आपदामपहर्तारम् (आपदामपहर्तारं श्लोक)
अन्य नाम / खोज: apadam apahartaram · apadam apahartaram dataram sarva sampadam · lokabhiramam sri ramam · apadamapahartaram shloka · rama protection shloka
अपनी भाषा/लिपि में पढ़ें
✦ अर्थ
आपदामपहर्तारम् एक अत्यन्त प्रिय श्लोक है जो श्रीराम को समस्त विपत्तियों के हर्ता और समस्त सम्पदाओं के दाता, तथा समस्त लोकों के प्रिय आनन्ददाता के रूप में स्तुति करता है। संक्षिप्त, लयबद्ध और सरलता से कंठस्थ होने वाला यह श्लोक असंख्य भक्तों द्वारा प्रतिदिन संकट से रक्षा और समृद्धि की प्रार्थना के रूप में पढ़ा जाता है। यह नित्य पूजा तथा आपद्-उद्धारक प्रार्थनाओं का अंग है, जो विनम्र प्रणाम से आरंभ और समाप्त होता है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Vaishnava prayer verse, widely recited in daily worship and Apaduddharaka (rescue-from-distress) stotras · Unknown (traditional) · Ancient / traditional
यह श्लोक भक्त की दो गहनतम प्रार्थनाओं — संकट से मुक्ति एवं कल्याण के वरदान — को श्रीराम के एक ही प्रणाम में समेट देता है, जो उस आदर्श प्रभु हैं जिनका सम्पूर्ण जीवन विपत्ति पर धर्म की विजय था। चूँकि राम ने स्वयं वनवास, हानि एवं युद्ध सहे फिर भी 'समस्त लोकों के आनन्द' बने रहे, अतः भक्त अपने संकटों में उन्हें ही सबसे निश्चित शरण मानकर इस श्लोक को 'बार-बार' प्रार्थना एवं स्मरण दोनों रूप में दोहराते हैं।
✦ शास्त्रों में वर्णित
युगों से भक्तों ने संकट के आरम्भ में — रोग, मुकदमे, यात्रा अथवा आकस्मिक विपत्ति में — इस श्लोक का पाठ किया है, राम को 'आपदामपहर्तारम्', संकट हरने वाले के रूप में विश्वास करते हुए, और अपने कष्ट सरल होते एवं सौभाग्य पुनः स्थापित होते पाया है। यह उन रक्षक श्लोकों में गिना जाता है जो श्रद्धापूर्वक जपने वालों की रक्षा करते हैं।
मंत्र
किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥
Apadam-apahartaram Dataram Sarva-sampadam Lokabhiramam Sri-Ramam Bhuyo Bhuyo Namamy-aham
अर्थ:जो समस्त आपत्तियों (विपत्तियों) को हरने वाले और समस्त सम्पदाओं के दाता हैं, जो समस्त लोकों को आनन्द देने वाले हैं — उन श्रीराम को मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें
आपदामपहर्तारम् (आपदामपहर्तारं श्लोक) पाठ के लाभ
श्रीराम की रक्षा का आवाहन कर आपत्तियों, संकटों एवं आकस्मिक विपदाओं को दूर करता है
समस्त सम्पदा, धन एवं मंगल की प्राप्ति के लिए प्रार्थना
संक्षिप्त एवं सरलता से कंठस्थ, नित्य पाठ एवं संकट के समय के लिए आदर्श
भय, संकट या अनिश्चितता के समय साहस एवं आश्वासन प्रदान करता है
राम को 'लोकाभिराम', समस्त लोकों के आनन्द के रूप में भक्ति बढ़ाता है
परम्परा से यात्रा अथवा किसी नये कार्य के आरम्भ में सुरक्षा हेतु जपा जाता है
बार-बार स्मरण ('भूयो भूयः') मन को स्थिर एवं शान्त करता है
आपदामपहर्तारम् (आपदामपहर्तारं श्लोक) जप विधि
शान्त भाव से पूर्वाभिमुख बैठें, हृदय में श्रीराम का स्मरण करें, और इस श्लोक का भक्तिपूर्वक पाठ करें। इसे पूजा के आरम्भ एवं अन्त में एक बार पढ़ा जा सकता है, अथवा रक्षा एवं समृद्धि की प्रार्थना के रूप में 11, 21 अथवा 108 बार दोहराया जा सकता है। संक्षिप्त होने के कारण इसे कहीं भी स्मरण किया जा सकता है — यात्रा पर निकलने से पूर्व, किसी महत्त्वपूर्ण कार्य से पूर्व, अथवा जब भी संकट या चिन्ता उत्पन्न हो — श्लोक के अनुसार ही इसे 'बार-बार' जपते हुए।