गं बीज मंत्र (ॐ गं गणपतये नमः)
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✦ अर्थ
गं (गं) विघ्नहर्ता एवं आरंभ के स्वामी गजमुख भगवान गणेश का बीज मंत्र है। प्रायः 'ॐ गं गणपतये नमः' रूप में जपा जाने वाला यह किसी भी नए कार्य के आरंभ में बाधाओं को दूर करने और सफलता सुनिश्चित करने हेतु आवाहित किया जाता है। यह प्रत्येक उद्यम में बुद्धि, सिद्धि और गणपति की शुभ कृपा प्रदान करता है।
उत्पत्ति और कथा
Tantric and Vedic tradition; Ganapati Upanishad and bija-mantra texts · Vedic and Tantric seers (traditional) · Ancient
गं गणपति, गणों के स्वामी का बीज है। गणपति अथर्वशीर्ष (गणपति उपनिषद्) महान् गणेश मन्त्र को प्रकट करता है तथा गणपति को साक्षात् ब्रह्म एवं समस्त का आधार बताकर स्तुति करता है। चूँकि गणेश विघ्नहर्ता हैं और प्रत्येक अनुष्ठान में सर्वप्रथम आवाहित होते हैं, अतः उनका बीज 'गं' सार्वभौमिक आरम्भिक नाद बन गया — समस्त कार्यों से पूर्व जपा जाने वाला, ताकि मार्ग प्रशस्त एवं आशीषित हो।
✦ शास्त्रों में वर्णित
परम्परागत रूप से कहा जाता है कि 'ॐ गं गणपतये नमः' के श्रद्धापूर्ण जप के समक्ष कोई विघ्न टिक नहीं सकता, क्योंकि गणेश धर्मानुसार विघ्न रखते भी हैं और हरते भी हैं। असंख्य भक्त बताते हैं कि किसी कठिन कार्य से पूर्व उनके बीज-नाद का आवाहन असम्भव प्रतीत होती बाधाओं को विलीन कर कार्य को सफलता में बदल देता है।
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ॐ गं
Om Gam
अर्थ:ॐ गं — मैं विघ्नहर्ता भगवान गणेश के बीज-मंत्र को प्रणाम करता हूँ। ॐ गं, गणों के स्वामी गणपति को नमस्कार, जो शुभ आरंभ, बुद्धि और सिद्धि प्रदान करते हैं।
ॐ गं गणपतये नमः
Om Gam Ganapataye Namah
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा
Om Shreem Gam Saubhagya Ganapataye Vara Varada Sarvajanam Me Vashamanaya Svaha
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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गं बीज मंत्र (ॐ गं गणपतये नमः) पाठ के लाभ
हर मार्ग से विघ्न दूर करता है — गं विघ्नहर्ता का बीज है; इसका जप किसी भी कार्य से पूर्व बाधाओं, विलम्ब एवं कठिनाइयों को दूर करता है।
नए आरम्भों को आशीषित करता है — यात्रा, परियोजना, व्यवसाय, अध्ययन एवं अनुष्ठान के आरम्भ में शुभ प्रारम्भ हेतु परम्परागत रूप से आवाहित।
बुद्धि एवं विवेक प्रदान करता है — गणेश बुद्धि के स्वामी हैं; उनका बीज समझ, एकाग्रता एवं उत्तम निर्णय को तीक्ष्ण करता है।
सफलता एवं सिद्धि देता है — सिद्धिदाता रूप में गं छोटे-बड़े सभी उद्यमों की सफल समाप्ति में सहायक है।
मंगल एवं सौभाग्य लाता है — गणेश की कृपा कार्यों को मंगल से भर देती है, आगे का मार्ग सुगम करती है।
भक्त को स्थिर एवं रक्षित करता है — उनकी उपस्थिति आधार देने वाली एवं रक्षक है, चिन्ता शान्त करती एवं भूल से बचाती है।
गं बीज मंत्र (ॐ गं गणपतये नमः) जप विधि
गणेश की प्रतिमा के सम्मुख स्वच्छ स्थान में पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें, दीपक एवं यथासम्भव दूर्वा या लाल पुष्प रखें। श्वास को स्थिर करें और रुद्राक्ष माला से 'ॐ गं गणपतये नमः' का १०८ बार जप करें। 'गं' का स्पष्ट उच्चारण करें, बिन्दु को गुंजायमान होने दें। किसी भी नए कार्य — यात्रा, परियोजना, अध्ययन या पूजा — के आरम्भ से पूर्व इसे विशेष रूप से जपें ताकि मार्ग प्रशस्त हो। गणेश चतुर्थी एवं संकष्टी चतुर्थी सर्वाधिक शक्तिशाली दिन हैं, तथा दैनिक अभ्यास विघ्नों को दूर रखता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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