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चन्द्र स्तोत्रम्

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः या सायं; विशेषकर सोमवार को·📜 Traditional

अन्य नाम / खोज: namashcandraya somayendave kumudabandhave · chandra stotram lyrics · chandra stotra

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अर्थ

चन्द्र स्तोत्रम् चंद्रदेव — शीतल, अमृत-किरण, रात्रि व मन के स्वामी — को नमन की संस्कृत स्तुति है। यह मन की शांति, संतोष तथा चंद्र-दोष के शमन हेतु पूजी जाती है। सोमवार और पूर्णिमा को इसका पाठ विशेष शुभ माना जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional · Traditional · Classical

चन्द्र स्तोत्रम् एक प्रिय पारंपरिक स्तुति है। यह चंद्रदेव — शीतल, अमृत-किरण, रात्रि व मन के स्वामी — को नमन की स्तुति है, जो मन की शांति, संतोष तथा चंद्र-दोष के शमन हेतु पूजी जाती है।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि सच्चे और भक्ति-भरे हृदय से चन्द्र स्तोत्रम् का पाठ करना उस दिव्य कृपा के निकट जाना है, जो प्रेमपूर्वक पुकारने वालों को कभी नहीं त्यागती।

मंत्र

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नमश्चन्द्रमसे नमश्चन्द्राय सोमायेन्दवे कुमुदबन्धवे विलोहिताय शुभ्राय शुक्लाम्बरधराय १॥ त्वमेव सर्वलोकानामाप्यायनकरः सदा क्षीरोद्भवाय देवाय नमः शङ्गरशेखर २॥ युगानां युगकर्ता त्वं निशानाथो निशाकरः संवत्सराणां मासानामृतूनां तु तथैव ३॥ ग्रहाणां त्वमेकोऽसि सौम्यः सोमकरः प्रभुः ओषधीपतये तुभ्यं रोहिणीपतये नमः ४॥ इदं तु पठते स्तोत्रं प्रातरुत्थाय यो नरः दिवा वा यदि वा रात्रौ बद्धचित्तो हि यो नरः ५॥ भयं विद्यते तस्य कार्यसिद्धिर्भविष्यति अहोरात्रकृत्तं पापं पठनादेव नश्यति ६॥ द्विजराजो महापुण्यस्तारापतिर्विशेषतः ओषधीनां यो राजा सोमः प्रीयतां मम ७॥ इति चन्द्रस्तोत्रं सम्पूर्णम्

namaścandramase || namaścandrāya somāyendave kumudabandhave | vilohitāya śubhrāya śuklāmbaradharāya ca || 1|| tvameva sarvalokānāmāpyāyanakaraḥ sadā | kṣīrodbhavāya devāya namaḥ śaṅgaraśekhara || 2|| yugānāṃ yugakartā tvaṃ niśānātho niśākaraḥ | saṃvatsarāṇāṃ māsānāmṛtūnāṃ tu tathaiva ca || 3|| grahāṇāṃ ca tvameko'si saumyaḥ somakaraḥ prabhuḥ | oṣadhīpataye tubhyaṃ rohiṇīpataye namaḥ || 4|| idaṃ tu paṭhate stotraṃ prātarutthāya yo naraḥ | divā vā yadi vā rātrau baddhacitto hi yo naraḥ || 5|| na bhayaṃ vidyate tasya kāryasiddhirbhaviṣyati | ahorātrakṛttaṃ pāpaṃ paṭhanādeva naśyati || 6|| dvijarājo mahāpuṇyastārāpatirviśeṣataḥ | oṣadhīnāṃ ca yo rājā sa somaḥ prīyatāṃ mama || 7|| iti candrastotraṃ sampūrṇam |

अर्थ:चंद्रदेव — शीतल, अमृत-किरण रात्रि व मन के स्वामी — को नमन की स्तुति, जो मन की शांति, संतोष व चंद्र-दोष के शमन हेतु पूजी जाती है।

चन्द्र स्तोत्रम् पाठ के लाभ

चन्द्र स्तोत्रम् का पाठ देव की कृपा, आशीर्वाद और रक्षा प्रदान करता है माना जाता है।

भक्ति जगाता है, मन को शांत करता है और प्रभु-स्मरण में हृदय को स्थिर करता है।

सोमवार तथा पूर्णिमा को सर्वाधिक शुभ।

श्रद्धा सहित दैनिक पाठ हेतु उपयुक्त, एक मूल्यवान संस्कृत स्तुति।

चन्द्र स्तोत्रम् जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः या सायं; विशेषकर सोमवार को
दिशाNorth-west

स्नान करके देव की प्रतिमा के सम्मुख उत्तर-पश्चिम की ओर मुख करके बैठें। दीप जलाएँ और चन्द्र स्तोत्रम् का धीरे-धीरे, भक्तिभाव से पाठ करें। इसे प्रतिदिन, विशेषकर सोमवार और पूर्णिमा को पढ़ा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रदेव — शीतल, अमृत-किरण, रात्रि व मन के स्वामी — को नमन की स्तुति, जो मन की शांति, संतोष तथा चंद्र-दोष के शमन हेतु पूजी जाती है।
यह एक पारंपरिक स्तुति है। इसका पाठ प्रातः या सायं श्रद्धा सहित किया जाता है, विशेषकर सोमवार और पूर्णिमा को।

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