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गं बीज मंत्र (ॐ गं गणपतये नमः)

🕉️ hindu·📿 108× जप·🕐 किसी भी नए आरम्भ से पूर्व, प्रातःकाल, चतुर्थी (चौथी तिथि) एवं बुधवार·📜 Tantric and Vedic tradition; Ganapati Upanishad and bija-mantra texts

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अर्थ

गं (गं) विघ्नहर्ता एवं आरंभ के स्वामी गजमुख भगवान गणेश का बीज मंत्र है। प्रायः 'ॐ गं गणपतये नमः' रूप में जपा जाने वाला यह किसी भी नए कार्य के आरंभ में बाधाओं को दूर करने और सफलता सुनिश्चित करने हेतु आवाहित किया जाता है। यह प्रत्येक उद्यम में बुद्धि, सिद्धि और गणपति की शुभ कृपा प्रदान करता है।

उत्पत्ति और कथा

Tantric and Vedic tradition; Ganapati Upanishad and bija-mantra texts · Vedic and Tantric seers (traditional) · Ancient

गं गणपति, गणों के स्वामी का बीज है। गणपति अथर्वशीर्ष (गणपति उपनिषद्) महान् गणेश मन्त्र को प्रकट करता है तथा गणपति को साक्षात् ब्रह्म एवं समस्त का आधार बताकर स्तुति करता है। चूँकि गणेश विघ्नहर्ता हैं और प्रत्येक अनुष्ठान में सर्वप्रथम आवाहित होते हैं, अतः उनका बीज 'गं' सार्वभौमिक आरम्भिक नाद बन गया — समस्त कार्यों से पूर्व जपा जाने वाला, ताकि मार्ग प्रशस्त एवं आशीषित हो।

शास्त्रों में वर्णित

परम्परागत रूप से कहा जाता है कि 'ॐ गं गणपतये नमः' के श्रद्धापूर्ण जप के समक्ष कोई विघ्न टिक नहीं सकता, क्योंकि गणेश धर्मानुसार विघ्न रखते भी हैं और हरते भी हैं। असंख्य भक्त बताते हैं कि किसी कठिन कार्य से पूर्व उनके बीज-नाद का आवाहन असम्भव प्रतीत होती बाधाओं को विलीन कर कार्य को सफलता में बदल देता है।

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

गं

Om Gam

अर्थ:ॐ गं — मैं विघ्नहर्ता भगवान गणेश के बीज-मंत्र को प्रणाम करता हूँ। ॐ गं, गणों के स्वामी गणपति को नमस्कार, जो शुभ आरंभ, बुद्धि और सिद्धि प्रदान करते हैं।

श्लोक 2

गं गणपतये नमः

Om Gam Ganapataye Namah

श्लोक 3

श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा

Om Shreem Gam Saubhagya Ganapataye Vara Varada Sarvajanam Me Vashamanaya Svaha

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

🔊Omॐ — सृष्टि का आदि नाद, सार्वभौमिक स्पन्दन
गं🔊Gamगं — गणेश बीज, गणपति का बीजाक्षर, वह नाद जो विघ्नों को दूर कर मंगलमय आरम्भ देता है
🔊Gaग — गणेश एवं बुद्धि (बुद्धि-विवेक) का प्रतीक; 'गणपति' का प्रथम अक्षर भी
ं (बिन्दु)🔊Anusvara (Bindu)ं (बिन्दु) — अनुनासिक गुंजन एवं बिन्दु जो गणेश की ऊर्जा को सील कर विघ्नों के अन्धकार को मिटाता है
गणपतये🔊Ganapatayeगणपतये — गणपति को, गणों (दिव्य गणसमूहों एवं सृष्टि के तत्त्वों) के स्वामी (पति) को
नमः🔊Namahनमः — मैं नमन करता हूँ, समर्पित होता हूँ — गजमुख प्रभु के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए
गणेश🔊Ganeshaगणेश — गजमुख प्रभु, शिव-पार्वती के पुत्र, विघ्नहर्ता एवं आरम्भ के स्वामी
गण🔊Ganaगण — वे समूह एवं श्रेणियाँ जिनके स्वामी गणेश हैं (प्राणी एवं तत्त्व)
पति🔊Patiपति — स्वामी, अधिपति — गणों के नायक एवं रक्षक रूप में गणेश
विघ्न🔊Vighnaविघ्न — बाधा, रुकावट — जिसे गणेश भक्त के मार्ग से दूर करते हैं
विघ्नहर्ता🔊Vighnahartaविघ्नहर्ता — विघ्नों के हर्ता — गणेश की प्रमुख भूमिका एवं वरदान
बुद्धि🔊Buddhiबुद्धि — बुद्धि एवं विवेक — गणेश द्वारा दिया जाने वाला प्रमुख वरदान
सिद्धि🔊Siddhiसिद्धि — सफलता, सिद्धि एवं आध्यात्मिक उपलब्धि जो गणपति प्रदान करते हैं
बीज🔊Beejबीज — बीज — एकाक्षर जो देवता की सम्पूर्ण शक्ति धारण करता है
मंगल🔊Mangalaमंगल — मंगलमयता — प्रत्येक कार्य से पूर्व गणेश के द्वारा आवाहित आशीष
सौभाग्य🔊Saubhagyaसौभाग्य — सौभाग्य एवं समृद्धि — सौभाग्य गणपति मन्त्र में आवाहित
वर वरद🔊Vara Varadaवर वरद — वरदान देने वाले — गणपति जो कृपापूर्वक भक्त की कामनाएँ पूर्ण करते हैं
स्वाहा🔊Svahaस्वाहा — वह आहुति-बीज जो मन्त्र को प्रभु को समर्पित हवि रूप में सील करता है

गं बीज मंत्र (ॐ गं गणपतये नमः) पाठ के लाभ

हर मार्ग से विघ्न दूर करता है — गं विघ्नहर्ता का बीज है; इसका जप किसी भी कार्य से पूर्व बाधाओं, विलम्ब एवं कठिनाइयों को दूर करता है।

नए आरम्भों को आशीषित करता है — यात्रा, परियोजना, व्यवसाय, अध्ययन एवं अनुष्ठान के आरम्भ में शुभ प्रारम्भ हेतु परम्परागत रूप से आवाहित।

बुद्धि एवं विवेक प्रदान करता है — गणेश बुद्धि के स्वामी हैं; उनका बीज समझ, एकाग्रता एवं उत्तम निर्णय को तीक्ष्ण करता है।

सफलता एवं सिद्धि देता है — सिद्धिदाता रूप में गं छोटे-बड़े सभी उद्यमों की सफल समाप्ति में सहायक है।

मंगल एवं सौभाग्य लाता है — गणेश की कृपा कार्यों को मंगल से भर देती है, आगे का मार्ग सुगम करती है।

भक्त को स्थिर एवं रक्षित करता है — उनकी उपस्थिति आधार देने वाली एवं रक्षक है, चिन्ता शान्त करती एवं भूल से बचाती है।

गं बीज मंत्र (ॐ गं गणपतये नमः) जप विधि

जप संख्या108बार
उत्तम समयकिसी भी नए आरम्भ से पूर्व, प्रातःकाल, चतुर्थी (चौथी तिथि) एवं बुधवार

गणेश की प्रतिमा के सम्मुख स्वच्छ स्थान में पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें, दीपक एवं यथासम्भव दूर्वा या लाल पुष्प रखें। श्वास को स्थिर करें और रुद्राक्ष माला से 'ॐ गं गणपतये नमः' का १०८ बार जप करें। 'गं' का स्पष्ट उच्चारण करें, बिन्दु को गुंजायमान होने दें। किसी भी नए कार्य — यात्रा, परियोजना, अध्ययन या पूजा — के आरम्भ से पूर्व इसे विशेष रूप से जपें ताकि मार्ग प्रशस्त हो। गणेश चतुर्थी एवं संकष्टी चतुर्थी सर्वाधिक शक्तिशाली दिन हैं, तथा दैनिक अभ्यास विघ्नों को दूर रखता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसका अर्थ है 'ॐ, मैं भगवान गणपति (गणेश) को नमन करता हूँ' — उनके बीज-नाद गं के माध्यम से आवाहित। 'गं' (गं) गणेश का बीज है; 'गणपतये' का अर्थ है 'गणों (समूहों) के स्वामी को'; और 'नमः' का अर्थ है 'मैं नमन करता हूँ'। समस्त मिलकर यह गजमुख विघ्नहर्ता को नमस्कार है, जो मंगलमय, विघ्नरहित मार्ग की प्रार्थना करता है।
गं भगवान गणेश (गणपति) का बीज मंत्र है, जो शिव-पार्वती के गजमुख पुत्र हैं, और समस्त देवताओं में प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता तथा आरम्भ एवं बुद्धि के स्वामी रूप में पूजे जाते हैं।
इसे परम्परागत रूप से किसी भी नए कार्य के आरम्भ से पूर्व — यात्रा, व्यवसाय, परीक्षा, परियोजना, अनुष्ठान या पूजा — विघ्नों को दूर कर सफलता आमन्त्रित करने हेतु जपा जाता है। प्रातःकाल का दैनिक जप भी उत्तम है, तथा गणेश चतुर्थी एवं संकष्टी चतुर्थी विशेष रूप से शुभ हैं।
एक सामान्य अभ्यास माला से प्रतिदिन १०८ बार जप का है। बहुत से भक्त किसी विशेष कार्य से पूर्व इसे ३, ११ या २१ बार जपते हैं, और कुछ विघ्नों के निरन्तर निवारण हेतु ४० दिन तक प्रतिदिन १०८ जप का अनुष्ठान करते हैं।

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