बर्हापीडाभिरामाय गोविन्दाय नमो नमः
अन्य नाम / खोज: barhapidabhiramaya · barhapidabhiramaya ramayakuntha medhase · rama manasa hamsaya govindaya namo namah · govinda namaskara shloka
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✦ अर्थ
यह अत्यंत प्रिय नमस्कार-श्लोक चार मनोहर नामों के माध्यम से गोविन्द को बारम्बार प्रणाम करता है — उनके मोरपंख-मुकुट का सौन्दर्य, आनन्द के स्रोत होना, उनकी अकुण्ठ बुद्धि, और लक्ष्मी के मानस-सरोवर में सदा विहार करने वाला हंस होना। संक्षिप्त और सुमधुर, इसे कृष्ण-पूजा एवं भजन के पूर्व या पश्चात् नमस्कार के रूप में पढ़ा जाता है। प्रत्येक नाम हृदय को गोविन्द की सुन्दरता और कृपा के निकट ले आता है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Krishna namaskara (salutation) shloka recited in Vaishnava worship of Govinda · Traditional (anonymous) · Classical / medieval devotional period
यह नमस्कार-श्लोक गोविन्द के चार प्रिय रूपों — उनके मोरपंख-मुकुट का सौन्दर्य, आनन्द-दायक स्वभाव, अकुण्ठ बुद्धि, और लक्ष्मी के हृदय के हंस होने — को एक मनोहर नमस्कार में पिरो देता है। इसकी सुमधुर लय एवं दोहरा 'नमो नमः' इसे उन भक्तों के बीच एक प्रिय प्रणाम-श्लोक बना देता है जो कृष्ण को गोविन्द, गौओं के सर्व-मनोहर रक्षक, के रूप में सम्बोधित करते हैं।
✦ शास्त्रों में वर्णित
परम्परा से माना जाता है कि जो ऐसे नमस्कारों से गोविन्द को बारम्बार प्रणाम करता है, उसे लक्ष्मी का भी स्नेह प्राप्त होता है, क्योंकि वे वहीं निवास करती हैं जहाँ गोविन्द का सम्मान होता है, और भक्त कहते हैं कि प्रभु को सच्चा बारम्बार नमस्कार घर में कृपा एवं सौभाग्य दोनों को आकर्षित करता है।
मंत्र
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बर्हापीडाभिरामाय रामायाकुण्ठमेधसे। रमामानसहंसाय गोविन्दाय नमो नमः॥
Barhapidabhiramaya ramayakuntha-medhase, Rama-manasa-hamsaya govindaya namo namah.
अर्थ:गोविन्द को बारम्बार नमस्कार है — जो मोरपंख के मुकुट से मनोहर हैं, समस्त आनन्द के स्रोत हैं, अकुण्ठित एवं सदा तीक्ष्ण बुद्धि वाले हैं, और जो रमा (लक्ष्मी) के मानस-सरोवर में विहार करने वाले हंस हैं।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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बर्हापीडाभिरामाय गोविन्दाय नमो नमः पाठ के लाभ
गोविन्द को एक मधुर, संक्षिप्त नमस्कार, दैनिक प्रणाम हेतु आदर्श
प्रत्येक नाम एक सुन्दर केन्द्र प्रदान करता है, मन को कृष्ण की कृपा की ओर खींचता है
मोरपंख-मुकुट का चित्र हृदय को वृन्दावन के प्रभु की सुन्दरता से भर देता है
कण्ठस्थ करने एवं 'नमो नमः' (बारम्बार प्रणाम) के रूप में बार-बार जपने में सरल
बारम्बार प्रणाम के द्वारा विनम्रता एवं प्रेममयी भक्ति का विकास करता है
अकुण्ठ बुद्धि वाले गोविन्द की स्तुति भक्त की अपनी समझ को निर्मल करती है, ऐसा माना जाता है
बर्हापीडाभिरामाय गोविन्दाय नमो नमः जप विधि
इसे हार्दिक नमस्कार के रूप में जपें, प्रत्येक 'नमो नमः' पर अन्तर्मन से प्रणाम करते हुए। प्रत्येक नाम पर ध्यान करते हुए मोरपंख से सुशोभित, शान्त एवं मनोहर गोविन्द का दर्शन करें। इसे प्रायः पूजा एवं भजन के पूर्व या पश्चात् नमस्कार के रूप में तीन या ग्यारह बार पढ़ा जाता है, और हृदय को गोविन्द की ओर मोड़े रखने हेतु जप के रूप में भी दोहराया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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