गजाननं भूतगणादिसेवितं
अन्य नाम / खोज: gajananam bhuta ganadi sevitam kapittha jambu · gajananam stotram · ganesha dhyana shloka
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✦ अर्थ
गजाननं भूतगणादिसेवितं भगवान गणेश का प्रसिद्ध ध्यान-श्लोक है, जो अनगिनत स्तोत्रों और पूजाओं के आरंभ में गाया जाता है। यह गजमुख, गणों से सेवित, उमा के पुत्र और शोक के नाशक गणेश का सुंदर वर्णन करता है। किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में निर्विघ्न शुरुआत के लिए इसका पाठ किया जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Ganesha dhyana shloka (traditional; opens many stotras) · Traditional · Classical
यह भगवान गणेश पर वह प्रिय ध्यान-श्लोक है जो असंख्य गणेश स्तोत्रों और नित्य पूजाओं का आरंभ करता है। चार पंक्तियों में यह प्रभु का चित्र खींचता है — गजमुख, अपने गणों से सेवित, फलों में आनंदित, उमा के पुत्र, शोक के नाशक — और उनके चरणों में नमन करता है। परंपरा के अनुसार कोई भी पूजा विघ्नहर्ता विघ्नेश्वर के वंदन के बिना आरंभ नहीं होती, और यह श्लोक ऐसा करने के सर्वाधिक प्रिय तरीकों में से एक है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि इस श्लोक से सर्वप्रथम वंदित गणेश हर मार्ग से विघ्न दूर कर देते हैं — जिससे उनके नाम पर आरंभ किया गया कार्य अपने फल तक पहुँचता है।
मंत्र
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गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम् । उमासुतं शोकविनाशकारणं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ॥
Gajananam bhutaganadisevitam kapitthajambuphalacharubhakshanam Umasutam shokavinashakaranam namami vighneshwarapadapankajam
अर्थ:हाथी के मुख वाले, भूतगणों आदि से सेवित, कपित्थ व जामुन फल का सुंदर भक्षण करने वाले, उमा के पुत्र, शोक का नाश करने वाले विघ्नेश्वर (गणेश) के चरण-कमलों को मैं नमस्कार करता हूँ।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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गजाननं भूतगणादिसेवितं पाठ के लाभ
भगवान गणेश का शास्त्रीय ध्यान-श्लोक, जो अनगिनत स्तोत्रों और पूजाओं के आरंभ में उनकी उपस्थिति के आह्वान हेतु पढ़ा जाता है।
गणेश का प्रेमपूर्ण चित्रण करता है — गजमुख, अपने गणों से सेवित, उमा के पुत्र, शोक और विघ्नों के नाशक।
पूजा, अध्ययन या किसी भी शुभ कार्य के आरंभ से पूर्व निर्विघ्न व सुगम शुरुआत के लिए पढ़ा जाता है।
गणेश के प्रति भक्ति जगाता है और किसी भी उपक्रम की देहली पर मन को स्थिर करता है।
छोटा और मधुर, सरलता से सीखा और नित्य गाया जा सकता है।
गजाननं भूतगणादिसेवितं जप विधि
गणेश पूजा के आरंभिक ध्यान के रूप में या किसी नए कार्य से पूर्व इसका पाठ करें, अपने फलों और गणों सहित विराजमान सौम्य गजमुख प्रभु का स्मरण करते हुए, और उनके चरण-कमलों में नमन करें। तीन बार दोहराएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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