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सरस्वति नमस्तुभ्यं

🕉️ hindu·📿 3× जप·🕐 अध्ययन से पूर्व, परीक्षा से पूर्व, बसंत पंचमी पर, तथा विद्यारम्भ / अक्षराभ्यासम् के आरम्भ में·📜 Traditional Sanskrit student invocation (Smriti)

अन्य नाम / खोज: saraswati namastubhyam varade kamarupini · vidyarambham karishyami · saraswati shloka before study · saraswati namastubhyam

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अर्थ

'सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि' अध्ययन, परीक्षा या किसी भी नई विद्या के आरम्भ से पूर्व पढ़ी जाने वाली प्रसिद्ध दो पंक्तियों की प्रार्थना है। यह वरदायिनी सरस्वती को नमन कर तीव्र स्मृति, स्पष्ट समझ और विद्या में सफलता की याचना करती है। भारत भर में विद्यार्थियों को यह दैनिक प्रार्थना सिखाई जाती है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Sanskrit student invocation (Smriti) · Ancient tradition · Ancient

यह श्लोक भारतीय विद्यार्थी की सम्मानित आरम्भिक प्रार्थना है। पुस्तक छूने से पूर्व, शिक्षार्थी विद्या की देवी सरस्वती को नमन करता है और अध्ययन के कार्य को उन्हें समर्पित करता है, यह याचना करते हुए कि प्रयास सदा सिद्धि (सफलता) में परिणत हो। पीढ़ियों से यह विद्यालय दिवस के आरम्भ में तथा विद्यारम्भ — बालक के लेखन के प्रथम पाठ के संस्कार — पर पढ़ी जाती रही है।

शास्त्रों में वर्णित

असंख्य विद्यार्थी साक्षी हैं कि इस प्रार्थना से अध्ययन आरम्भ करना अशांत मन को स्थिर करता है और मात्र पढ़ने को एकाग्र अधिगम में बदल देता है। शिक्षक देखते हैं कि कार्य से पूर्व ज्ञान की देवी को नमन करने का सरल कार्य अनुशासन और आत्मविश्वास भर देता है — वही 'सिद्धि' जो यह श्लोक माँगता है।

मंत्र

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि। विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥

Saraswati Namastubhyam Varade Kamarupini Vidyarambham Karishyami Siddhir Bhavatu Me Sada

अर्थ:हे वरदायिनी, इच्छानुसार रूप धारण करने वाली सरस्वती! आपको नमस्कार। मैं विद्या आरम्भ करता हूँ; मुझे सदा सिद्धि प्राप्त हो।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

सरस्वति🔊Saraswatiहे ज्ञान, वाणी और कला की देवी सरस्वती
नमस्तुभ्यं🔊Namastubhyamआपको नमस्कार
वरदे🔊Varadeहे वरदायिनी (वर देने वाली)
कामरूपिणि🔊Kamarupiniहे इच्छानुसार रूप धारण करने वाली / इच्छाओं को पूर्ण करने वाली
विद्यारम्भं🔊Vidyarambhamविद्या और अध्ययन का आरम्भ
करिष्यामि🔊Karishyamiमैं आरम्भ करूँगा / आरम्भ करने जा रहा हूँ
सिद्धिर्भवतु मे सदा🔊Siddhir Bhavatu Me Sadaमुझे सदा सिद्धि (सफलता) प्राप्त हो

सरस्वति नमस्तुभ्यं पाठ के लाभ

अध्ययन, परीक्षा या किसी भी नई विद्या के आरम्भ से पूर्व पढ़ी जाने वाली पारम्परिक प्रार्थना।

तीव्र स्मृति, स्पष्ट समझ और ज्ञान में सफलता के लिए सरस्वती का आह्वान करती है।

भारत भर में पाठ से पूर्व दैनिक प्रार्थना रूप में विद्यार्थियों को सिखाई जाती है।

केवल दो पंक्तियाँ — पुस्तक खोलने या परीक्षा में बैठने से पूर्व शीघ्र सीखने और पढ़ने योग्य।

मन को स्थिर करती है और अध्ययन के लिए एकाग्र, भक्तिमय भाव स्थापित करती है।

सरस्वति नमस्तुभ्यं जप विधि

जप संख्या3बार
उत्तम समयअध्ययन से पूर्व, परीक्षा से पूर्व, बसंत पंचमी पर, तथा विद्यारम्भ / अक्षराभ्यासम् के आरम्भ में

अपनी पुस्तकों या सरस्वती की मूर्ति के सम्मुख बैठें। अध्ययन आरम्भ करने से पूर्व शांत, सावधान मन से इस श्लोक को तीन बार पढ़ें। बसंत पंचमी पर तथा बालक के प्रथम लेखन (विद्यारम्भ) पर यह पारम्परिक आरम्भिक प्रार्थना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसे अध्ययन आरम्भ करने से पूर्व, परीक्षा से पूर्व, या जब भी कुछ नया सीखना आरम्भ करें, पढ़ें। यह बसंत पंचमी पर तथा विद्यारम्भ के समय भी पढ़ी जाती है, जब बालक का अक्षरों से पहला परिचय होता है।
'जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकती हैं।' यह सरस्वती की वरदायिनी रूप में स्तुति करता है, जिनकी कृपा ज्ञान के सच्चे साधक को जिस रूप की आवश्यकता हो, वही धारण कर सकती है।
हाँ — यह भारत में विद्यार्थियों को सिखाई जाने वाली प्रथम प्रार्थनाओं में से एक है। इसकी दो छोटी पंक्तियाँ सरलता से याद हो जाती हैं, और यह विद्यालय दिवस के आरम्भ तथा पाठ से पूर्व पढ़ी जाती है।

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