कृष्णाय वासुदेवाय
अन्य नाम / खोज: krishnaya vasudevaya haraye paramatmane · pranata klesha nashaya govindaya namo namah · krishna namaskara mantra
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✦ अर्थ
कृष्णाय वासुदेवाय एक छोटा परंतु शक्तिशाली नमस्कार मंत्र है जो भगवान श्रीकृष्ण को उनके प्रिय नामों — वासुदेव, हरि, परमात्मा और गोविंद — से संबोधित करता है। यह प्रतिदिन और कृष्ण पूजा के अंत में जपा जाता है तथा शरणागतों के क्लेश का नाश करता है। यह मन की शांति और भगवान के प्रति प्रेमपूर्ण समर्पण के लिए जपा जाता है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Krishna namaskara shloka (Vishnu/Krishna stotra tradition) · Traditional · Classical
यह प्रिय एक-श्लोक नमस्कार संपूर्ण विश्व में भगवान श्रीकृष्ण को श्रद्धांजलि के रूप में जपा जाता है। उन्हें उनके सर्वाधिक प्रिय नामों — कृष्ण, वासुदेव, हरि, परमात्मा और गोविंद — से संबोधित करते हुए यह उनकी उस परमात्मा के रूप में स्तुति करता है जो उनकी शरण में आने वालों के सभी दुःख नष्ट करते हैं। छोटा और पूर्ण होने के कारण इसे कृष्ण पूजा के समापन पर जपा जाता है तथा शांति और दुःख से मुक्ति के लिए जप के रूप में दोहराया जाता है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि जो इस श्लोक से गोविंद को नमन करता है, उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं — क्योंकि वे ही अपने शरणागतों के दुःखों के नाशक हैं।
मंत्र
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कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने । प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः ॥
Krishnaya vasudevaya haraye paramatmane Pranataklesanashaya govindaya namo namah
अर्थ:वासुदेव के पुत्र श्रीकृष्ण को, परमात्मा हरि को, शरणागतों के क्लेश का नाश करने वाले गोविन्द को बार-बार नमस्कार है।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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कृष्णाय वासुदेवाय पाठ के लाभ
भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक छोटा परंतु शक्तिशाली नमस्कार मंत्र, जो प्रतिदिन तथा कृष्ण पूजा के समापन पर जपा जाता है।
श्रीकृष्ण को वासुदेव, हरि, परमात्मा और गोविंद के रूप में आह्वान करता है — वह परमात्मा जो अपने भक्तों के दुःख दूर करता है।
कष्टों (क्लेश) से मुक्ति, मन की शांति और भगवान के प्रति प्रेमपूर्ण समर्पण के लिए जपा जाता है।
स्मरण करने और माला पर जप के रूप में दोहराने में सरल।
विशेष रूप से जन्माष्टमी, एकादशी और बुधवार को जपा जाता है।
कृष्णाय वासुदेवाय जप विधि
इस श्लोक को हाथ जोड़कर नमस्कार या जप के रूप में दोहराएं, अपने कष्टों को सभी दुःखों के नाशक गोविंद को समर्पित करते हुए। ग्यारह बार अथवा 108 की माला के रूप में जपें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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