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सन्तोषी माता चालीसा

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 शुक्रवार, संतोषी माता व्रत के भाग के रूप में·🎵 ऑडियो सहित·📜 Traditional Hindi devotional hymn

अन्य नाम / खोज: bandaum santoshi charana riddhi siddhi datara · santoshi mata chalisa lyrics

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अर्थ

सन्तोषी माता चालीसा संतोष की देवी संतोषी माता की 40 पंक्तियों की स्तुति है, जिन्हें भगवान गणेश की पुत्री माना जाता है। इसका पाठ संतोष, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति लाता है, और यह लोकप्रिय शुक्रवार व्रत का हृदय है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Hindi devotional hymn · Traditional · Modern devotional era

संतोष की देवी संतोषी माता को 20वीं सदी में उत्तर भारत भर में अपार लोकप्रियता मिली, विशेषकर 1975 की फिल्म 'जय संतोषी माँ' के बाद। गणेश और रिद्धि-सिद्धि की पुत्री के रूप में पूजित, वे सरल शुक्रवार व्रत के लिए प्रिय हैं — गुड़ और चने का भोग और खटास तथा असंतोष से मुक्त हृदय। यह चालीसा भारत के तीर्थों में उनके अनेक रूपों को माला रूप में पिरोती है और उनकी शरण लेने वाले सभी को शांति का वचन देती है।

शास्त्रों में वर्णित

संतोषी माता के भक्त उनके सरल सोलह-शुक्रवार व्रत से अनगिनत मनोकामनाओं की पूर्ति की कथा सुनाते हैं — घरों में सामंजस्य की पुनर्स्थापना, विवाहों का आशीर्वाद, और दरिद्रता के बोझ का उतरना — उनके लिए जो शुद्ध, संतुष्ट हृदय से उनका व्रत रखते हैं और केवल गुड़ और चना अर्पित करते हैं। चालीसा का वचन कोमल और निश्चित है: उनकी शरण लो, और अस्तित्व के सागर से सुरक्षित पार हो जाओ।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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दोहा 1

बन्दौं सन्तोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार। ध्यान धरत ही होत नर दुःख सागर से पार॥

Bandaum santoshi charana riddhi-siddhi datara Dhyana dharata hi hota nara duhkha sagara se para

अर्थ:मैं संतोषी माता के चरणों में नमन करता हूँ, जो रिद्धि-सिद्धि की दात्री हैं; केवल उनका ध्यान धरने से ही मनुष्य दुःख-सागर से पार हो जाता है।

दोहा 2

भक्तों को संतोष दे संतोषी तव नाम। कृपा करहु जगदम्ब अब आया तेरे धाम॥

Bhaktom ko samtosha de samtoshi tava nama Kripa karahu jagadamba aba aya tere dhama

अर्थ:हे संतोषी, अपने भक्तों को संतोष दीजिए, जिनका नाम ही सान्त्वना है; हे जगदम्बा, कृपा कीजिए — मैं आपके धाम आया हूँ।

चौपाई 1

जय सन्तोषी मात अनुपम। शांति दायिनी रूप मनोरम॥

Jaya santoshi mata anupama Shamti dayini rupa manorama

अर्थ:जय संतोषी माता, अनुपम, शांति देने वाले मनोहर रूप वाली।

चौपाई 2

सुन्दर वरण चतुर्भुज रूप। वेश मनोहर ललित अनुपा॥

Sundara varana chaturbhuja rupa Vesha manohara lalita anupa

अर्थ:सुन्दर वर्ण और चतुर्भुज रूप, मनोहर वेश, ललित और अनुपम।

चौपाई 3

श्वेताम्बर रूप मनहारी। माँ तुम्हारी छवि जग से न्यारी॥

Shvetambara rupa manahari Man tumhari chhavi jaga se nyari

अर्थ:श्वेत वस्त्र धारण किए, आपका रूप मन हर लेता है; हे माता, आपकी छवि जगत में अनोखी है।

चौपाई 4

दिव्य स्वरूपा आयत लोचन। दर्शन से हो संकटमोचन॥

Divya svarupa ayata lochana Darshana se ho samkatamochana

अर्थ:दिव्य रूप और विशाल नेत्र वाली — आपके दर्शन मात्र से सब संकट दूर हो जाते हैं।

चौपाई 5

जय गणेश की सुता भवानी। रिद्धि- सिद्धि की पुत्री ज्ञानी॥

Jaya ganesha ki suta bhavani Riddhi- siddhi ki putri jnani

अर्थ:जय हो, हे गणेश की पुत्री, हे भवानी; रिद्धि और सिद्धि की ज्ञानी पुत्री।

चौपाई 6

अगम अगोचर तुम्हरी माया। सब पर करो कृपा की छाया॥

Agama agochara tumhari maya Saba para karo kripa ki chhaya

अर्थ:अगम और अगोचर है आपकी माया; सब पर अपनी कृपा की छाया कीजिए।

चौपाई 7

नाम अनेक तुम्हारे माता। अखिल विश्‍व है तुमको ध्याता॥

Nama aneka tumhare mata Akhila vishva hai tumako dhyata

अर्थ:हे माता, आपके अनेक नाम हैं; समस्त विश्व आपका ध्यान करता है।

चौपाई 8

तुमने रूप अनेकों धारे। को कहि सके चरित्र तुम्हारे॥

Tumane rupa anekom dhare Ko kahi sake charitra tumhare

अर्थ:आपने अनेकों रूप धारण किए हैं — आपके चरित्रों का वर्णन कौन कर सकता है?

चौपाई 9

धाम अनेक कहाँ तक कहिये। सुमिरन तब करके सुख लहिये॥

Dhama aneka kahan taka kahiye Sumirana taba karake sukha lahiye

अर्थ:आपके कितने धाम गिनाए जाएँ? आपका स्मरण करके मनुष्य सुख पाता है।

चौपाई 10

विन्ध्याचल में विन्ध्यवासिनी। कोटेश्वर सरस्वती सुहासिनी॥

Vindhyachala mem vindhyavasini Koteshvara sarasvati suhasini

अर्थ:विन्ध्याचल में आप विन्ध्यवासिनी हैं; कोटेश्वर में सुहासिनी सरस्वती।

चौपाई 11

कलकत्ते में तू ही काली। दुष्ट नाशिनी महाकराली॥

Kalakatte mem tu hi kali Dushta nashini mahakarali

अर्थ:कलकत्ता में आप ही काली हैं, दुष्टों का नाश करने वाली, महाकराली।

चौपाई 12

सम्बल पुर बहुचरा कहाती। भक्तजनों का दुख मिटाती॥

Sambala pura bahuchara kahati Bhaktajanom ka dukha mitati

अर्थ:सम्बलपुर में आप बहुचरा कहलाती हैं, भक्तजनों के दुःख मिटाने वाली।

चौपाई 13

ज्वाला जी में ज्वाला देवी। पूजत नित्य भक्त जन सेवी॥

Jvala ji mem jvala devi Pujata nitya bhakta jana sevi

अर्थ:ज्वाला जी में आप ज्वाला देवी हैं, नित्य भक्त सेवकों द्वारा पूजित।

चौपाई 14

नगर बम्बई की महारानी। महा लक्ष्मी तुम कल्याणी॥

Nagara bambai ki maharani Maha lakshmi tuma kalyani

अर्थ:आप बम्बई नगर की महारानी हैं, कल्याणकारी महालक्ष्मी।

चौपाई 15

मदुरा में मीनाक्षी तुम हो। सुख दुख सबकी साक्षी तुम हो॥

Madura mem minakshi tuma ho Sukha dukha sabaki sakshi tuma ho

अर्थ:मदुरा में आप मीनाक्षी हैं; आप सबके सुख-दुःख की साक्षी हैं।

चौपाई 16

राजनगर में तुम जगदम्बे। बनी भद्रकाली तुम अम्बे॥

Rajanagara mem tuma jagadambe Bani bhadrakali tuma ambe

अर्थ:राजनगर में आप जगदम्बा हैं; हे माता अम्बा, आप भद्रकाली बनीं।

चौपाई 17

पावागढ़ में दुर्गा माता। अखिल विश्व तेरा यश गाता॥

Pavagadha़ mem durga mata Akhila vishva tera yasha gata

अर्थ:पावागढ़ में आप दुर्गा माता हैं; समस्त विश्व आपका यश गाता है।

चौपाई 18

काशीपुराधीश्वरी माता। अन्नपूर्णा नाम सुहाता॥

Kashipuradhishvari mata Annapurna nama suhata

अर्थ:काशी की अधीश्वरी रूप में आप अन्नपूर्णा माता हैं, जिनका नाम सदा सुहावना है।

चौपाई 19

सर्वानंद करो कल्याणी। तुम्हीं शारदा अमृतवाणी॥

Sarvanamda karo kalyani Tumhim sharada amritavani

अर्थ:हे कल्याणी, सबका कल्याण कीजिए; आप ही अमृतवाणी वाली शारदा हैं।

चौपाई 20

तुम्हरी महिमा जल में थल में। दुःख दारिद्र सब मेटो पल में॥

Tumhari mahima jala mem thala mem Duhkha daridra saba meto pala mem

अर्थ:आपकी महिमा जल और थल में व्याप्त है; पल भर में आप सब दुःख और दरिद्रता मिटा देती हैं।

चौपाई 21

जेते ऋषि और मुनीशा। नारद देव और देवेशा।

Jete rishi aura munisha Narada deva aura devesha

अर्थ:जितने भी ऋषि और महामुनि हैं, और नारद तथा देवताओं के स्वामी —

चौपाई 22

इस जगती के नर और नारी। ध्यान धरत हैं मात तुम्हारी॥

Isa jagati ke nara aura nari Dhyana dharata haim mata tumhari

अर्थ:— इस जगत के सभी नर और नारी, हे माता, आपका ध्यान धरते हैं।

चौपाई 23

जापर कृपा तुम्हारी होती। वह पाता भक्ति का मोती॥

Japara kripa tumhari hoti Vaha pata bhakti ka moti

अर्थ:जिस पर आपकी कृपा होती है, वह भक्ति का मोती पा लेता है।

चौपाई 24

दुःख दारिद्र संकट मिट जाता। ध्यान तुम्हारा जो जन ध्याता॥

Duhkha daridra samkata mita jata Dhyana tumhara jo jana dhyata

अर्थ:जो मनुष्य आपका ध्यान करता है, उसके दुःख, दरिद्रता और संकट मिट जाते हैं।

चौपाई 25

जो जन तुम्हरी महिमा गावै। ध्यान तुम्हारा कर सुख पावै॥

Jo jana tumhari mahima gavai Dhyana tumhara kara sukha pavai

अर्थ:जो मनुष्य आपकी महिमा गाता है और आपका ध्यान करके सुख पाता है।

चौपाई 26

जो मन राखे शुद्ध भावना। ताकी पूरण करो कामना॥

Jo mana rakhe shuddha bhavana Taki purana karo kamana

अर्थ:जो शुद्ध भावना मन में रखता है, उसकी हर कामना आप पूर्ण करती हैं।

चौपाई 27

कुमति निवारि सुमति की दात्री। जयति जयति माता जगधात्री॥

Kumati nivari sumati ki datri Jayati jayati mata jagadhatri

अर्थ:कुमति को दूर करने वाली, सुमति की दात्री — जय हो, जय हो, हे माता, जगधात्री!

चौपाई 28

शुक्रवार का दिवस सुहावन। जो व्रत करे तुम्हारा पावन॥

Shukravara ka divasa suhavana Jo vrata kare tumhara pavana

अर्थ:शुक्रवार का दिन सुहावना है; जो आपका पवित्र व्रत करता है,

चौपाई 29

गुड़ छोले का भोग लगावै। कथा तुम्हारी सुने सुनावे॥

Guda़ chhole ka bhoga lagavai Katha tumhari sune sunave

अर्थ:— गुड़ और भुने चने (गुड़-चना) का भोग लगाता है, और आपकी कथा सुनता और सुनाता है,

चौपाई 30

विधिवत पूजा करे तुम्हारी। फिर प्रसाद पावे शुभकारी॥

Vidhivata puja kare tumhari Phira prasada pave shubhakari

अर्थ:— और विधिपूर्वक आपकी पूजा करता है, फिर आपका शुभकारी प्रसाद पाता है।

चौपाई 31

शक्ति- सामरथ हो जो धनको। दान- दक्षिणा दे विप्रन को॥

Shakti- samaratha ho jo dhanako Dana- dakshina de viprana ko

अर्थ:जो सामर्थ्यवान धनी हैं और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देते हैं,

चौपाई 32

वे जगती के नर नारी। मनवांछित फल पावें भारी॥

Ve jagati ke nara au nari Manavamchhita phala pavem bhari

अर्थ:— वे जगत के नर और नारी अपने मनवांछित फल भरपूर पाते हैं।

चौपाई 33

जो जन शरण तुम्हारी जावे। सो निश्‍चय भव से तर जावे॥

Jo jana sharana tumhari jave So nishchaya bhava se tara jave

अर्थ:जो मनुष्य आपकी शरण में जाता है, वह निश्चय ही भवसागर से तर जाता है।

चौपाई 34

तुम्हरो ध्यान कुमारी ध्यावे। निश्‍चय मनवांछित वर पावै॥

Tumharo dhyana kumari dhyave Nishchaya manavamchhita vara pavai

अर्थ:जो कुमारी आपका ध्यान करती है, वह निश्चय ही मनवांछित वर पाती है।

चौपाई 35

सधवा पूजा करे तुम्हारी। अमर सुहागिन हो वह नारी॥

Sadhava puja kare tumhari Amara suhagina ho vaha nari

अर्थ:जो सधवा (सुहागिन) आपकी पूजा करती है, वह नारी अमर सुहागिन हो जाती है।

चौपाई 36

विधवा धर के ध्यान तुम्हारा। भवसागर से उतरे पारा॥

Vidhava dhara ke dhyana tumhara Bhavasagara se utare para

अर्थ:जो विधवा आपका ध्यान धरती है, वह भवसागर से पार उतर जाती है।

चौपाई 37

जयति जयति जय संकट हरणी। विघ्न विनाशन मंगल करनी॥

Jayati jayati jaya samkata harani Vighna vinashana mamgala karani

अर्थ:जय हो, जय हो, जय हो, हे संकट हरने वाली, विघ्नों का नाश करने वाली, मंगलकारिणी!

चौपाई 38

हम पर संकट है अति भारी। वेगि खबर लो मात हमारी॥

Hama para samkata hai ati bhari Vegi khabara lo mata hamari

अर्थ:हम पर अत्यंत भारी संकट है — हे माता, शीघ्र हमारी सुध लीजिए।

अंतिम दोहा

संतोषी माँ के सदा बंदहूँ पग निश वास। पूर्ण मनोरथ हो सकल मात हरौ भव त्रास॥

Samtoshi man ke sada bamdahun paga nisha vasa Purna manoratha ho sakala mata harau bhava trasa

अर्थ:मैं संतोषी माता के चरणों में दिन-रात सदा नमन करता हूँ; मेरे सकल मनोरथ पूर्ण हों — हे माता, भव का त्रास हर लीजिए।

शब्द-दर-शब्द अर्थ

उच्चारण सुनने के लिए किसी भी शब्द पर क्लिक करें

सन्तोषी🔊Santoshiसन्तोषी — संतोष और तृप्ति की देवी
रिद्धि-सिद्धि दातार🔊Riddhi-Siddhi Datarरिद्धि-सिद्धि दातार — समृद्धि और सिद्धि देने वाली
जगदम्ब🔊Jagadambaजगदम्ब — जगत की माता
गणेश की सुता🔊Ganesh ki Sutaगणेश की सुता — भगवान गणेश की पुत्री
गुड़ छोले🔊Gud-Chholeगुड़ छोले — गुड़ और चना — उनका पवित्र भोग
शुक्रवार🔊Shukravarशुक्रवार — शुक्रवार — उनका पवित्र व्रत-दिवस
संकट हरणी🔊Sankat Haraniसंकट हरणी — संकट हरने वाली
भव त्रास🔊Bhav Trasभव त्रास — संसार (जन्म-मरण) का भय

सन्तोषी माता चालीसा पाठ के लाभ

सन्तोषी माता चालीसा का पाठ संतोष, शांति और सच्ची मनोकामनाओं की पूर्ति लाता है।

यह लोकप्रिय संतोषी माता शुक्रवार व्रत का हृदय है, जो दुःख, दरिद्रता और संकट को दूर करता है।

कहा जाता है कि यह कुमारियों को अच्छा वर, विवाहित स्त्रियों को स्थायी सौभाग्य, और माँ की शरण लेने वाले सभी को आश्रय देता है।

भारत के पवित्र तीर्थों में देवी के अनेक रूपों का वर्णन करता है, जो जगदम्बा के प्रति भक्ति को गहरा करता है।

चिंता और असंतोष को शांत करता है, उन्हें कृतज्ञता और मन की स्थिरता से बदलता है।

विशेषकर शुक्रवार को गुड़-चना (गुड़ और भुने चने) के भोग सहित पढ़ा जाता है।

सन्तोषी माता चालीसा जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयशुक्रवार, संतोषी माता व्रत के भाग के रूप में
दिशाEast or North

शुक्रवार को, स्नान के बाद, संतोषी माता की छवि के समक्ष बैठें और गुड़ तथा चना (भुने चने) अर्पित करें। दीपक जलाएँ, आरंभिक दोहा और चौपाइयाँ भक्तिपूर्वक पढ़ें, और व्रत कथा सुनें या सुनाएँ। व्रत के दिन खट्टे भोजन से बचें। आरती से समापन करें और प्रसाद बाँटें। व्रत परंपरागत रूप से 16 शुक्रवार रखा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह संतोष की देवी संतोषी माता, जिन्हें भगवान गणेश की पुत्री माना जाता है, की 40-पद की हिंदी स्तुति है। यह उन्हें समर्पित लोकप्रिय शुक्रवार व्रत का केंद्र है।
शुक्रवार को, देवी के विशेष दिन, उनके व्रत के भाग के रूप में, जो परंपरागत रूप से सोलह लगातार शुक्रवार रखा जाता है।
गुड़ और भुने चने उनका पारंपरिक भोग हैं। उनका व्रत रखने वाले भक्त व्रत के दिन खट्टे भोजन से बचते हैं।
माना जाता है कि यह संतोष लाता है, दुःख और दरिद्रता दूर करता है, अविवाहित कन्याओं को अच्छा वर देता है, पत्नियों को स्थायी वैवाहिक सुख देता है, और सच्ची मनोकामनाओं की पूर्ति करता है।

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