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ग्रह वक्री व मार्गी

बुध, शुक्र, मंगल, गुरु व शनि के वक्री (रेट्रोग्रेड) व मार्गी होने की तिथियाँ — सटीक खगोलीय गणना अनुसार।

इस समय वक्री
कोई नहीं — सभी मार्गी

बुध

  • 30 जून 2026 23 जुल 2026
  • 24 अक्टू 2026 13 नव 2026
  • 10 फर 2027 3 मार्च 2027
  • 11 जून 2027 4 जुल 2027
  • 8 अक्टू 2027 28 अक्टू 2027
  • 24 जन 2028 14 फर 2028
  • 21 मई 2028 13 जून 2028
  • 20 सित 2028 10 अक्टू 2028

शुक्र

  • 3 अक्टू 2026 13 नव 2026
  • 11 मई 2028 22 जून 2028

मंगल

  • 11 जन 2027 1 अप्रैल 2027

गुरु (बृहस्पति)

  • 13 दिस 2026 12 अप्रैल 2027
  • 12 जन 2028 13 मई 2028

शनि

  • 27 जुल 2026 10 दिस 2026
  • 10 अग 2027 23 दिस 2027
  • 23 अग 2028 31 दिस 2028

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वक्री और मार्गी का क्या अर्थ है?
वक्री (रेट्रोग्रेड) तब होता है जब कोई ग्रह पृथ्वी से देखने पर आकाश में पीछे की ओर (उल्टा) चलता प्रतीत होता है; मार्गी अर्थात सीधी गति। यह दृष्टि-भ्रम है — वास्तव में ग्रह पीछे नहीं जाता। ज्योतिष में वक्री ग्रह का फल प्रबल माना जाता है।
इस समय कौन-से ग्रह वक्री हैं?
इस समय कोई प्रमुख ग्रह वक्री नहीं है।
क्या सूर्य व चंद्र वक्री होते हैं?
नहीं। सूर्य और चंद्रमा कभी वक्री नहीं होते। राहु व केतु सदैव वक्री (उल्टी) गति में माने जाते हैं। केवल बुध, शुक्र, मंगल, गुरु व शनि वक्री-मार्गी होते हैं।
ये तिथियाँ कैसे गणना की गई हैं?
ये सटीक खगोलीय गणना (ग्रहों की भू-केंद्रित देशांतर गति) पर आधारित हैं। गति का दिशा-परिवर्तन (स्टेशन) ±1 दिन तक भिन्न हो सकता है; महत्वपूर्ण कार्य हेतु पंचांग से पुष्टि करें।

खगोलीय गणना अनुसार; स्टेशन (दिशा-परिवर्तन) तिथि ±1 दिन भिन्न हो सकती है।

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