मनोजवं मारुततुल्यवेगं
अन्य नाम / खोज: manojavam maruta tulya vegam jitendriyam · manojavam maruti · hanuman dhyana shloka · shriramdutam sharanam prapadye
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✦ अर्थ
'मनोजवं मारुततुल्यवेगं' हनुमान का प्रसिद्ध ध्यान श्लोक है, जो हनुमान चालीसा के अंत में और नित्य हनुमान पूजा में पढ़ा जाता है। यह चार पंक्तियों में हनुमान के अद्वितीय वेग, आत्म-संयम, बुद्धि और श्रीराम के दूत रूप में भक्ति का गुणगान करता है। यह साहस, बल और संकट-निवारण हेतु, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को, जपा जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Hanuman dhyana shloka (closes the Hanuman Chalisa) · Traditional (associated with Tulsidas's Hanuman Chalisa) · Classical / Medieval
यह हनुमान पर रचित प्रिय ध्यान श्लोक है, जो लाखों लोगों को हनुमान चालीसा के समापन श्लोक के रूप में ज्ञात है। चार पंक्तियों में यह हनुमान का सार समेटता है — मन और पवन के समान वेग वाले, स्वयं के स्वामी, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, वायुपुत्र, वानरों के प्रमुख और श्रीराम के विश्वासपात्र दूत — और भक्त उनकी शरण लेता है। यह बल, निर्भयता और संकटों के निवारण हेतु नित्य पढ़ा जाता है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि जो इस श्लोक से हनुमान की शरण लेता है, वह भय और विघ्न से मुक्त हो जाता है — क्योंकि पवन के वेगवान पुत्र उन सबकी सहायता के लिए दौड़ पड़ते हैं जो श्रीराम के दूत को पुकारते हैं।
मंत्र
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मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥
Manojavam marutatulyavegam jitendriyam buddhimatam varishtham Vatatmajam vanarayuthamukhyam shriramadutam sharanam prapadye
अर्थ:मन के समान वेग वाले, पवन के समान गति वाले, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, पवनपुत्र, वानर-सेना के प्रमुख, श्रीराम के दूत — उन (हनुमान) की मैं शरण लेता हूँ।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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मनोजवं मारुततुल्यवेगं पाठ के लाभ
हनुमान का प्रसिद्ध ध्यान श्लोक, जो हनुमान चालीसा के अंत में और नित्य हनुमान पूजा में पढ़ा जाता है।
हनुमान के अतुलनीय वेग, आत्म-संयम, बुद्धि और श्रीराम के दूत रूप में भक्ति का गुणगान करता है — वे गुण जिन्हें भक्त प्राप्त करने की प्रार्थना करता है।
साहस, बल, भय से रक्षा और संकटों के निवारण हेतु जपा जाता है।
एक ही श्लोक में हनुमान के प्रति समर्पण (शरणागति) की पूर्ण प्रार्थना।
संक्षिप्त और शक्तिशाली, नित्य पाठ हेतु आदर्श, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को।
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जप विधि
भक्तिपूर्वक पढ़ें, हनुमान को पवन के समान वेगवान और सदा श्रीराम की सेवा में रत रूप में चित्रित करते हुए, और बल एवं रक्षा हेतु उनके प्रति समर्पित हो जाएँ। यह परंपरागत रूप से हनुमान चालीसा के अंत में पढ़ा जाता है। तीन बार या अधिक दोहराएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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