भए प्रगट कृपाला
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✦ अर्थ
'भए प्रगट कृपाला' तुलसीदास कृत रामचरितमानस के बालकाण्ड की प्रसिद्ध श्रीराम-जन्म स्तुति है, जो माता कौसल्या के समक्ष भगवान श्रीराम के दिव्य प्राकट्य का वर्णन करती है। इसमें उनके चतुर्भुज, मेघश्याम, आभूषणयुक्त रूप का चित्रण, कौसल्या जी की विस्मयपूर्ण स्तुति, और यह आश्चर्य है कि अनन्त ब्रह्माण्डों के स्वामी उनके पुत्र बने। यह राम नवमी और रामजन्मोत्सव पर भक्ति से गाई जाती है।
उत्पत्ति और कथा
Ramcharitmanas, Bala Kanda (Goswami Tulsidas) · Goswami Tulsidas · 16th century CE (c. 1574)
रामचरितमानस के बालकाण्ड में तुलसीदास अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौसल्या के यहाँ भगवान श्रीराम के जन्म का वर्णन करते हैं। प्रभु पहले कौसल्या को अपने तेजोमय चतुर्भुज दिव्य रूप में दर्शन देते हैं, और वे विह्वल होकर यह स्तुति अर्पित करती हैं, उन्हें माया और माप से परे परम ब्रह्म स्वीकार करती हुई। उनके प्रेम से द्रवित होकर और मानव शैशव की लीलाओं का आनन्द लेने की इच्छा से, राम मुसकाते हैं, एक सुहावनी कथा से उन्हें सान्त्वना देते हैं, और रोते हुए शिशु का रूप धारण कर लेते हैं ताकि माता उन्हें मातृ-स्नेह से दुलार सकें।
✦ शास्त्रों में वर्णित
तुलसीदास लिखते हैं कि प्रभु के रोम-रोम में अनगिनत ब्रह्माण्ड बसते हैं — फिर भी अपनी भक्तिमती कौसल्या के प्रेमवश वही अनन्त सत्ता उनका नन्हा शिशु बन गई; परम्परा मानती है कि राम नवमी पर इस स्तुति को गाने से घर राम-जन्म की उसी मांगलिकता से भर जाता है और भक्तों को प्रभु को अपने रूप में देखने का वरदान मिलता है।
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भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥ लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी। भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी॥
bhae pragaṭa kṛpālā dīnadayālā kausalyā hitakārī haraṣita mahatārī muni mana hārī adbhuta rūpa bicārī locana abhirāmā tanu ghanasyāmā nija āyudha bhuja cārī bhūṣana banamālā nayana bisālā sobhāsiṃdhu kharārī
अर्थ:दीनों पर दया करने वाले और कौसल्या जी के हितकारी कृपालु प्रभु प्रकट हुए। माता हर्षित हो उठीं और मुनियों के मन को हरने वाले उनके अद्भुत रूप का विचार करती हुई उन्हें देखने लगीं — नेत्रों को आनन्द देने वाला, मेघ के समान श्याम शरीर, चारों भुजाओं में अपने आयुध धारण किए, आभूषणों और वनमाला से विभूषित, विशाल नेत्रों वाले, शोभा के सागर, खर के शत्रु (श्रीराम)।
कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता। माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता॥ करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता। सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता॥
kaha dui kara jorī astuti torī kehi bidhi karauṃ anaṃtā māyā guna gyānātīta amānā beda purāna bhanaṃtā karunā sukha sāgara saba guna āgara jehi gāvahiṃ śruti saṃtā so mama hita lāgī jana anurāgī bhayau pragaṭa śrīkaṃtā
अर्थ:दोनों हाथ जोड़कर माता बोलीं — "हे अनन्त! मैं किस प्रकार आपकी स्तुति करूँ? वेद-पुराण आपको माया, गुण और ज्ञान से परे तथा अप्रमेय कहते हैं। करुणा और सुख के सागर, सब गुणों के धाम, जिन्हें श्रुति और संत गाते हैं, वही श्रीपति (लक्ष्मीकान्त) मेरे हित के लिए और भक्तों पर प्रेम के कारण प्रकट हुए हैं।
ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै। मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर मति थिर न रहै॥ उपजा जब ग्याना प्रभु मुसुकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै। कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै॥
brahmāṃḍa nikāyā nirmita māyā roma roma prati beda kahai mama ura so bāsī yaha upahāsī sunata dhīra mati thira na rahai upajā jaba gyānā prabhu musukānā carita bahuta bidhi kīnha cahai kahi kathā suhāī mātu bujhāī jehi prakāra suta prema lahai
अर्थ:वेद कहते हैं कि माया से रचे अनेकों ब्रह्माण्ड-समूह आपके रोम-रोम में बसते हैं; वही प्रभु मेरे उदर में रहे — यह उपहास-सी बात सुनकर धीर पुरुषों की भी बुद्धि स्थिर नहीं रहती।" जब माता को यह ज्ञान उत्पन्न हुआ, तब प्रभु मुसकाए, क्योंकि वे बहुत प्रकार की लीलाएँ करना चाहते थे। फिर उन्होंने सुहावनी कथा कहकर माता को इस प्रकार समझाया कि उन्हें (अपने प्रति) पुत्र-स्नेह प्राप्त हो।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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भए प्रगट कृपाला पाठ के लाभ
भगवान श्रीराम के दिव्य जन्म का उत्सव मनाता है — राम नवमी पूजन का केन्द्रबिन्दु।
हृदय को भक्ति और प्रभु के सुन्दर रूप के दर्शन के आनन्द से भर देता है।
रामजन्मोत्सव पर इसका पाठ घर में राम की कृपा लाने वाला माना जाता है।
शान्ति, रक्षा और प्रभु को अपना प्रियतम मानकर उनकी निकटता का अनुभव कराता है।
वात्सल्य-भाव विकसित करने में सहायक — प्रभु को मातृ-स्नेह से प्रेम करना।
परम्परागत रूप से बच्चों को आशीर्वाद देने तथा प्रसव एवं पारिवारिक कल्याण के लिए गाई जाती है।
भए प्रगट कृपाला जप विधि
इस स्तुति को मधुरता से गाएँ, आदर्श रूप से राम नवमी के मध्याह्न में (राम-जन्म का परम्परागत क्षण) शिशु राम और माता कौसल्या के चित्र या विग्रह के समक्ष। श्लोकों में वर्णित अद्भुत रूप का ध्यान करें। इसे प्रायः बालकाण्ड से पूर्ण रामजन्मोत्सव-पाठ के अंग के रूप में, घंटा-ध्वनि और पुष्प-वर्षा के साथ गाया जाता है, और भक्ति के अनुसार इसे दोहराया जा सकता है।