श्री शनिदेव आरती
अन्य नाम / खोज: jaya jaya shri shanideva bhaktana hitakari · shani dev aarti lyrics
अपनी भाषा/लिपि में पढ़ें
✦ अर्थ
श्री शनिदेव आरती 'जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी' सूर्यपुत्र शनिदेव की पारंपरिक हिंदी आरती है। यह शनिवार और साढ़ेसाती के समय शनि की पूजा के अंत में गाई जाती है, ताकि उनकी कृपा, न्याय और संकटों से रक्षा प्राप्त हो।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Hindi devotional aarti · Traditional · Devotional era
शनि सूर्यदेव और छाया के पुत्र हैं। नवग्रहों में महान न्यायाधीश होने के नाते वे प्रत्येक जीव के कर्मों को तौलते हैं और उसका उचित फल देते हैं — इसी कारण साढ़ेसाती के समय उनकी दृष्टि से भय होता है। फिर भी अपने भक्तों के लिए शनि 'भक्तन हितकारी' अर्थात हितैषी हैं; जो शनिवार को सच्चाई और विनम्रता से उनकी पूजा करते हैं, उनके लिए शनि का न्याय कृपा में बदल जाता है। यह आरती उसी शनिवार की पूजा को पूर्ण करने के लिए गाई जाती है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि स्वयं हनुमान जी ने अपने भक्तों को शनि की दृष्टि से बचाने के लिए हस्तक्षेप किया, और शनि ने प्रतिज्ञा की कि वे हनुमान के भक्तों को कभी कष्ट नहीं देंगे। साढ़ेसाती से गुजर रहे भक्त प्रत्येक शनिवार तिल के तेल का दीपक जलाते हैं, शनि की चालीसा और आरती का पाठ करते हैं, और बताते हैं कि उनके कठिनतम संकट धैर्य और स्थिर सौभाग्य में बदल जाते हैं।
सुनें और साथ में जपें
सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित
किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी । सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥
Jaya jaya shri shanideva bhaktana hitakari Suraja ke putra prabhu chhaya mahatari
अर्थ:श्री शनिदेव की जय हो, जो भक्तों के हितकारी हैं; जो सूर्यदेव और माता छाया के पुत्र हैं।
श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी । नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥
Shyama amka vakra drishta chaturbhuja dhari Nilambara dhara natha gaja ki asavari
अर्थ:श्याम वर्ण, टेढ़ी दृष्टि और चार भुजाओं वाले; नीले वस्त्र धारण किए हुए, हे नाथ! आप अपने वाहन पर सवार हैं।
क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी । मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥
Krita mukuta shisha rajita dipata hai lilari Muktana ki mala gale shobhita balihari
अर्थ:आपके मस्तक पर रत्नजड़ित मुकुट सुशोभित है और ललाट पर चमक रहा है; गले में मोतियों की माला शोभा देती है — अति मनोहर!
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी । लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥
Modaka mishthana pana chadha़ta haim supari Loha tila tela uda़da mahishi ati pyari
अर्थ:आपको मोदक, मिष्ठान्न, पान और सुपारी अर्पित किए जाते हैं; लोहा, तिल, तेल, उड़द और महिषी (भैंस) आपको अत्यंत प्रिय हैं।
देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी । विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥
Deva danuja rishi muni sumarina nara nari Vishvanatha dharata dhyana sharana haim tumhari
अर्थ:देव, दानव, ऋषि, मुनि तथा नर-नारी सभी आपका स्मरण करते हैं; भक्त आपका ध्यान धरते हैं — हम आपकी शरण में हैं।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें
श्री शनिदेव आरती पाठ के लाभ
शनिदेव को प्रसन्न करने तथा साढ़ेसाती (साढ़े सात वर्ष का शनि चक्र), ढैया और शनि दशा के कष्टों को कम करने के लिए गाई जाती है।
माना जाता है कि यह अशुभ शनि से उत्पन्न बाधाएँ, विलंब, ऋण और कष्ट दूर करती है तथा धैर्य और स्थिरता प्रदान करती है।
शनिवार, शनि जयंती और शनि अमावस्या पर, विशेषकर सरसों या तिल का तेल अर्पित करने के बाद, सर्वाधिक प्रभावशाली होती है।
शनि देव की पूजा पूर्ण करने हेतु शनि चालीसा और दशरथकृत शनि स्तोत्र के पश्चात इसका पाठ किया जाता है।
न्याय, अनुशासन तथा शनि के उग्र प्रभाव (साढ़ेसाती पीड़ा) से रक्षा हेतु शनि का आशीर्वाद आमंत्रित करती है।
श्री शनिदेव आरती जप विधि
शनिवार की संध्या को शनिदेव की प्रतिमा के सामने सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएँ, यथासंभव पीपल के वृक्ष के नीचे या शनि मंदिर में। काले तिल, उड़द दाल, नीले/काले फूल और लोहा अर्पित करें। शनि चालीसा और दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करें, फिर यह आरती करते हुए दीपक घुमाएँ। प्रभाव बढ़ाने हेतु बाद में तेल, लोहा या काली वस्तुएँ ज़रूरतमंदों को दान करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ये भी पढ़ें
ॐ
Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides