भूतनाथ स्तोत्रम् (भूतनाथ सदानन्द)
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✦ अर्थ
भूतनाथ स्तोत्रम्, 'भूतनाथ सदानन्द', शबरीमला के भगवान अय्यप्पा (श्री धर्मशास्ता) का प्रसिद्ध ध्यान श्लोक है, जो उनकी पूजा के आरम्भ में पढ़ा जाता है। एक भावपूर्ण श्लोक में यह उन्हें भूतनाथ — समस्त प्राणियों के स्वामी, सदा आनन्दमय और सर्वभूतदयालु — के रूप में नमन करता है और दो बार 'रक्ष रक्ष' की पुकार करता है। 'ॐ श्रीमहाशास्त्रे नमः' से मुद्रित, यह अय्यप्पा के प्रति समर्पण की सर्वप्रिय संक्षिप्त प्रार्थनाओं में से एक है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Ayyappa / Sri Dharma Shasta dhyana sloka · Traditional
'भूतनाथ सदानन्द' वह ध्यान श्लोक है जिससे भक्त शबरीमला के देवता भगवान अय्यप्पा की पूजा का आरम्भ करते हैं, जो भूतनाथ — समस्त प्राणियों के स्वामी — के रूप में पूजित हैं। अय्यप्पा हरिहरपुत्र, अर्थात् हरि (विष्णु, मोहिनी रूप में) और हर (शिव) से उत्पन्न पुत्र, तथा मणिकण्ठ के रूप में पूजे जाते हैं, जो पाण्ड्य राजवंश में पले-बढ़े। यह एक श्लोक भक्तों की प्रार्थना का सार समेटे है: यह उन्हें सदा आनन्दमय (सदानन्द) और प्रत्येक प्राणी पर दयालु (सर्वभूतदयापर) के रूप में नमन करता है और दो बार 'रक्ष रक्ष' — 'रक्षा करो, रक्षा करो, हे महाबाहो' — की पुकार करता है। यह उनके नमन 'ॐ श्रीमहाशास्त्रे नमः' से मुद्रित है और यात्रा-काल में 'स्वामिये शरणम् अय्यप्पा' की पुकार के साथ गूँजता है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
अय्यप्पा भक्त मानते हैं कि इस श्लोक से पूजा का आरम्भ करना स्वयं को साक्षात् भूतनाथ की गोद में रखना है — और यह कि 41 दिवसीय व्रत में श्रद्धापूर्वक उच्चारित दो बार की 'रक्ष रक्ष' पुकार, शबरीमला के अठारह पवित्र सोपानों पर चढ़ते हुए यात्री पर भगवान की रक्षक कृपा को आकर्षित करती है।
सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित
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भूतनाथ सदानन्द सर्वभूतदयापर । रक्ष रक्ष महाबाहो शास्त्रे तुभ्यं नमो नमः ॥
bhūtanātha sadānanda sarvabhūtadayāpara | rakṣa rakṣa mahābāho śāstre tubhyaṃ namo namaḥ ||
अर्थ:हे भूतनाथ (समस्त प्राणियों के स्वामी), सदा आनन्दमय, समस्त भूतों पर दया करने वाले; रक्षा करो, रक्षा करो, हे महाबाहो — हे शास्ता, आपको बार-बार नमस्कार है।
ॐ श्रीमहाशास्त्रे नमः ।
oṃ śrīmahāśāstre namaḥ |
अर्थ:ॐ श्रीमहाशास्त्रे नमः।
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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भूतनाथ स्तोत्रम् (भूतनाथ सदानन्द) पाठ के लाभ
भगवान अय्यप्पा / श्री धर्मशास्ता का प्रसिद्ध ध्यान (मेडिटेशन) श्लोक — उनकी पूजा के आरम्भ में प्रयुक्त होता है।
'रक्ष रक्ष' की पुकार करता हुआ पूर्ण समर्पण का एक सरल, सहज स्मरणीय श्लोक।
अय्यप्पा को भूतनाथ — समस्त प्राणियों के स्वामी, सदा आनन्दमय और प्रत्येक प्राणी पर दयालु — के रूप में नमन करता है।
रक्षा, मन की शान्ति और भगवान की करुणामयी कृपा के लिए इसका आवाहन किया जाता है।
अय्यप्पा भक्तों द्वारा प्रतिदिन तथा विशेषकर 41 दिवसीय व्रत और शबरीमला यात्रा के समय इसका पाठ किया जाता है।
मूल-मन्त्र 'ॐ श्रीमहाशास्त्रे नमः' से मुद्रित, यह ध्यान और नमन को एक ही प्रार्थना में जोड़ता है।
भूतनाथ स्तोत्रम् (भूतनाथ सदानन्द) जप विधि
स्नान करके, दीप जलाकर भगवान अय्यप्पा की प्रतिमा के सम्मुख बैठें। ध्यान श्लोक 'भूतनाथ सदानन्द' का भावपूर्वक पाठ करें, 'रक्ष रक्ष' की पुकार पर पूर्ण समर्पण के भाव से ठहरें, और 'ॐ श्रीमहाशास्त्रे नमः' से समापन करें। प्रायः इसका प्रयोग किसी लम्बी अय्यप्पा-पूजा या भजन से पूर्व प्रारम्भिक ध्यान के रूप में किया जाता है, अथवा इसे अकेले पढ़कर उसके पश्चात् 'स्वामिये शरणम् अय्यप्पा' कहा जाता है।