अगजानन पद्मार्कम्
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✦ अर्थ
अगजानन पद्मार्कम् भगवान गणेश पर एक अत्यन्त प्रिय संस्कृत ध्यान श्लोक है, जो एक सुन्दर बिम्ब पर आधारित है: जैसे सूर्य कमल को खिलाता है, वैसे ही गजमुख गजानन के दर्शन से उनकी माता पार्वती (अगजा) का कमल-मुख आनन्द से खिल उठता है। हम उस एकदन्त, एक दाँत वाले प्रभु की वन्दना करते हैं, जो सदा भक्तों को वरदान देने वाले हैं। छोटा और कोमल, यह गणेश को आरम्भिक प्रार्थना के रूप में व्यापक रूप से पढ़ा जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Sanskrit dhyana verse to Ganesha · Unknown (traditional) · Traditional
अगजानन पद्मार्कम् गणेश पर सबसे प्रिय छोटे ध्यान श्लोकों में से एक है, जो पूजा के आरम्भ में 'शुक्लाम्बरधरम्' और 'वक्रतुण्ड महाकाय' के साथ पढ़ा जाता है। इसका एकमात्र श्लोक एक सुन्दर श्लेष और बिम्ब पर घूमता है — 'अगजा-अनन-पद्म-अर्क', पर्वत-जन्मा पार्वती के कमल-मुख का सूर्य — यह चित्रित करते हुए कि गजमुख पुत्र के दर्शन मात्र से माता का मुख कैसे खिल उठता है, फिर उन्हें एकदन्त, अनन्त वरदान देने वाले के रूप में नमन करता है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
भक्त इस बात को सँजोते हैं कि यह श्लोक, दो पंक्तियों में, माता के प्रेम की कोमलता और विघ्नहर्ता की शक्ति दोनों धारण करता है; इसे भाव से पढ़ने पर गणेश की कृपा उतनी ही निश्चितता और सौम्यता से आकर्षित होती है जितनी निश्चितता से सूर्य कमल को खिलाता है।
मंत्र
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अगजानन पद्मार्कं गजाननमहर्निशम् । अनेकदं तं भक्तानामेकदन्तमुपास्महे ॥
Agajanana padmarkam gajananam aharnisham Anekadam tam bhaktanam ekadantam upasmahe
अर्थ:जैसे सूर्य कमल को खिलाता है, वैसे ही गजानन (गजमुख प्रभु) के दर्शन से दिन-रात माता पार्वती का मुखकमल आनन्द से खिल उठता है। हम उस एकदन्त प्रभु की उपासना करते हैं, जो अपने भक्तों को अनेक वरदान देने वाले हैं।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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अगजानन पद्मार्कम् पाठ के लाभ
किसी भी प्रार्थना, अध्ययन या कार्य को गणेश के आशीर्वाद से आरम्भ करने हेतु एक छोटा, कोमल ध्यान श्लोक।
माता और पुत्र का यह मनोहर बिम्ब भक्ति को गहरा करता है और प्रभु के निकटता का भाव जगाता है।
गणेश को अनेकद — भक्तों को अनेक वरदान देने वाले — रूप में पूजता है।
सरलता से कण्ठस्थ होने वाला और दैनिक पाठ तथा बच्चों को सिखाने के लिए आदर्श।
नए आरम्भों और परीक्षाओं से पूर्व एकदन्त, विघ्नहर्ता का आवाहन करता है।
पूजा या अध्ययन के आरम्भ के लिए उपयुक्त शान्त, आनन्दमय मन की एकाग्रता लाता है।
अगजानन पद्मार्कम् जप विधि
भगवान गणेश की प्रतिमा के सम्मुख बैठें, हाथ जोड़ें और भक्तिपूर्वक श्लोक पढ़ें, अपने पुत्र को देखकर पार्वती के मुख पर आए आनन्द का ध्यान करते हुए। इसे पूजा, अध्ययन, परीक्षा या किसी नए कार्य से पूर्व आरम्भिक प्रार्थना (ध्यान) के रूप में एक या तीन बार जपा जा सकता है, एकदन्त का मंगलमय, विघ्नरहित आरम्भ हेतु आवाहन करते हुए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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