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संकट कटै मिटै सब पीरा

🕉️ hindu·📿 11× जप·🕐 मंगलवार और शनिवार; किसी भी संकट, खतरे या कष्ट के समय तत्काल·📜 Hanuman Chalisa (chaupai)

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अर्थ

यह हनुमान चालीसा का महान् 'संकट मोचन' पद है — वही पंक्ति जो हनुमानजी को संकटों के हर्ता का प्रिय विरुद प्रदान करती है। तुलसीदासजी कहते हैं कि जो बलवीर हनुमान ('हनुमत बलबीरा') का स्मरण (सुमिरै) करता है, उसके सब संकट कट जाते हैं और सारी पीड़ा मिट जाती है। कठिनाई, संकट, चिन्ता या दुःख के समय यह सर्वाधिक पठित पंक्तियों में से एक है, जिसका पाठ हर प्रकार के संकट से उद्धार के लिए किया जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Hanuman Chalisa (chaupai) · Tulsidas · 16th century CE

हनुमान चालीसा की स्तुतियों के समापन के निकट गोस्वामी तुलसीदास हनुमान-स्मरण के परम वरदान की पुष्टि करते हैं: जो उन्हें मन में लाता है, उसका हर संकट कट जाता है और सारी पीड़ा समाप्त हो जाती है। यह पद हनुमानजी की संकट मोचन — कठिनाइयों के हर्ता — पहचान को साकार करता है, जो सम्पूर्ण रामायण में महिमामंडित भूमिका है, जहाँ वे बार-बार राम, लक्ष्मण और भक्तों को घोर संकटों से उबारते हैं।

शास्त्रों में वर्णित

पीढ़ियों से भक्त साक्षी हैं कि इस पद के द्वारा हनुमानजी का स्मरण करते ही विपत्तियाँ टल गईं; तुलसीदास द्वारा स्थापित वाराणसी के उनके सुप्रसिद्ध मन्दिर का नाम 'संकट मोचन' भी इसी पंक्ति के वचन पर टिका है कि बलशाली हनुमान के स्मरण के आगे कोई संकट ठहर नहीं सकता।

मंत्र

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संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

Sankat Katai Mitai Sab Peera. Jo Sumirai Hanumat Balbeera.

अर्थ:जो बलवीर हनुमान का स्मरण करता है, उसके सब संकट कट जाते हैं और सारी पीड़ा मिट जाती है॥

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

संकट🔊sankatसंकट, विपत्ति, आपदा, कठिनाई
कटै🔊kataiकट जाता है, दूर हो जाता है
मिटै🔊mitaiमिट जाता है, समाप्त हो जाता है
सब🔊sabसब, समस्त
पीरा🔊peeraपीड़ा, दुःख, कष्ट
जो🔊joजो कोई
सुमिरै🔊sumiraiस्मरण करता है, ध्यान करता है, याद करता है
हनुमत🔊Hanumatहनुमान
बलबीरा🔊balbeera (bala-vira)बलवीर — बलशाली और वीर हनुमान

संकट कटै मिटै सब पीरा पाठ के लाभ

हनुमानजी का संकट मोचन — समस्त संकटों और विपत्तियों के हर्ता — रूप में आवाहन करता है

कठिनाई, भय, खतरे या चिन्ता के समय उद्धार के लिए जपा जाता है

वचन देता है कि हनुमानजी का केवल स्मरण (सुमिरन) ही विपत्तियों को काट देता है

शरीर और मन दोनों की पीड़ा और व्यथा को दूर करता है

कष्ट के बीच शान्ति और आश्वासन प्रदान करता है

आपातकाल और संकट की घड़ी के लिए एक छोटी, प्रभावशाली पंक्ति

संकट कटै मिटै सब पीरा जप विधि

जप संख्या11बार
उत्तम समयमंगलवार और शनिवार; किसी भी संकट, खतरे या कष्ट के समय तत्काल

जब भी संकट, खतरे या गहरी चिन्ता का सामना हो, पूर्ण श्रद्धा से बलवीर हनुमान का स्मरण (सुमिरन) करते हुए इस चौपाई का 11, 21 या 108 बार जप करें। पद वचन देता है कि ऐसा स्मरण ही संकट काट देता है। आपातकाल में इसे मौन रूप से दोहराया जा सकता है या प्रार्थना में सस्वर; संकटों से मुक्ति चाहते समय यह स्वाभाविक रूप से पूर्ण हनुमान चालीसा के पाठ के अंग रूप में भी जपा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसका अर्थ है 'संकट कट जाते हैं और सारी पीड़ा मिट जाती है।' पूरी पंक्ति कहती है कि यह उसके लिए होता है जो बलवीर हनुमान — 'हनुमत बलबीरा' — का स्मरण (सुमिरै) करता है।
हाँ। यह चौपाई ठीक-ठीक यही व्यक्त करती है कि हनुमानजी संकट मोचन, अर्थात् 'संकटों के हर्ता', क्यों कहलाते हैं। यह सिखाती है कि उनका स्मरण हर संकट को काट देता है और सारी पीरा (पीड़ा) को दूर कर देता है।
यह किसी भी कठिनाई, खतरे, भय, चिन्ता या दुःख के समय जपा जाता है। संकट आते ही भक्त इसे दोहराते हैं, इस विश्वास के साथ कि हनुमत बलबीरा का स्मरण कठिनाई को विलीन कर देगा।
'सुमिरै' का अर्थ है स्मरण करना या मन में लाना। पद सिखाता है कि श्रद्धा के साथ बलशाली हनुमान का केवल स्मरण ही — बिना किसी विस्तृत कर्मकाण्ड के — संकट और पीड़ा दूर करने के लिए पर्याप्त है।

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