ग्रह अस्त व उदय
बुध, शुक्र, मंगल, गुरु व शनि के सूर्य के निकट अस्त (कंबस्ट) व उदय होने की तिथियाँ — खगोलीय गणना अनुसार।
इस समय अस्त
कोई नहीं — सभी उदित
बुध
- ☼6 जुल 2026 → 21 जुल 2026
- ☼14 अग 2026 → 13 सित 2026
- ☼31 अक्टू 2026 → 10 नव 2026
- ☼7 दिस 2026 → 23 जन 2027
- ☼13 फर 2027 → 24 फर 2027
- ☼16 अप्रैल 2027 → 11 मई 2027
- ☼16 जून 2027 → 1 जुल 2027
- ☼30 जुल 2027 → 26 अग 2027
- ☼14 अक्टू 2027 → 25 अक्टू 2027
- ☼17 नव 2027 → 5 जन 2028
- ☼28 जन 2028 → 8 फर 2028
- ☼29 मार्च 2028 → 24 अप्रैल 2028
- ☼25 मई 2028 → 10 जून 2028
- ☼14 जुल 2028 → 8 अग 2028
- ☼27 सित 2028 → 8 अक्टू 2028
- ☼29 अक्टू 2028 → 15 दिस 2028
शुक्र
- ☼20 अक्टू 2026 → 29 अक्टू 2026
- ☼7 जुल 2027 → 17 सित 2027
- ☼28 मई 2028 → 6 जून 2028
मंगल
- ☼5 जन 2028 → 5 जून 2028
गुरु (बृहस्पति)
- ☼15 जुल 2026 → 13 अग 2026
- ☼17 अग 2027 → 14 सित 2027
- ☼17 सित 2028 → 14 अक्टू 2028
शनि
- ☼22 मार्च 2027 → 25 अप्रैल 2027
- ☼3 अप्रैल 2028 → 8 मई 2028
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ग्रह अस्त (कंबस्ट) क्या होता है?▼
जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत निकट आ जाता है (एक निश्चित अंश-सीमा के भीतर) तो वह सूर्य के तेज में "अस्त" (कंबस्ट) हो जाता है और आकाश में दिखना बंद हो जाता है। ज्योतिष में अस्त ग्रह का बल क्षीण माना जाता है। पुनः दूर होने पर ग्रह "उदय" होता है।
अस्त की अंश-सीमा क्या है?▼
पराशर के अनुसार अस्त सीमा (सूर्य से अंश): बुध 14° (वक्री 12°), शुक्र 10° (वक्री 8°), मंगल 17°, गुरु 11°, शनि 15°। इन सीमाओं के भीतर ग्रह अस्त माना जाता है।
इस समय कौन-से ग्रह अस्त हैं?▼
इस समय कोई प्रमुख ग्रह अस्त नहीं है।
अस्त ग्रह का क्या प्रभाव होता है?▼
अस्त ग्रह अपने शुभ फल देने में दुर्बल माना जाता है, अतः विवाह व गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों में शुक्र व गुरु के अस्त काल को टाला जाता है। यह आस्था-आधारित मान्यता है।
खगोलीय गणना (सूर्य से कोणीय दूरी) अनुसार; अस्त आरंभ/समाप्ति ±1 दिन भिन्न हो सकती है।