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lakshmipurandaradasakannadadevaranama

ಭಾಗ್ಯದ ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಬಾರಮ್ಮ

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 शुक्रवार (लक्ष्मी को समर्पित), वरमहालक्ष्मी व्रत, लक्ष्मी पूजा और दीपावली के दौरान, प्रातः या संध्या काल में।·📜 Kannada devaranama of Purandaradasa, in praise of Goddess Lakshmi (16th century CE)

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अर्थ

'भाग्यद लक्ष्मी बारम्म' 'कर्नाटक संगीत के पितामह' पुरंदरदास की सर्वाधिक प्रिय कन्नड़ देवरनाम है, जो देवी लक्ष्मी को घर और हृदय में आमंत्रित करती है। कोमल प्रतीकों के साथ संत सौभाग्य की माता को बुलाते हैं कि वे घुँघरू बजाती हुई, छाछ में उभरते मक्खन की भाँति, स्वर्ण की वर्षा करती और हर मनोकामना पूर्ण करती हुई पधारें। उन्हें जनक की पुत्री, करोड़ सूर्यों-सी दीप्तिमान, कमलनयना, वेंकटेश्वर की रानी और पुरंदर विठ्ठल की पत्नी कहकर वंदना की गई है। यह विशेष रूप से शुक्रवार को और लक्ष्मी पूजा के समय गाई जाती है।

उत्पत्ति और कथा

Kannada devaranama of Purandaradasa, in praise of Goddess Lakshmi (16th century CE) · Purandaradasa (Purandara Vithala) · 1484-1564 CE

पुरंदरदास कर्नाटक के एक धनी रत्न-व्यापारी थे, जिन्होंने वैराग्य की एक दिव्य शिक्षा के बाद अपना समस्त धन दान कर दिया और ईश्वर की महिमा गाते हुए एक भ्रमणशील हरिदास बन गए। उनकी हजारों रचनाओं में 'भाग्यद लक्ष्मी बारम्म' देवी लक्ष्मी का सर्वाधिक प्रिय आवाहन बन गई — केवल धन की याचना के रूप में नहीं, अपितु समस्त सौभाग्य की दिव्य माता के प्रेमपूर्ण स्वागत के रूप में। उन्होंने इसे, अपने सभी गीतों की भाँति, अपने प्रभु 'पुरंदर विठ्ठल' के नाम से अंकित किया।

शास्त्रों में वर्णित

परंपरा कहती है कि पुरंदरदास, जो कभी कंजूस व्यापारी श्रीनिवास नायक थे, तब विनम्र हो गए जब स्वयं भगवान विष्णु ने एक निर्धन ब्राह्मण के वेश में उनकी परीक्षा ली और उन्हें रूपांतरित किया; अपना सौभाग्य त्यागकर उन्होंने भक्ति का सच्चा धन प्राप्त किया — और कहा जाता है कि लक्ष्मी को समर्पित उनका यह गीत हर उस घर में देवी की कृपा खींच लाता है जहाँ इसे प्रेम से गाया जाता है।

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

ಭಾಗ್ಯದ ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಬಾರಮ್ಮ ನಮ್ಮಮ್ಮ ನೀ ಸೌಭಾಗ್ಯದ ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಬಾರಮ್ಮ

bhāgyada lakṣmī bāramma nammamma nī saubhāgyada lakṣmī bāramma

अर्थ:आओ, हे समस्त सौभाग्य की देवी लक्ष्मी! आओ, हमारी माता, जो प्रत्येक मंगल की लक्ष्मी हो!

श्लोक 2

ಹೆಜ್ಜೆಯ ಮೇಲೊಂದು ಹೆಜ್ಜೆಯನಿಕ್ಕುತ ಗೆಜ್ಜೆ ಕಾಲ್ಗಳ ನಾದವ ತೋರುತ ಸಜ್ಜನ ಸಾಧು ಪೂಜೆಯ ವೇಳೆಗೆ ಮಜ್ಜಿಗೆಯೊಳಗಿನ ಬೆಣ್ಣೆಯಂತೆ

hejjeya mēlondu hejjeyanikkuta gejje kālgaḷa nādava tōruta sajjana sādhu pūjeya vēḷege majjigeyoḷagina beṇṇeyante

अर्थ:एक कोमल कदम के बाद दूसरा कदम रखती हुई, अपने चरणों के घुँघरुओं की ध्वनि सुनाती हुई, सज्जनों और साधुओं की पूजा-वेला में आओ — मथे हुए छाछ में उभरते मक्खन की भाँति, मृदुता से और निश्चित रूप से आती हुई।

श्लोक 3

ಕನಕ ವೃಷ್ಟಿಯ ಕರೆಯುತ ಬಾರೆ ಮನಕಾಮನೆಯ ಸಿದ್ಧಿಯ ತೋರೆ ದಿನಕರ ಕೋಟಿ ತೇಜದಿ ಹೊಳೆಯುವ ಜನಕರಾಯನ ಕುಮಾರಿ ಬೇಗ

kanaka vṛṣṭiya kareyuta bāre manakāmaneya siddhiya tōre dinakara kōṭi tējadi hoḷeyuva janakarāyana kumāri bēga

अर्थ:आओ, स्वर्ण की वृष्टि बुलाती हुई, मन की हर कामना की सिद्धि देती हुई; हे जनक-राजा की पुत्री, जो करोड़ सूर्यों की प्रभा से दीप्त हो — शीघ्र आओ!

श्लोक 4

ಸಂಖ್ಯೆಯಿಲ್ಲದ ಭಾಗ್ಯವ ಕೊಟ್ಟು ಕಂಕಣ ಕೈಯ ತಿರುವುತ ಬಾರೆ ಕುಂಕುಮಾಂಕಿತೆ ಪಂಕಜ ಲೋಚನೆ ವೆಂಕಟರಮಣನ ಬಿಂಕದ ರಾಣಿ

saṅkhyeyillada bhāgyava koṭṭu kaṅkaṇa kaiya tiruvuta bāre kuṅkumāṅkite paṅkaja lōcane veṅkaṭaramaṇana biṅkada rāṇi

अर्थ:अगणित सौभाग्य प्रदान करती हुई, अपना कंगन-युक्त हाथ कृपा में घुमाती हुई आओ; हे कुंकुम-अंकित, हे कमल-नयना, भगवान वेंकटरमण की गर्विता एवं कृपामयी रानी।

श्लोक 5

ಸಕ್ಕರೆ ತುಪ್ಪದ ಕಾಲುವೆ ಹರಿಸಿ ಶುಕ್ರವಾರದ ಪೂಜೆಯ ವೇಳೆಗೆ ಅಕ್ಕರೆಯುಳ್ಳ ಅಳಗಿರಿ ರಂಗನ ಚೊಕ್ಕ ಪುರಂದರ ವಿಠಲನ ರಾಣಿ

sakkare tuppada kāluve harisi śukravārada pūjeya vēḷege akkareyuḷḷa aḷagiri raṅgana cokka purandara viṭhalana rāṇi

अर्थ:शक्कर और घी की धाराएँ बहाती हुई, शुक्रवार की पूजा-वेला में — हे अळगिरि रंग की प्रिय रानी, पुरंदर विठ्ठल की पवित्र पत्नी — आओ, समस्त सौभाग्य की माता लक्ष्मी।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

ಭಾಗ್ಯದ ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಬಾರಮ್ಮ🔊bhāgyada lakṣmī bārammaहे समस्त सौभाग्य की देवी लक्ष्मी, आओ माता!
ನಮ್ಮಮ್ಮ ನೀ ಸೌಭಾಗ್ಯದ ಲಕ್ಷ್ಮೀ🔊nammamma nī saubhāgyada lakṣmīहे हमारी माता, तुम जो समस्त मंगल एवं समृद्धि की लक्ष्मी हो
ಹೆಜ್ಜೆಯ ಮೇಲೊಂದು ಹೆಜ್ಜೆಯನಿಕ್ಕುತ🔊hejjeya mēlondu hejjeyanikkutaएक कोमल कदम के बाद दूसरा कदम रखती हुई (भीतर आती हुई)
ಗೆಜ್ಜೆ ಕಾಲ್ಗಳ ನಾದವ ತೋರುತ🔊gejje kālgaḷa nādava tōrutaअपने चरणों के घुँघरुओं की ध्वनि सुनाती हुई
ಸಜ್ಜನ ಸಾಧು ಪೂಜೆಯ ವೇಳೆಗೆ🔊sajjana sādhu pūjeya vēḷegeसज्जनों एवं साधुओं की पूजा-वेला में
ಮಜ್ಜಿಗೆಯೊಳಗಿನ ಬೆಣ್ಣೆಯಂತೆ🔊majjigeyoḷagina beṇṇeyanteछाछ में उभरते मक्खन की भाँति — कोमलता से, स्वाभाविक रूप से आती हुई
ಕನಕ ವೃಷ್ಟಿಯ ಕರೆಯುತ ಬಾರೆ🔊kanaka vṛṣṭiya kareyuta bāreस्वर्ण की वृष्टि बुलाती हुई आओ
ಮನಕಾಮನೆಯ ಸಿದ್ಧಿಯ ತೋರೆ🔊manakāmaneya siddhiya tōreमन की कामनाओं की सिद्धि प्रदान करो
ದಿನಕರ ಕೋಟಿ ತೇಜದಿ ಹೊಳೆಯುವ🔊dinakara kōṭi tējadi hoḷeyuvaकरोड़ सूर्यों की प्रभा से दीप्त
ಜನಕರಾಯನ ಕುಮಾರಿ ಬೇಗ🔊janakarāyana kumāri bēgaहे राजा जनक की पुत्री (सीता-लक्ष्मी), शीघ्र आओ!
ಸಂಖ್ಯೆಯಿಲ್ಲದ ಭಾಗ್ಯವ ಕೊಟ್ಟು🔊saṅkhyeyillada bhāgyava koṭṭuअगणित सौभाग्य प्रदान करती हुई
ಕಂಕಣ ಕೈಯ ತಿರುವುತ ಬಾರೆ🔊kaṅkaṇa kaiya tiruvuta bāreअपना कंगन-युक्त हाथ (कृपापूर्ण मुद्रा में) घुमाती हुई आओ
ಕುಂಕುಮಾಂಕಿತೆ ಪಂಕಜ ಲೋಚನೆ🔊kuṅkumāṅkite paṅkaja lōcaneहे कुंकुम-अंकित, हे कमल-नयना
ವೆಂಕಟರಮಣನ ಬಿಂಕದ ರಾಣಿ🔊veṅkaṭaramaṇana biṅkada rāṇiभगवान वेंकटरमण (वेंकटेश्वर) की गर्विता एवं कृपामयी रानी
ಸಕ್ಕರೆ ತುಪ್ಪದ ಕಾಲುವೆ ಹರಿಸಿ🔊sakkare tuppada kāluve harisiशक्कर एवं घी की धाराएँ बहाती हुई (प्रचुरता में)
ಶುಕ್ರವಾರದ ಪೂಜೆಯ ವೇಳೆಗೆ🔊śukravārada pūjeya vēḷegeशुक्रवार की पूजा-वेला में
ಚೊಕ್ಕ ಪುರಂದರ ವಿಠಲನ ರಾಣಿ🔊cokka purandara viṭhalana rāṇiपुरंदर विठ्ठल (रचयिता की मुद्रा-संज्ञा, विष्णु) की पवित्र रानी

ಭಾಗ್ಯದ ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಬಾರಮ್ಮ पाठ के लाभ

देवी लक्ष्मी का सर्वाधिक प्रिय कन्नड़ आवाहन, जो घर में धन, सौभाग्य और मंगल को आमंत्रित करने के लिए गाया जाता है।

विशेष रूप से शुक्रवार को तथा वरमहालक्ष्मी और लक्ष्मी पूजा के समय पाठ किया जाता है, जो देवी के लिए सर्वाधिक पवित्र अवसर हैं।

माना जाता है कि यह न केवल भौतिक समृद्धि अपितु 'अष्ट लक्ष्मी' — स्वास्थ्य, साहस, संतान, विजय और ज्ञान — भी प्रदान करती है।

दिव्य माता के प्रति प्रेममयी भक्ति जगाती है, जो समस्त कल्याण की कोमल दात्री हैं और 'छाछ में मक्खन-सी' पधारती हैं।

पुरंदरदास की एक उत्कृष्ट कृति, जो कर्नाटक संगीत के आधारभूत रचनाकार हैं, सदियों से समस्त दक्षिण भारत में प्रिय है।

ಭಾಗ್ಯದ ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಬಾರಮ್ಮ जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयशुक्रवार (लक्ष्मी को समर्पित), वरमहालक्ष्मी व्रत, लक्ष्मी पूजा और दीपावली के दौरान, प्रातः या संध्या काल में।
दिशाFacing the deity of Lakshmi or east/north-east

पूजा-स्थान को स्वच्छ और सुसज्जित करें, दीप जलाएँ और देवी लक्ष्मी को पुष्प तथा कुंकुम अर्पित करें, आदर्श रूप से किसी प्रतिमा या कलश के समक्ष। 'भाग्यद लक्ष्मी बारम्म' को प्रेममयी भक्ति के साथ गाएँ या पाठ करें, विशेषकर शुक्रवार की पूजा के समय, देवी का एक सम्मानित माता के रूप में घर में प्रवेश करते हुए स्वागत करें। यह वरमहालक्ष्मी व्रत और लक्ष्मी पूजा का पारंपरिक गीत है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह संत पुरंदरदास द्वारा रचित एक प्रसिद्ध कन्नड़ भक्ति-गीत (देवरनाम) है, जो सौभाग्य की दात्री देवी लक्ष्मी को भक्त के घर और जीवन में पधारने के लिए आमंत्रित करता है। यह दक्षिण भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय लक्ष्मी-गीतों में से एक है, जो विशेषकर शुक्रवार और लक्ष्मी पूजा पर गाया जाता है।
पुरंदरदास (1484-1564) एक महान हरिदास संत और रचनाकार थे, जिन्हें कर्नाटक संगीत की शिक्षा को व्यवस्थित करने के कारण उसका 'पितामह' (पिता/दादा) माना जाता है। कभी एक धनी व्यापारी रहे, उन्होंने भगवान विष्णु (पुरंदर विठ्ठल) की भक्ति के लिए सब कुछ त्याग दिया और कन्नड़ में हजारों देवरनाम रचे।
यह विशेष रूप से शुक्रवार को गाया जाता है, जो देवी लक्ष्मी को समर्पित हैं, तथा वरमहालक्ष्मी व्रत, लक्ष्मी पूजा और दीपावली जैसे त्योहारों पर। यह धन और मंगल की देवी का घर में स्वागत करने का पारंपरिक आवाहन है।
'मज्जिगेयोळगिन बेण्णेयन्ते' छवि लक्ष्मी के कृपामय आगमन की तुलना उस मक्खन से करती है जो मथी हुई छाछ में स्वाभाविक रूप से उभरकर एकत्र हो जाता है — कोमल, निश्चित और समृद्धि से परिपूर्ण। यह सुंदर रूप से दर्शाती है कि देवी अपने भक्तों को आशीर्वाद देने मृदुता से किंतु पूर्ण रूप से पधारती हैं।

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