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संकटनाशन गणेश स्तोत्र

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 तीनों संध्याएँ (प्रातः, मध्याह्न, सायंकाल); किसी नए कार्य से पूर्व; बुधवार और गणेश चतुर्थी·🎵 ऑडियो सहित·📜 Narada Purana

अन्य नाम / खोज: pranamya shirasa devam gauriputram vinayakam · sankat nashan ganesh stotra lyrics

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अर्थ

संकटनाशन गणेश स्तोत्र नारद पुराण से लिया गया एक छोटा परंतु प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसका आरंभ 'प्रणम्य शिरसा देवं' से होता है। इसमें गणेश के बारह पवित्र नामों का स्मरण कर समस्त विघ्नों और संकटों का नाश तथा हर कार्य में सफलता की कामना की जाती है।

उत्पत्ति और कथा

Narada Purana · Traditional (Narada Purana) · Puranic

संकटनाशन गणेश स्तोत्र नारद पुराण से आया है, जहाँ इसे समस्त विघ्नों को दूर करने का अचूक साधन बताया गया है। आठ श्लोकों में यह गौरीपुत्र को नमन करता है और उनके बारह नामों का स्मरण कराता है, यह वचन देते हुए कि जो इन्हें तीनों संध्याओं में स्मरण करेगा, उसे कोई विघ्न नहीं होगा और उसे विद्या, धन, संतान तथा मोक्ष प्राप्त होगा। यह सबसे अधिक पढ़े जाने वाले गणेश स्तोत्रों में से एक है, जिसे किसी भी नए आरंभ से पूर्व पढ़ा जाता है।

शास्त्रों में वर्णित

यह स्तोत्र स्वयं वचन देता है: प्रातः, मध्याह्न तथा सायंकाल पढ़े जाने पर यह भक्त को 'विघ्न का कोई भय नहीं' रहने देता और हर सफलता प्रदान करता है — विद्यार्थी को विद्या, इच्छुक को धन, माता-पिता को संतान तथा साधक को मोक्ष — और इसीलिए इसे किसी भी ऐसे कार्य से पूर्व सर्वप्रथम पढ़ा जाता है जिसे बिना बाधा के पूर्ण देखना हो।

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सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिद्धये

Pranamya shirasa devam gauriputram vinayakam Bhaktavasam smarennityamayuhkamarthasiddhaye

अर्थ:गौरीपुत्र विनायक देव को शिर से प्रणाम कर, भक्तों के आश्रय उन्हें सदा स्मरण करना चाहिए — दीर्घायु, कामनाओं की पूर्ति और समृद्धि के लिए।

श्लोक 2

प्रथमं वक्रतुण्डं एकदन्तं द्वितीयकम् तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्

Prathamam vakratundam cha ekadantam dvitiyakam Tritiyam krishnapingaksham gajavaktram chaturthakam

अर्थ:पहला वक्रतुण्ड और दूसरा एकदन्त; तीसरा कृष्णपिङ्गाक्ष और चौथा गजवक्त्र।

श्लोक 3

लम्बोदरं पञ्चमं षष्ठं विकटमेव सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम्

Lambodaram panchamam cha shashtham vikatameva cha Saptamam vighnarajendram dhumravarnam tathashtamam

अर्थ:पाँचवाँ लम्बोदर और छठा विकट; सातवाँ विघ्नराजेन्द्र और आठवाँ धूम्रवर्ण।

श्लोक 4

नवमं भालचन्द्रं दशमं तु विनायकम् एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम्

Navamam bhalachandram cha dashamam tu vinayakam Ekadasham ganapatim dvadasham tu gajananam

अर्थ:नौवाँ भालचन्द्र और दसवाँ विनायक; ग्यारहवाँ गणपति और बारहवाँ गजानन।

श्लोक 5

द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो

Dvadashaitani namani trisandhyam yah pathennarah Na cha vighnabhayam tasya sarvasiddhikaram prabho

अर्थ:जो मनुष्य इन बारह नामों को तीनों संध्याओं में पढ़ता है, उसे किसी विघ्न का भय नहीं रहता, हे प्रभु, और यह उसे सब सिद्धियाँ देता है।

श्लोक 6

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम्

Vidyarthi labhate vidyam dhanarthi labhate dhanam Putrarthi labhate putranmoksharthi labhate gatim

अर्थ:विद्या का इच्छुक विद्या पाता है, धन का इच्छुक धन पाता है; पुत्र का इच्छुक पुत्र पाता है और मोक्ष का इच्छुक गति (मुक्ति) पाता है।

श्लोक 7

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् संवत्सरेण सिद्धिं लभते नात्र संशयः

Japedganapatistotram shadbhirmasaih phalam labhet Samvatsarena siddhim cha labhate natra samshayah

अर्थ:जो इस गणपति स्तोत्र का जप करता है, वह छह मास में फल पाता है, और एक वर्ष में सिद्धि पाता है — इसमें कोई संशय नहीं।

श्लोक 8

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः

Ashtabhyo brahmanebhyashcha likhitva yah samarpayet Tasya vidya bhavetsarva ganeshasya prasadatah

अर्थ:जो इसे लिखकर आठ ब्राह्मणों को अर्पित करता है, उसे गणेश की कृपा से समस्त विद्या प्राप्त होती है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

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संकटनाशन🔊Sankat-nashana'संकटनाशन' — संकट (विपत्ति) का नाश करने वाला; वह स्तोत्र जो समस्त विघ्न और कठिनाइयाँ दूर करता है
गौरीपुत्रं🔊Gauriputramगौरी (पार्वती) के पुत्र — भगवान गणेश
वक्रतुण्डम्🔊Vakratundamवक्रतुण्ड — टेढ़ी सूँड वाले; गणेश के बारह नामों में पहला
त्रिसन्ध्यम्🔊Trisandhyamत्रिसन्ध्य — तीनों संध्याओं में: प्रातः, मध्याह्न और सायंकाल
सर्वसिद्धिकरम्🔊Sarva-siddhi-karamसर्वसिद्धिकर — समस्त सिद्धि और सफलता प्रदान करने वाला

संकटनाशन गणेश स्तोत्र पाठ के लाभ

संकटनाशन गणेश स्तोत्र (नारद पुराण से) प्रत्येक विघ्न और संकट को दूर करने तथा किसी भी कार्य में सफलता सुनिश्चित करने के लिए पढ़ा जाता है।

इसमें गणेश के बारह पवित्र नाम समाहित हैं; उन्हें तीनों संध्याओं में पढ़ने से समस्त विघ्न-भय का नाश होने का वरदान है।

इसकी फलश्रुति विद्यार्थी को विद्या, धन के इच्छुक को धन, माता-पिता को संतान और मोक्ष के इच्छुक को मुक्ति प्रदान करती है।

कोई नया कार्य, अध्ययन, यात्रा या उद्यम आरंभ करने से पूर्व तथा गणेश की निरंतर कृपा हेतु प्रतिदिन पढ़ा जाता है।

भगवान गणेश की पूर्ण उपासना के लिए गणेश चालीसा, वक्रतुण्ड महाकाय तथा गणेश पंचरत्नम् के साथ इसका पाठ किया जाता है।

संकटनाशन गणेश स्तोत्र जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयतीनों संध्याएँ (प्रातः, मध्याह्न, सायंकाल); किसी नए कार्य से पूर्व; बुधवार और गणेश चतुर्थी
दिशाEast or facing the deity

भगवान गणेश की प्रतिमा के सामने बैठें, दीप जलाएँ और दूर्वा घास तथा लाल पुष्प अर्पित करें। बारह नामों पर ध्यान केंद्रित करते हुए श्रद्धापूर्वक स्तोत्र का पाठ करें, आदर्श रूप से तीनों संध्याओं में। इसे विशेषकर किसी महत्वपूर्ण कार्य के आरंभ से पूर्व पढ़ा जाता है ताकि विघ्न दूर हों।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह नारद पुराण से लिया गया भगवान गणेश का एक छोटा, शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसका आरंभ 'प्रणम्य शिरसा देवं' से होता है। इसमें गणेश के बारह नाम समाहित हैं और इसे विघ्नों तथा संकटों के नाश एवं हर प्रयास में सफलता पाने के लिए पढ़ा जाता है।
वक्रतुण्ड, एकदन्त, कृष्णपिङ्गाक्ष, गजवक्त्र, लम्बोदर, विकट, विघ्नराजेन्द्र, धूम्रवर्ण, भालचन्द्र, विनायक, गणपति और गजानन। इन बारह नामों को प्रातः, मध्याह्न तथा सायंकाल पढ़ने से समस्त विघ्न-भय दूर होने को कहा गया है।
इसकी अपनी फलश्रुति वचन देती है कि विद्यार्थी को विद्या, धन के इच्छुक को धन, संतान की इच्छा रखने वाले को संतान और मोक्ष के इच्छुक को मुक्ति प्राप्त होती है। नियमित पाठ से विघ्न दूर होते हैं और छह मास में सफलता तथा एक वर्ष में सिद्धि प्राप्त होती है।
इसे तीनों संध्याओं (प्रातः, मध्याह्न तथा सायंकाल) में, और विशेषकर कोई नया कार्य, अध्ययन, यात्रा या उद्यम आरंभ करने से पूर्व पढ़ना श्रेष्ठ है, ताकि गणेश समस्त विघ्न दूर करें। इसे प्रतिदिन तथा बुधवार और गणेश चतुर्थी पर भी पढ़ा जाता है।

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