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बुध स्तोत्रम्

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः या सायंकाल; विशेषकर बुधवार को·📜 Traditional

अन्य नाम / खोज: asya shribudhastotramahamantrasya vasishtha rishih anushtupchandah · budh stotram lyrics · budh stotra

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अर्थ

बुध स्तोत्रम् बुध (बुध ग्रह) की संस्कृत स्तुति है — बुद्धि, वाणी तथा विद्या के हरित-वर्ण ग्रह, चंद्र-पुत्र की वंदना। यह तीव्र बुद्धि, वाक्-पटुता, विद्या तथा व्यापार में सफलता एवं बुध-दोष शमन के लिए पढ़ी जाती है। ऋषि वसिष्ठ द्वारा रचित यह स्तोत्र विशेषकर बुधवार को श्रद्धापूर्वक पढ़ा जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional · Traditional · Classical

बुध स्तोत्रम् एक प्रिय पारंपरिक स्तोत्र है। यह बुध (बुध ग्रह) की स्तुति है — बुद्धि, वाणी तथा विद्या के हरित-वर्ण ग्रह, चंद्र-पुत्र की वंदना — जो तीव्र बुद्धि, वाक्-पटुता, विद्या व व्यापार में सफलता तथा बुध-दोष शमन के लिए पढ़ी जाती है।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि बुध स्तोत्रम् को सच्चे तथा भक्तिमय हृदय से पढ़ना उस दिव्य कृपा के समीप जाना है, जो प्रेमपूर्वक उसे पुकारने वालों को कभी नहीं त्यागती।

मंत्र

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अस्य श्रीबुधस्तोत्रमहामन्त्रस्य वसिष्ठ ऋषिः अनुष्टुप्छन्दः बुधो देवता बुधप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ध्यानम् भुजैश्चतुर्भिर्वरदाभयासिगदं वहन्तं सुमुखं प्रशान्तम् पीतप्रभं चन्द्रसुतं सुरेढ्यं सिम्हे निषण्णं बुधमाश्रयामि पीताम्बरः पीतवपुः पीतध्वजरथस्थितः पीयूषरश्मितनयः पातु मां सर्वदा बुधः १॥ सिंहवाहं सिद्धनुतं सौम्यं सौम्यगुणान्वितम् सोमसूनुं सुराराध्यं सर्वदं सौम्यमाश्रये २॥ बुधं बुद्धिप्रदातारं बाणबाणासनोज्ज्वलम् भद्रप्रदं भीतिहरं भक्तपालनमाश्रये ३॥ आत्रेयगोत्रसञ्जातमाश्रितार्तिनिवारणम् आदितेयकुलाराध्यमाशुसिद्धिदमाश्रये ४॥ कलानिधितनूजातं करुणारसवारिधिम् कल्याणदायिनं नित्यं कन्याराश्यधिपं भजे ५॥ मन्दस्मितमुखाम्भोजं मन्मथायुतसुन्दरम् मिथुनाधीशमनघं मृगाङ्कतनयं भजे ६॥ चतुर्भुजं चारुरूपं चराचरजगत्प्रभुम् चर्मखड्गधरं वन्दे चन्द्रग्रहतनूभवम् ७॥ पञ्चास्यवाहनगतं पञ्चपातकनाशनम् पीतगन्धं पीतमाल्यं बुधं बुधनुतं भजे ८॥ बुधस्तोत्रमिदं गुह्यं वसिष्ठेनोदितं पुरा यः पठेच्छृणूयाद्वापि सर्वाभीष्टमवाप्नुयात् ९॥ इति बुधस्तोत्रं सम्पूर्णम्

asya śrībudhastotramahāmantrasya vasiṣṭha ṛṣiḥ | anuṣṭupchandaḥ | budho devatā | budhaprītyarthe jape viniyogaḥ | dhyānam | bhujaiścaturbhirvaradābhayāsigadaṃ vahantaṃ sumukhaṃ praśāntam | pītaprabhaṃ candrasutaṃ sureḍhyaṃ simhe niṣaṇṇaṃ budhamāśrayāmi || pītāmbaraḥ pītavapuḥ pītadhvajarathasthitaḥ | pīyūṣaraśmitanayaḥ pātu māṃ sarvadā budhaḥ || 1|| siṃhavāhaṃ siddhanutaṃ saumyaṃ saumyaguṇānvitam | somasūnuṃ surārādhyaṃ sarvadaṃ saumyamāśraye || 2|| budhaṃ buddhipradātāraṃ bāṇabāṇāsanojjvalam | bhadrapradaṃ bhītiharaṃ bhaktapālanamāśraye || 3|| ātreyagotrasañjātamāśritārtinivāraṇam | āditeyakulārādhyamāśusiddhidamāśraye || 4|| kalānidhitanūjātaṃ karuṇārasavāridhim | kalyāṇadāyinaṃ nityaṃ kanyārāśyadhipaṃ bhaje || 5|| mandasmitamukhāmbhojaṃ manmathāyutasundaram | mithunādhīśamanaghaṃ mṛgāṅkatanayaṃ bhaje || 6|| caturbhujaṃ cārurūpaṃ carācarajagatprabhum | carmakhaḍgadharaṃ vande candragrahatanūbhavam || 7|| pañcāsyavāhanagataṃ pañcapātakanāśanam | pītagandhaṃ pītamālyaṃ budhaṃ budhanutaṃ bhaje || 8|| budhastotramidaṃ guhyaṃ vasiṣṭhenoditaṃ purā | yaḥ paṭhecchṛṇūyādvāpi sarvābhīṣṭamavāpnuyāt || 9|| iti budhastotraṃ sampūrṇam |

अर्थ:बुध (बुध ग्रह) की स्तुति — बुद्धि, वाणी व विद्या के हरित-वर्ण ग्रह, चंद्र-पुत्र — जो तीव्र बुद्धि, वाक्-पटुता, विद्या व व्यापार में सफलता तथा बुध-दोष शमन हेतु पढ़ी जाती है।

बुध स्तोत्रम् पाठ के लाभ

बुध स्तोत्रम् का पाठ देव की कृपा, आशीर्वाद तथा रक्षा प्रदान करता है — ऐसा माना जाता है।

भक्ति को बढ़ाता है, मन को शांत करता है तथा भगवान के स्मरण में हृदय को स्थिर करता है।

बुधवार को तथा बुधवार के दिनों में सर्वाधिक शुभ।

एक अनमोल संस्कृत स्तोत्र, जो श्रद्धा सहित नित्य पाठ के योग्य है।

बुध स्तोत्रम् जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः या सायंकाल; विशेषकर बुधवार को
दिशाNorth

स्नान करके देव की प्रतिमा के सम्मुख उत्तर की ओर मुख करके बैठें। दीपक जलाएँ और बुध स्तोत्रम् को धीरे-धीरे, भक्ति सहित पढ़ें। इसे नित्य, अथवा विशेषकर बुधवार को तथा बुधवार के दिनों में पढ़ा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बुध (बुध ग्रह) की एक स्तुति — बुद्धि, वाणी तथा विद्या के हरित-वर्ण ग्रह, चंद्र-पुत्र की वंदना — जो तीव्र बुद्धि, वाक्-पटुता, विद्या व व्यापार में सफलता तथा बुध-दोष शमन के लिए पढ़ी जाती है।
यह एक पारंपरिक स्तोत्र है। इसे प्रातः या सायंकाल भक्ति सहित पढ़ा जाता है, विशेषकर बुधवार को तथा बुधवार के दिनों में।

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