Mantra.Tips
ishvaranam-paramam-mahesvaramshvetashvatara-upanishadvedantaishvara

तमीश्वराणां परमं महेश्वरम्

🕉️ upanishad·📿 11× जप·🕐 प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) में ध्यान एवं उपासना के समय·📜 Shvetashvatara Upanishad, Verse 6.7

अन्य नाम / खोज: tam ishvaranam paramam mahesvaram · tam ishwaranam paramam maheshwaram · patim patinam paramam parastad · supreme lord of lords upanishad

Share:

अर्थ

तमीश्वराणां परमं महेश्वरम् श्वेताश्वतर उपनिषद् का राजसी श्लोक है, जो परम ईश्वर (महेश्वर) को समस्त शासकों में श्रेष्ठ, देवों का देव, पतियों का पति, परे और पूज्य घोषित करता है। यह उपनिषद् की उस भक्तिमयी दृष्टि को व्यक्त करता है जिसमें एक ब्रह्म ही जानने और उपासना के योग्य व्यक्त परमेश्वर के रूप में प्रकट होता है। यह श्लोक अपनी उत्तरोत्तर बढ़ती हुई उपाधियों की श्रृंखला के लिए प्रिय है, जो हृदय को ब्रह्माण्ड के स्वामी तक उठा ले जाती है।

उत्पत्ति और कथा

Shvetashvatara Upanishad, Verse 6.7 · Traditional (Upanishadic); attributed to the sage Shvetashvatara · Vedic / Upanishadic

श्वेताश्वतर उपनिषद्, जिसका नाम उस ऋषि के नाम पर है जिन्होंने इसका साक्षात्कार एवं उपदेश किया कहा जाता है, एक ब्रह्म के दर्शन को परम ईश्वर के प्रति हार्दिक भक्ति के साथ बुन देता है। अपने छठे अध्याय में ऋषि समस्त कारणों के उस कारण की स्तुति में उठते हैं, जिसके ऊपर कोई स्वामी या प्रभु नहीं। यह श्लोक उस आराधना के शिखर पर खड़ा है, जो परम ईश्वर को स्वामियों का स्वामी, देवों का देव, परम-अतीत एवं पूज्य घोषित करता है — वह, जिसे जानने हेतु साधक प्रार्थना करता है।

शास्त्रों में वर्णित

श्वेताश्वतर उपनिषद् सिखाता है कि परम ईश्वर, यद्यपि एक एवं अद्वितीय है, समस्त का अन्तर्यामी एवं प्रत्येक शक्ति का स्रोत है; यह प्रतिज्ञा करता है कि जिस महान् आत्मा की ईश्वर के प्रति परा-भक्ति है, और जिसकी अपने गुरु के प्रति वैसी ही भक्ति है जैसी ईश्वर के प्रति, उसके लिए इसमें घोषित सत्य प्रकाशित होकर अपना पूर्ण अर्थ प्रकट कर देते हैं।

मंत्र

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

तमीश्वराणां परमं महेश्वरं तं देवतानां परमं दैवतम् पतिं पतीनां परमं परस्ताद्विदाम देवं भुवनेशमीड्यम्

tam īśvarāṇāṁ paramaṁ maheśvaraṁ taṁ devatānāṁ paramaṁ ca daivatam patiṁ patīnāṁ paramaṁ parastād vidāma devaṁ bhuvaneśam īḍyam

अर्थ:उसे हम जानें — जो ईश्वरों का परम महेश्वर है, देवताओं का परम दैवत है, पतियों का पति है, सबसे परे और परम है — उस तेजोमय दिव्य भुवनेश को, जो सर्वथा पूज्य है।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

तम्🔊tamतम् — उसे, उस (परम तत्त्व) को
ईश्वराणां परमम्🔊īśvarāṇāṁ paramamईश्वराणां परमम् — समस्त शासकों एवं नियन्ताओं में परम (श्रेष्ठ)
महेश्वरम्🔊maheśvaramमहेश्वरम् — महान् प्रभु (महेश्वर), सर्वोच्च स्वामी
देवतानां परमम् दैवतम्🔊devatānāṁ paramam daivatamदेवतानां परमम् दैवतम् — समस्त देवताओं के परम देव (दैवत)
पतिम् पतीनाम्🔊patiṁ patīnāmपतिम् पतीनाम् — समस्त पतियों के पति, स्वामियों के स्वामी
परमम्🔊paramamपरमम् — परम, सर्वोच्च
परस्तात्🔊parastātपरस्तात् — परे (अव्यक्त से भी परे), परम-अतीत
विदाम🔊vidāmaविदाम — हम जानें, हम जान सकें, हम साक्षात्कार करें
देवम्🔊devamदेवम् — तेजोमय दिव्य, ज्योतिर्मय प्रभु
भुवनेशम्🔊bhuvaneśamभुवनेशम् — लोकों के स्वामी, ब्रह्माण्ड के शासक
ईड्यम्🔊īḍyamईड्यम् — पूज्य, उपास्य, समस्त स्तुति के योग्य

तमीश्वराणां परमं महेश्वरम् पाठ के लाभ

एक परम ईश्वर को समस्त शक्तियों, देवों एवं शासकों में सर्वोच्च रूप में प्रतिष्ठित करता है।

ब्रह्म के प्रति व्यक्त, पूज्य परमेश्वर के रूप में गहन भक्ति का पोषण करता है।

प्रभु को परम-अतीत एवं उपास्य दोनों रूपों में जानकर ज्ञान-मार्ग को उपासना से जोड़ता है।

लोकों के स्वामी के प्रति समर्पण को प्रेरित करता है, जो एकमात्र शरण एवं लक्ष्य हैं।

परम महेश्वर की कृपा एवं रक्षा का आवाहन करने हेतु पढ़ा जाता है।

हृदय को अनेक छोटे उपास्य देवों से ऊपर उठाकर एक देवाधिदेव तक ले जाता है।

तमीश्वराणां परमं महेश्वरम् जप विधि

जप संख्या11बार
उत्तम समयप्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) में ध्यान एवं उपासना के समय
दिशाEast or North

इस श्लोक का भक्तिपूर्वक पाठ करें, प्रत्येक उत्तरोत्तर बढ़ती हुई उपाधि — पतियों का पति, देवों का देव, लोकों का शासक — को हृदय को एक परम तत्त्व की ओर उठाने दें। जैसा श्लोक कहता है 'विदाम' ('हम जानें'), इसे केवल स्तुति न रहकर इस प्रभु का सच्चा साक्षात्कार करने की प्रार्थना बनाएँ। यह जिस पूज्य दिव्यता का नाम लेता है, उसे आत्म-समर्पण में स्वयं को अर्पित करें, और उससे उत्पन्न श्रद्धा एवं शान्ति में निवास करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इसका अर्थ है 'उसे हम जानें — जो ईश्वरों का परम महेश्वर, महान् स्वामी, देवों का देव है'। यह श्लोक एक परम ईश्वर (महेश्वर) को समस्त शासकों, देवताओं एवं शक्तियों से ऊपर, ब्रह्माण्ड के परम-अतीत एवं पूज्य शासक के रूप में महिमामण्डित करता है।
यह श्वेताश्वतर उपनिषद् (6.7) से है, जो कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध है। श्वेताश्वतर प्रमुख उपनिषदों में सर्वाधिक भक्तिपरक है, जो एक ब्रह्म को व्यक्त परमेश्वर (ईश्वर, रुद्र, महेश्वर) के रूप में प्रस्तुत करता है।
श्वेताश्वतर उपनिषद् एक परम तत्त्व ब्रह्म के लिए रुद्र एवं महेश्वर जैसे नामों का प्रयोग करता है, जिसे व्यक्त परमेश्वर के रूप में देखा जाता है। भक्त इस प्रभु की उपासना शिव के रूप में कर सकते हैं, किन्तु यह श्लोक उस एक परम तत्त्व की ओर संकेत करता है जो समस्त देवताओं एवं रूपों से परे एवं उनका आधार है।
इसका पाठ उपासना एवं चिन्तन में एक परम ईश्वर की पुष्टि एवं स्तुति हेतु किया जाता है। 'विदाम' ('हम जानें') से आरम्भ होने वाली प्रार्थना के रूप में, इसका उपयोग भक्ति एवं दिव्यता को ब्रह्माण्ड के परम शासक एवं लक्ष्य के रूप में साक्षात्कार करने की आकांक्षा दोनों को गहन करने हेतु होता है।

ये भी पढ़ें

उपयोगी लगा? अपनों के साथ साझा करें 🙏

Share:

Explore more sacred mantras with complete meaning and chanting guides