सत्य युग (कृत युग)
सत्य का प्रथम स्वर्णिम युग, जब धर्म चारों पैरों पर खड़ा था
सत्य युग — जिसे कृत युग भी कहते हैं — सृष्टि के चार युगों में प्रथम और सर्वाधिक धर्मनिष्ठ है। 1,728,000 वर्षों तक चलने वाला यह वह स्वर्णिम युग है जिसमें धर्म (बैल के रूप में) अपने चारों पैरों पर दृढ़ता से खड़ा था, और सत्य अप्रतिद्वंद्वी रूप से राज करता था। न कोई असत्य था, न रोग, न भय; लोग केवल ध्यान व आंतरिक तप से जीते थे, और देवता पृथ्वी के निकट विचरण करते थे। इस युग में भगवान विष्णु ने मत्स्य, कूर्म, वराह व नरसिंह अवतार लिए।
रोचक तथ्य
- ✦सत्य युग 1,728,000 वर्षों तक चला — प्रथम और चारों युगों में सबसे लंबा।
- ✦इसे कृत युग भी कहते हैं, "पूर्ण किया गया युग", क्योंकि धर्म सम्पूर्ण व अखंड था।
- ✦धर्मरूपी बैल चारों पैरों पर खड़ा था — तप, शौच, दया और सत्य पूर्ण थे।
- ✦विष्णु के चार अवतार हुए: मत्स्य (मछली), कूर्म (कछुआ), वराह (वराह) और नरसिंह (नर-सिंह)।
- ✦एक ही धर्म और एक ही वेद था; लोगों को मंदिर या अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं थी, वे ध्यान से ही सब कुछ पा लेते थे।
- ✦पुराणों के अनुसार मनुष्य लगभग 100,000 वर्ष जीते थे तथा विशाल कद व पवित्रता वाले थे।
सत्य का स्वर्णिम युग
प्रत्येक महान काल-चक्र के प्रभात में सत्य युग खड़ा है, सत्य का युग। यह चारों युगों में सबसे लंबा है, 1,728,000 मानव वर्षों तक रहने वाला, और सबसे पवित्र। इसका दूसरा नाम कृत युग है, जिसका अर्थ है "पूर्ण किया गया युग" — क्योंकि इसमें धर्म पूर्ण था और कुछ भी पाना शेष न था।
धर्म, चार पैरों वाले बैल के रूप में दर्शाई गई पवित्र व्यवस्था, चारों पैरों पर दृढ़ खड़ा था: तप, शौच, दया और सत्य प्रत्येक पूर्ण व अविचल था। न कोई असत्य था, न शोक, न रोग, न भय। सभी लोग एक ही सत्य के प्रति समर्पित थे, और बाद के युगों के भेद व कलह अनजान थे।
केवल ध्यान से जीवन
सत्य युग में लोगों को न मंदिर चाहिए थे, न मूर्तियाँ, न विस्तृत अनुष्ठान। इस युग में धर्म का साधन ध्यान और आंतरिक तप था। केवल चिंतन से ज्ञानीजन सर्वोच्च ज्ञान व ईश्वर से एकता प्राप्त कर लेते थे, और मानव-मन स्वाभाविक रूप से दिव्यता की ओर उन्मुख था।
मानव-आयु विशाल थी — पुराणों के अनुसार लगभग एक लाख वर्ष — और लोग ऊँचे, बलवान, शांत व अभाव-रहित थे। सबके लिए एक ही वेद और एक ही धर्म था। पृथ्वी अपने फल स्वतः देती थी, और देवता व ऋषि मनुष्यों के बीच खुलकर विचरते थे। इसी पूर्ण आरंभ की लुप्त स्मृति को हर बाद का युग लालसा से देखता है।
सत्य युग के अवतार
विष्णु के दस अवतारों में से पहले चार सत्य युग में हुए। मत्स्य, महान मछली, ने मनु व समस्त जीवन के बीजों को प्रलय की बाढ़ से बचाया। कूर्म, कछुआ, ने मंदराचल को अपनी पीठ पर धारण किया जब देवों व दैत्यों ने अमृत हेतु क्षीरसागर का मंथन किया।
वराह, सूकर, ने ब्रह्मांडीय जल में गोता लगाकर डूबती पृथ्वी को अपने दाँतों पर उठाया और दैत्य हिरण्याक्ष का वध किया। और नरसिंह, नर-सिंह, संध्या-बेला में स्तंभ से प्रकट होकर अत्याचारी हिरण्यकशिपु का संहार किया और उसके भक्त पुत्र प्रह्लाद की रक्षा की — यह दर्शाते हुए कि ईश्वर सर्वत्र विद्यमान है, और शरणागतों की रक्षा करता है। इन अवतरणों के साथ सत्य युग अपनी दीर्घ यात्रा पूरी कर अंततः त्रेता युग में बदल गया।
संबंधित मंत्र व स्तोत्र
सामान्य प्रश्न
How long did the Satya Yuga last?
The Satya Yuga (Krita Yuga) lasted 1,728,000 human years — the first and longest of the four ages. Together the four yugas make up one chaturyuga of 4,320,000 years.
Why is the Satya Yuga called the golden age?
Because dharma stood on all four legs — austerity, purity, compassion and truth were complete. There was no falsehood, disease or fear; people lived by meditation alone and were naturally turned toward God, making it the purest and most righteous of the ages.
Which avatars came in the Satya Yuga?
The first four avatars of Vishnu appeared in the Satya Yuga: Matsya (the fish), Kurma (the tortoise), Varaha (the boar) and Narasimha (the man-lion who saved Prahlada).
What is the difference between Satya Yuga and Krita Yuga?
They are two names for the same age. "Satya" means truth and "Krita" means accomplished or complete — both describe the first, perfect age in which dharma was whole.