पालय माम्॥

|| Dhanya Lakshmi || Ahikali Kalmasha Nashini Kamini Vaidika Rupini Vedamaye Kshira Samudbhava Mangala Rupini Mantra Nivasini Mantranute Mangala Dayini Ambuja Vasini Devagana Ashrita Padayute Jaya Jaya He Madhusudana Kamini Dhanya Lakshmi Sada Palaya Mam

अर्थ:धान्यलक्ष्मी: हे कलियुग के पापों की नाशिनी, वेदस्वरूपा; क्षीरसागर से उत्पन्न, मंगलरूपिणी, मन्त्रों में निवास करने वाली, मन्त्रों से स्तुत; मंगलदायिनी, कमलवासिनी, जिनके चरणों में देवगण आश्रित हैं — जय हो, हे मधुसूदन की प्रिये! हे धान्यलक्ष्मी, सदा मेरी रक्षा करो।

श्लोक 3

धैर्यलक्ष्मी जयवरवर्णिनि वैष्णवि भार्गवि मन्त्रस्वरूपिणि मन्त्रमये। सुरगणपूजित शीघ्रफलप्रद ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते॥ भवभयहारिणि पापविमोचनि साधुजनाश्रित पादयुते। जयजय हे मधुसूदन कामिनि धैर्यलक्ष्मि सदा पालय माम्॥

|| Dhairya Lakshmi || Jaya Vara Varnini Vaishnavi Bhargavi Mantra Svarupini Mantramaye Suragana Pujita Shighra Phalaprada Jnana Vikasini Shastranute Bhava Bhaya Harini Papa Vimochani Sadhujana Ashrita Padayute Jaya Jaya He Madhusudana Kamini Dhairya Lakshmi Sada Palaya Mam

अर्थ:धैर्यलक्ष्मी: हे श्रेष्ठ कीर्ति वाली विजयिनी, वैष्णवी, भार्गवी, मन्त्रस्वरूपिणी; देवगणों से पूजित, शीघ्र फल देने वाली, ज्ञान का विकास करने वाली, शास्त्रों से स्तुत; भवभय हरने वाली, पापों से मुक्त करने वाली, जिनके चरणों में साधुजन आश्रित हैं — जय हो! हे धैर्यलक्ष्मी, सदा मेरी रक्षा करो।

श्लोक 4

गजलक्ष्मी जयजय दुर्गतिनाशिनि कामिनि सर्वफलप्रद शास्त्रमये। रथगज तुरगपदादि समावृत परिजनमण्डित लोकनुते॥ हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित तापनिवारिणि पादयुते। जयजय हे मधुसूदन कामिनि गजलक्ष्मि रूपेण पालय माम्॥

|| Gaja Lakshmi || Jaya Jaya Durgati Nashini Kamini Sarva Phalaprada Shastramaye Ratha Gaja Turaga Padadi Samavrita Parijana Mandita Lokanute Hari Hara Brahma Supujita Sevita Tapa Nivarini Padayute Jaya Jaya He Madhusudana Kamini Gaja Lakshmi Rupena Palaya Mam

अर्थ:गजलक्ष्मी: जय हो, हे दुर्गति की नाशिनी, शास्त्रस्वरूपा; रथ, गज, अश्व और पैदल सेना से घिरी, परिजनों से सुशोभित, लोकों से स्तुत; हरि, हर और ब्रह्मा से पूजित एवं सेवित, चरणों से ताप का निवारण करने वाली — जय हो! हे गजलक्ष्मी, इस रूप में मेरी रक्षा करो।

श्लोक 5

सन्तानलक्ष्मी अहिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि रागविवर्धिनि ज्ञानमये। गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि स्वरसप्त भूषित गाननुते॥ सकल सुरासुर देवमुनीश्वर मानववन्दित पादयुते। जयजय हे मधुसूदन कामिनि सन्तानलक्ष्मि त्वं पालय माम्॥

|| Santana Lakshmi || Ahikhaga Vahini Mohini Chakrini Raga Vivardhini Jnanamaye Gunagana Varidhi Lokahitaishini Svarasapta Bhushita Gananute Sakala Surasura Devamuni Ishvara Manava Vandita Padayute Jaya Jaya He Madhusudana Kamini Santana Lakshmi Tvam Palaya Mam

अर्थ:सन्तानलक्ष्मी: हे सर्प और गरुड़ पर सवार, मोहिनी, चक्रधारिणी, प्रेम बढ़ाने वाली, ज्ञानमयी; गुणों की सागर, लोकहित चाहने वाली, सप्त स्वरों से सुशोभित, गान से स्तुत; जिनके चरणों में समस्त सुर, असुर, मुनि और मानव वन्दना करते हैं — जय हो! हे सन्तानलक्ष्मी, मेरी रक्षा करो।

श्लोक 6

विजयलक्ष्मी जय कमलासनि सद्गतिदायिनि ज्ञानविकासिनि गानमये। अनुदिनमर्चित कुङ्कुमधूसर- भूषित वासित वाद्यनुते॥ कनकधरास्तुति वैभव वन्दित शङ्कर देशिक मान्य पदे। जयजय हे मधुसूदन कामिनि विजयलक्ष्मि सदा पालय माम्॥

|| Vijaya Lakshmi || Jaya Kamalasani Sadgati Dayini Jnana Vikasini Ganamaye Anudinam Archita Kunkuma Dhusara- Bhushita Vasita Vadyanute Kanakadhara Stuti Vaibhava Vandita Shankara Deshika Manya Pade Jaya Jaya He Madhusudana Kamini Vijaya Lakshmi Sada Palaya Mam

अर्थ:विजयलक्ष्मी: जय हो, हे कमलासना, सद्गति देने वाली, ज्ञानविकासिनी, गानमयी; प्रतिदिन अर्चित, कुंकुम से सुशोभित एवं सुगन्धित, वाद्यों से स्तुत; कनकधारा स्तोत्र के वैभव से वन्दित, गुरु शंकर से मान्य — जय हो! हे विजयलक्ष्मी, सदा मेरी रक्षा करो।

श्लोक 7

विद्यालक्ष्मी प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि शोकविनाशिनि रत्नमये। मणिमयभूषित कर्णविभूषण शान्तिसमावृत हास्यमुखे॥ नवनिधिदायिनि कलिमलहारिणि कामित फलप्रद हस्तयुते। जयजय हे मधुसूदन कामिनि विद्यालक्ष्मि सदा पालय माम्॥

|| Vidya Lakshmi || Pranata Sureshvari Bharati Bhargavi Shoka Vinashini Ratnamaye Manimaya Bhushita Karna Vibhushana Shanti Samavrita Hasyamukhe Navanidhi Dayini Kalimala Harini Kamita Phalaprada Hastayute Jaya Jaya He Madhusudana Kamini Vidya Lakshmi Sada Palaya Mam

अर्थ:विद्यालक्ष्मी: हे समस्त देवों से प्रणत सुरेश्वरी, भारती, भार्गवी, शोकनाशिनी, रत्नमयी; मणिमय कर्णाभूषणों से सुशोभित, शान्तियुक्ता, हास्यमुखी; नवनिधि देने वाली, कलि के मलों को हरने वाली, मनोवांछित फल देने वाले हाथों वाली — जय हो! हे विद्यालक्ष्मी, सदा मेरी रक्षा करो।

श्लोक 8

धनलक्ष्मी धिमिधिमि धिंधिमि धिंधिमि धिंधिमि दुन्दुभि नाद सुपूर्णमये। घुमघुम घुंघुम घुंघुम घुंघुम शङ्खनिनाद सुवाद्यनुते॥ वेदपुराणेतिहास सुपूजित वैदिकमार्ग प्रदर्शयुते। जयजय हे मधुसूदन कामिनि धनलक्ष्मि रूपेण पालय माम्॥

|| Dhana Lakshmi || Dhimidhimi Dhindhimi Dhindhimi Dhindhimi Dundubhi Nada Supurnamaye Ghumaghuma Ghunghuma Ghunghuma Ghunghuma Shankha Ninada Suvadyanute Veda Puranetihasa Supujita Vaidika Marga Pradarshayute Jaya Jaya He Madhusudana Kamini Dhana Lakshmi Rupena Palaya Mam

अर्थ:धनलक्ष्मी: 'धिमि-धिमि' दुन्दुभि नाद और 'घुम-घुम' शंखनाद एवं मधुर वाद्यों से परिपूर्ण; वेद, पुराण और इतिहास से पूजित, वैदिक मार्ग दिखाने वाली — जय हो, हे मधुसूदन की प्रिये! हे धनलक्ष्मी, इस रूप में मेरी रक्षा करो।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

अष्टलक्ष्मी🔊Ashta Lakshmiदेवी लक्ष्मी के आठ रूप
सुमनसवन्दित🔊Sumanasa Vanditaदेवताओं (शुद्धचित्त जनों) से वन्दित, सुरों से पूजित
माधवि🔊Madhaviमाधव (विष्णु) की प्रिया
चन्द्र सहोदरि🔊Chandra Sahodariचन्द्रमा की सहोदरी (दोनों क्षीरसागर से प्रकट)
हेममये🔊Hemamayeस्वर्णमयी, सोने की बनी
मोक्षप्रदायिनि🔊Mokshapradayiniमोक्ष प्रदान करने वाली
आदिलक्ष्मि🔊Adi Lakshmiआदिलक्ष्मी — मूल, सर्वप्रथम रूप
जयजय हे मधुसूदन कामिनि🔊Jaya Jaya He Madhusudana Kaminiजय जय हे मधुसूदन (विष्णु) की प्रिये!
सदा पालय माम्🔊Sada Palaya Mamसदा मेरी रक्षा करो (प्रत्येक श्लोक की पुनरावृत्त टेक)
धान्यलक्ष्मि🔊Dhanya Lakshmiधान्यलक्ष्मी — अन्न, आहार और कृषि-समृद्धि की लक्ष्मी
क्षीरसमुद्भव🔊Kshira Samudbhavaक्षीरसागर से उत्पन्न
धैर्यलक्ष्मि🔊Dhairya Lakshmiधैर्यलक्ष्मी — साहस, धैर्य और दृढ़ता की लक्ष्मी
भवभयहारिणि🔊Bhava Bhaya Hariniभवभय (संसार के भय) को हरने वाली
गजलक्ष्मि🔊Gaja Lakshmiगजलक्ष्मी — गजों से घिरी, राजसी शक्ति और सार्वभौमत्व की लक्ष्मी
दुर्गतिनाशिनि🔊Durgati Nashiniदुर्गति और विपत्ति की नाशिनी
सन्तानलक्ष्मि🔊Santana Lakshmiसन्तानलक्ष्मी — सन्तति, वंश और कुटुम्ब-कल्याण की लक्ष्मी
विजयलक्ष्मि🔊Vijaya Lakshmiविजयलक्ष्मी — समस्त कार्यों में विजय और सफलता की लक्ष्मी
कनकधरास्तुति🔊Kanakadhara Stutiकनकधारा स्तोत्र (आदि शंकर रचित) से स्तुत
विद्यालक्ष्मि🔊Vidya Lakshmiविद्यालक्ष्मी — ज्ञान, विद्या और बुद्धि की लक्ष्मी
नवनिधिदायिनि🔊Navanidhi Dayiniनवनिधि (नौ निधियों) को देने वाली
धनलक्ष्मि🔊Dhana Lakshmiधनलक्ष्मी — धन, द्रव्य और भौतिक ऐश्वर्य की लक्ष्मी
दुन्दुभि नाद🔊Dundubhi Nadaदुन्दुभि नाद (देव-दुन्दुभियों की ध्वनि, उनकी महिमा की घोषणा करती)

अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् पाठ के लाभ

एक साथ समृद्धि के आठों आयामों में लक्ष्मी की कृपा का आह्वान करता है

प्रत्येक श्लोक एक विशिष्ट आवश्यकता को सम्बोधित करता है — धन, अन्न, साहस, विजय, सन्तान, ज्ञान और शक्ति

शुक्रवार को तथा दीपावली एवं वरलक्ष्मी व्रत में गाने पर विशेष फलदायी माना जाता है

श्लोकों के अनुसार 'दुर्गति' (विपत्ति) और कलियुग के मलों को दूर करता है

घर में मंगल, सद्भाव और समृद्धि लाता है

धन-कामना को समर्पण ('सदा पालय माम्') के साथ जोड़ने वाली एक सम्पूर्ण भक्ति-साधना

अत्यन्त मधुर और सरलता से गाने योग्य, अतः पारिवारिक एवं सामूहिक उपासना के लिए आदर्श

अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयशुक्रवार प्रातः, दीपावली, वरलक्ष्मी व्रत, अथवा प्रतिदिन सायंकालीन दीप (दीपा) अर्पण के समय

देवी लक्ष्मी के चित्र या प्रतिमा के सम्मुख बैठें, घी का दीप जलाएँ और कमल या लाल पुष्प अर्पित करें। आठों श्लोकों को क्रम से मधुरता पूर्वक गाएँ — लक्ष्मी का प्रत्येक रूप (आदि, धान्य, धैर्य, गज, सन्तान, विजय, विद्या, धन) नाम से आह्वानित होता है। 'सदा पालय माम्' (सदा मेरी रक्षा करो) इस टेक पर समर्पित हो जाएँ। सम्पूर्ण स्तोत्र का प्रतिदिन एक बार पाठ परम्परागत है; शुक्रवार और दीपावली को भक्त प्रायः इसे तीन या अधिक बार पढ़ते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह देवी लक्ष्मी के आठ रूपों (अष्टलक्ष्मी) — आदि, धान्य, धैर्य, गज, सन्तान, विजय, विद्या और धन लक्ष्मी — की स्तुति करने वाला आठ श्लोकों का लोकप्रिय संस्कृत स्तोत्र है। प्रत्येक रूप एक भिन्न प्रकार की समृद्धि का अधिष्ठाता है, और यह स्तोत्र आठों की सम्पूर्ण कृपा की याचना करता है।
आदिलक्ष्मी (मूल/आध्यात्मिक सम्पदा), धान्यलक्ष्मी (अन्न और आहार), धैर्यलक्ष्मी (साहस), गजलक्ष्मी (राजसी शक्ति और सार्वभौमत्व), सन्तानलक्ष्मी (सन्तति), विजयलक्ष्मी (विजय), विद्यालक्ष्मी (ज्ञान) और धनलक्ष्मी (धन एवं भौतिक सम्पदा)।
शुक्रवार (लक्ष्मी को प्रिय), दीपावली, धनतेरस, वरलक्ष्मी व्रत, अक्षय तृतीया और नवरात्रि आदर्श हैं। अनेक भक्त निरन्तर समृद्धि और रक्षा के लिए इसे प्रतिदिन सायंकाल दीप-अर्पण के समय भी गाते हैं।
इसका अर्थ है 'सदा मेरी रक्षा करो'। प्रत्येक श्लोक देवी को 'मधुसूदन कामिनि' (विष्णु की प्रिया) सम्बोधित कर उनकी निरन्तर रक्षा की प्रार्थना से समाप्त होता है, समृद्धि की कामना को प्रेमपूर्ण समर्पण के साथ मिलाकर।

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