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श्री विश्वकर्मा आरती

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः या सायं, पूजा के समापन पर; देवता के पर्व के दिन·🎵 ऑडियो सहित·📜 Traditional Hindi devotional aarti

अन्य नाम / खोज: jaya shri vishvakarma · vishwakarma aarti lyrics

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अर्थ

श्री विश्वकर्मा आरती ब्रह्मांड के दिव्य शिल्पी और रचयिता भगवान विश्वकर्मा की पारंपरिक हिंदी आरती है। यह विशेष रूप से विश्वकर्मा पूजा पर गाई जाती है, जब शिल्पकार, अभियंता और श्रमिक अपने औजारों और मशीनों की पूजा करते हैं। यह कौशल, कार्य में सफलता, औजारों की रक्षा और व्यवसाय में समृद्धि के लिए गाई जाती है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Hindi devotional aarti · Traditional · Devotional era

भगवान विश्वकर्मा ब्रह्मांड के दिव्य शिल्पी और प्रधान कारीगर हैं — स्वर्गीय नगरों, देवताओं के अस्त्रों, रथों और महलों के निर्माता तथा सृजनशीलता और अभियांत्रिकी के साक्षात स्वरूप। विश्वकर्मा पूजा पर पूरे भारत में शिल्पकार, अभियंता और श्रमिक अपने औजारों, मशीनों और यंत्रों की पूजा करते हैं और कौशल व सफलता के लिए उनकी आरती गाते हैं।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि विश्वकर्मा ने स्वर्णमयी लंका, इंद्र का वज्र, देवताओं के उड़ने वाले रथ और दिव्य नगरों का निर्माण किया। उनकी पूजा के दिन कारखाने और कार्यशालाएं शांत हो जाती हैं, जब औजारों को माला पहनाई जाती है और एक वर्ष के सुरक्षित, कुशल व समृद्ध कार्य के लिए यह आरती गाई जाती है।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

श्लोक 1

जय श्री विश्वकर्मा सकल सृष्टि के करता रक्षक स्तुति धर्मा

Jaya shri vishvakarma Sakala srishti ke karata rakshaka stuti dharma

अर्थ:समस्त संसार के रचयिता, रक्षक, स्तुति के साक्षात् धर्मस्वरूप श्री विश्वकर्मा की जय हो।

श्लोक 2

आदि सृष्टि में विधि को श्रुति उपदेश दिया जीवमात्र का जग में ज्ञान विकास किया

Adi srishti mem vidhi ko shruti upadesha diya Jivamatra ka jaga mem jnana vikasa kiya

अर्थ:सृष्टि के आरम्भ में आपने ब्रह्मा को वेदों का ज्ञान दिया; संसार में प्रत्येक जीव के लिए विद्या का विस्तार किया।

श्लोक 3

ऋषि अंगिरा तप से शान्ति नहीं पाई ध्यान किया जब प्रभु का सकल सिद्धि आई

Rishi amgira tapa se shanti nahim pai Dhyana kiya jaba prabhu ka sakala siddhi ai

अर्थ:जब अंगिरा ऋषि को अपनी तपस्या से शांति न मिली, तब उन्होंने प्रभु का ध्यान किया और उन्हें समस्त सिद्धियाँ प्राप्त हुईं।

श्लोक 4

रोगग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना संकटमोचन बनकर दूर दुःख कीना

Rogagrasta raja ne jaba ashraya lina Samkatamochana banakara dura duhkha kina

अर्थ:जब रोगग्रस्त राजा ने आपकी शरण ली, तब आप उसके कष्ट के निवारक बने और उसका दुःख दूर कर दिया।

श्लोक 5

जब रथकार दम्पति तुम्हारी टेर करी सुनकर दीन प्रार्थना विपत सगरी हरी

Jaba rathakara dampati tumhari tera kari Sunakara dina prarthana vipata sagari hari

अर्थ:जब रथकार और उसकी पत्नी ने आपको पुकारा, तब उनकी विनम्र प्रार्थना सुनकर आपने उनकी समस्त विपत्ति हर ली।

श्लोक 6

एकानन चतुरानन पंचानन राजे त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज सकल रूप साजे

Ekanana chaturanana pamchanana raje Tribhuja chaturbhuja dashabhuja sakala rupa saje

अर्थ:एकमुख, चतुर्मुख और पंचमुख से सुशोभित; प्रत्येक रूप में विराजमान — त्रिभुज, चतुर्भुज, दशभुज।

श्लोक 7

ध्यान धरे तब पद का सकल सिद्धि आवे मन द्विविधा मिट जावे अटल शक्ति पावे

Dhyana dhare taba pada ka sakala siddhi ave Mana dvividha mita jave atala shakti pave

अर्थ:जो आपके चरणों का ध्यान करता है, उसे समस्त सिद्धि प्राप्त होती है; मन का संशय मिट जाता है और अटल बल की प्राप्ति होती है।

श्लोक 8

श्री विश्वकर्मा की आरती जो कोई गावे भजत गजानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे

Shri vishvakarma ki arati jo koi gave Bhajata gajananda svami sukha sampati pave

अर्थ:जो श्री विश्वकर्मा की आरती गाता है — गजानंद स्वामी कहते हैं — उसे सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

श्री विश्वकर्मा आरती पाठ के लाभ

ब्रह्मांड के दिव्य शिल्पी और अभियंता भगवान विश्वकर्मा के लिए गाई जाती है — जो देवताओं के महलों, अस्त्रों और वाहनों के रचयिता हैं।

विशेष रूप से विश्वकर्मा पूजा (विश्वकर्मा जयंती) पर गाई जाती है, जब शिल्पकार, अभियंता, कारखाने और श्रमिक अपने औजारों और मशीनों की पूजा करते हैं।

कौशल, कार्य व शिल्प में सफलता, औजारों, यंत्रों और कार्यस्थल की रक्षा तथा अपने व्यवसाय में समृद्धि के लिए आराधना की जाती है।

श्री विश्वकर्मा आरती जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः या सायं, पूजा के समापन पर; देवता के पर्व के दिन
दिशाFacing the deity

घी या कपूर का दीप जलाएं और उसे हाथ में लेकर, गाते हुए देवता के सम्मुख घुमाते हुए आरती करें, उत्तम हो तो घंटी के साथ। पुष्प और प्रसाद अर्पित करें, और अंत में आरती का आशीर्वाद लेकर (हाथों को ज्योति के ऊपर से आँखों तक ले जाते हुए) समापन करें। भक्ति और स्थिर हृदय से गाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह विश्वकर्मा की स्तुति में गाई जाने वाली पारंपरिक हिंदी आरती है, जो पूजा के अंत में दीप और घंटी के साथ की जाती है। इस पृष्ठ पर हिंदी में संपूर्ण बोल, लिप्यंतरण सहित और श्लोक-दर-श्लोक अर्थ उपलब्ध हैं।
प्रातः और सायं पूजा के अंत में, और विशेष रूप से देवता के पर्व के दिनों में। दीप जलाएं, गाते हुए उसे देवता के सम्मुख घुमाएं, और अंत में आरती का आशीर्वाद लें।
भक्ति से गाई जाने पर यह आरती देवता को प्रसन्न करती है, बाधाओं, रोग और दुःख को दूर करती है, तथा हृदय की सच्ची कामनाएं, स्वास्थ्य, समृद्धि और रक्षा प्रदान करती है, ऐसा माना जाता है।

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