Mantra.Tips
suryaaditya-hridayamramayanavictory

आदित्यहृदयं पुण्यम्

🕉️ hindu·📿 3× जप·🕐 सूर्योदय के समय उदित होते सूर्य की ओर मुख कर, विशेषकर रविवार और रथ सप्तमी को।·📜 Aditya Hridayam, verse 4 (Valmiki Ramayana, Yuddha Kanda, Sarga 105)

अन्य नाम / खोज: adityahridayam punyam · aditya hridayam punyam sarvashatruvinashanam · jayavaham japennityam · aditya hridaya victory verse

Share:

अर्थ

यह वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड से आदित्य हृदयम् का प्रसिद्ध आरम्भिक प्रतिज्ञा-श्लोक है, जिसमें ऋषि अगस्त्य भगवान राम को यह स्तोत्र सिखाने से पूर्व स्वयं स्तोत्र का वर्णन करते हैं। यह आदित्य हृदय को पवित्र, समस्त शत्रुओं का नाशक, विजय का दाता, अक्षय और परम मंगलकारी घोषित करता है। केवल इस एक श्लोक का पाठ सूर्य की रक्षक कृपा का आवाहन करता है और विपत्ति पर विजय हेतु जपा जाता है।

उत्पत्ति और कथा

Aditya Hridayam, verse 4 (Valmiki Ramayana, Yuddha Kanda, Sarga 105) · Sage Agastya (as recorded by Maharishi Valmiki) · Ancient (Ramayana, traditionally dated to the Treta Yuga; text compiled c. 500 BCE–100 CE)

लंका के रणभूमि पर भगवान राम थके हुए और चिन्ता में डूबे खड़े थे, जब रावण युद्ध के लिए आगे बढ़ा। महान ऋषि अगस्त्य, जो देवताओं के साथ युद्ध देखने आए थे, राम के पास आए और बोले, 'हे महाबाहु, इस सनातन रहस्य को सुनो जिससे तुम समस्त शत्रुओं को परास्त करोगे।' फिर उन्होंने यही श्लोक घोषित किया — कि आदित्य हृदय पवित्र है, समस्त शत्रुओं का नाशक और विजय का दाता है — सूर्यदेव को सम्पूर्ण स्तोत्र प्रदान करने से पूर्व।

शास्त्रों में वर्णित

परम्परा कहती है कि अगस्त्य से यह स्तोत्र प्राप्त कर और सूर्य की ओर देखते हुए इसे तीन बार जपने के पश्चात्, भगवान राम का शोक विलीन हो गया, उनका बल दुगुना हो गया, और उन्होंने उसी दिन रावण का वध किया — यही कारण है कि यह श्लोक प्रतीत होते असम्भव शत्रुओं पर निर्णायक विजय हेतु जपा जाता है।

मंत्र

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम् जयावहं जपेन्नित्यमक्षय्यं परमं शिवम्

Adityahridayam punyam sarvashatruvinashanam Jayavaham japennityamakshayyam paramam shivam

अर्थ:यह आदित्यहृदय परम पवित्र है, समस्त शत्रुओं का नाश करने वाला तथा विजय प्रदान करने वाला है। नित्य जप करने पर यह अक्षय, परम और कल्याणकारी है। (इन्हीं शब्दों से अगस्त्य ऋषि ने श्रीराम को वह पावन सूर्य-स्तोत्र बताया जिससे वे युद्ध में समस्त शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे।)

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

आदित्यहृदयं🔊Adityahridayamआदित्यहृदय — वह स्तोत्र जो सूर्यदेव (आदित्य) का साक्षात् हृदय (हृदय) है
पुण्यं🔊punyamपवित्र, पुण्यदायक
सर्व🔊sarvaसमस्त, सब
शत्रु🔊shatruशत्रु, बैरी
विनाशनम्🔊vinashanamनाशक, जो विनष्ट कर देता है
जयावहं🔊jayavahamविजय लाने वाला; विजय का दाता
जपेत्🔊japetजप करना चाहिए / पाठ करना चाहिए
नित्यम्🔊nityamसदा, नित्य, प्रतिदिन
अक्षय्यं🔊akshayyamअक्षय, अविनाशी, कभी न घटने वाला
परमं🔊paramamपरम, सर्वोच्च
शिवम्🔊shivamमंगलकारी, कल्याणकारी, समस्त शुभ का मूल

आदित्यहृदयं पुण्यम् पाठ के लाभ

किसी भी कठिन कार्य से पूर्व सूर्यदेव की विजय-प्रदायिनी (जयावहम्) शक्ति का आवाहन करता है।

परम्परा से समस्त शत्रुओं और बाधाओं का नाश करने वाला (सर्व-शत्रु-विनाशनम्) माना जाता है।

प्रतिदिन जपने पर अक्षय (अक्षय्य) पुण्य और परम मंगल प्रदान करता है।

भय और निराशा को दूर करता है, जैसे रावण से युद्ध से पूर्व राम का शोक इसने दूर किया।

एक छोटा, सरलता से कण्ठस्थ होने वाला श्लोक जो सम्पूर्ण आदित्य हृदयम् का सार धारण करता है।

संघर्ष या प्रतिस्पर्धा का सामना करने वालों के लिए साहस, संकल्प-शक्ति और आन्तरिक तेज को बढ़ाता है।

आदित्यहृदयं पुण्यम् जप विधि

जप संख्या3बार
उत्तम समयसूर्योदय के समय उदित होते सूर्य की ओर मुख कर, विशेषकर रविवार और रथ सप्तमी को।

उदित होते सूर्य की ओर मुख कर अर्घ्य (जल) अर्पित करें और इस श्लोक का तीन बार जप करें (एतत् त्रिगुणितम् — 'तीन बार') जैसा अगस्त्य ने राम को निर्देश दिया। इसे सम्पूर्ण आदित्य हृदयम् से पूर्व, परीक्षा, न्यायालयीन मामले, प्रतिस्पर्धा या किसी निर्णायक कार्य से पूर्व स्वतंत्र आवाहन के रूप में पढ़ा जा सकता है। पाठ करते समय स्वच्छता और स्थिर, एकाग्र मन बनाए रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह आदित्य हृदयम् का चौथा श्लोक है, जो वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड में मिलता है। ऋषि अगस्त्य इसे रणभूमि में भगवान राम से कहते हैं, स्तोत्र को सिखाने से पूर्व उसका वर्णन करते हुए, ताकि राम रावण को परास्त कर सकें।
यह घोषित करता है कि आदित्य हृदय स्तोत्र पवित्र है, समस्त शत्रुओं का नाश करता है, विजय लाता है, और प्रतिदिन जपने पर अक्षय, परम और मंगलकारी है। यह वस्तुतः भक्त को सूर्यदेव का अपना विजय का आश्वासन है।
हाँ। यद्यपि सम्पूर्ण आदित्य हृदयम् आदर्श है, यह श्लोक प्रायः अकेले ही सूर्य की विजय-प्रदायिनी कृपा के शक्तिशाली आवाहन के रूप में जपा जाता है, विशेषकर जब समय कम हो या किसी चुनौतीपूर्ण कार्य से पूर्व।
राम युद्ध में रावण के सम्मुख थके और चिन्तित खड़े थे। अगस्त्य प्रकट हुए और उन्हें यह 'गुह्य, सनातन' स्तोत्र (गुह्यं सनातनम्) दिया, यह आश्वासन देते हुए कि इसके द्वारा वे समस्त शत्रुओं को जीतेंगे — और सचमुच राम ने तब रावण को परास्त किया।

ये भी पढ़ें

उपयोगी लगा? अपनों के साथ साझा करें 🙏

Share:

Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides