श्री शीतला माता आरती
अन्य नाम / खोज: maiya jaya shitala mata · sheetla mata aarti lyrics
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✦ अर्थ
यह शीतला माता की पारम्परिक हिन्दी आरती है, जो शीतलकारिणी देवी (दुर्गा का एक रूप) की स्तुति में दीपक और घण्टी के साथ पूजा के अन्त में गाई जाती है। यह ज्वर, चेचक और महामारी रोगों से रक्षा तथा परिवार के स्वास्थ्य के लिए गाई जाती है। शीतला अष्टमी (बसौड़ा) पर इसका विशेष महत्व है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Hindi devotional aarti · Traditional · Devotional era
शीतला माता, अर्थात 'शीतल करने वाली', वह देवी (दुर्गा का एक रूप) हैं जो ज्वर, चेचक और महामारी रोगों से रक्षा भी करती हैं और उन्हें ठीक भी करती हैं — गर्दभ पर सवार और हाथों में झाड़ू, सूप, कलश तथा नीम-पत्र धारण किए हुए। शीतला अष्टमी (बसौड़ा) पर भक्त उन्हें एक दिन पहले बना शीतल भोजन अर्पित करते हैं और अपने बच्चों तथा घरों के स्वास्थ्य व रक्षा के लिए उनकी पूजा करते हैं।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कहा जाता है कि जो ज्वर, चेचक या त्वचा-रोग से पीड़ित होकर शीतला माता की शरण लेते हैं, वे रोगमुक्त हो जाते हैं — कोढ़ी निर्मल काया पाता है और अन्धा नेत्र पाता है। बसौड़ा पर नई अग्नि नहीं जलाई जाती; एक दिन पहले बना शीतल भोजन अर्पित किया जाता है और परिवार के स्वास्थ्य के लिए यह आरती गाई जाती है।
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मैया जय शीतला माता । आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता ॥
Maiya jaya shitala mata Adi jyoti maharani saba phala ki data
अर्थ:हे माता, शीतला माता की जय; आदि ज्योति, महारानी, सब फलों की दात्री।
रतन सिंहासन शोभित श्वेत छत्र भाता । ऋद्धि सिद्धि चँवर ढुलावें जगमग छवि छाता ॥
Ratana simhasana shobhita shveta chhatra bhata Riddhi siddhi chanvara dhulavem jagamaga chhavi chhata
अर्थ:रत्नजटित सिंहासन पर सुशोभित, श्वेत छत्र सुशोभित; ऋद्धि-सिद्धि चँवर ढुलातीं, आपकी छवि जगमगाती है।
विष्णु सेवत ठाढ़े सेवें शिव धाता । वेद पुराण वरणत पार नहीं पाता ॥
Vishnu sevata thadha़e sevem shiva dhata Veda purana varanata para nahim pata
अर्थ:विष्णु खड़े होकर सेवा करते हैं, शिव और ब्रह्मा सेवा करते हैं; वेद-पुराण वर्णन करते हैं, पर आपकी महिमा का पार नहीं पाते।
इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा । सूरज ताल बजावै नारद मुनि गाता ॥
Indra mridamga bajavata chandra vina hatha Suraja tala bajavai narada muni gata
अर्थ:इन्द्र मृदंग बजाते हैं, चन्द्रमा हाथ में वीणा; सूर्य ताल देते हैं और नारद मुनि गाते हैं।
घण्टा शङ्ख शहनाई बाजै मन भाता । करैं भक्तजन आरती लखि लखि हर्षाता ॥
Ghanta shankha shahanai bajai mana bhata Karaim bhaktajana arati lakhi lakhi harshata
अर्थ:घण्टा, शंख और शहनाई बजती है, मन को भाती है; भक्तजन आरती करते हैं, आपको देख-देख हर्षित होते हैं।
ब्रह्मरूप वरदानी तू ही तीन काल ज्ञाता । भक्तन को सुख देती मातु पिता भ्राता ॥
Brahmarupa varadani tu hi tina kala jnata Bhaktana ko sukha deti matu pita bhrata
अर्थ:ब्रह्मरूपा, वरदायिनी, आप तीनों कालों की ज्ञाता हैं; भक्तों को माता, पिता और भ्राता के समान सुख देती हैं।
जो जन ध्यान लगावे प्रेम शक्ति पाता । सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता ॥
Jo jana dhyana lagave prema shakti pata Sakala manoratha pave bhavanidhi tara jata
अर्थ:जो प्रेम से आप में मन लगाता है वह शक्ति पाता है; वह समस्त मनोरथ पाता है और भवसागर तर जाता है।
रोगों से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता । कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता ॥
Rogom se jo pida़ita koi sharana teri ata Kodha़i pave nirmala kaya andha netra pata
अर्थ:जो रोग से पीड़ित आपकी शरण में आता है — कोढ़ी निर्मल काया पाता है और अन्धा नेत्र पाता है।
बाँझ पुत्र को पावे दारिद्र कट जाता । ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछताता ॥
Banjha putra ko pave daridra kata jata Tako bhajai jo nahim sira dhuni pachhatata
अर्थ:बाँझ स्त्री पुत्र पाती है और दरिद्रता कट जाती है; जो आपको नहीं भजता वह सिर धुन-धुनकर पछताता है।
शीतल करती जननी तू ही है जग त्राता । उत्पत्ति व्याधि बिनाशन तू सब की घाता ॥
Shitala karati janani tu hi hai jaga trata Utpatti vyadhi binashana tu saba ki ghata
अर्थ:आप शीतल करती हैं, हे जननी, आप ही जगत् की त्राता हैं; आप उत्पन्न करती, व्याधि का नाश करती और सबकी अन्त हैं।
दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता । भक्ति आपनी दीजै और न कुछ भाता ॥
Dasa vichitra kara joda़e suna meri mata Bhakti apani dijai aura na kuchha bhata
अर्थ:आपका दास विचित्र हाथ जोड़ता है — हे माता, मेरी सुनिए; अपनी भक्ति दीजिए, और कुछ नहीं भाता।
श्री शीतला माता आरती पाठ के लाभ
शीतला माता (दुर्गा/देवी का शीतल रूप) के लिए गाई जाती है, जो ज्वर, चेचक, खसरा तथा त्वचा एवं महामारी रोगों से रक्षा करती और उन्हें दूर करती हैं।
स्वास्थ्य, रोग से मुक्ति, स्वस्थ संतान तथा परिवार को ताप और संक्रामक रोगों से बचाने के लिए गाई जाती है।
शीतला अष्टमी (बसौड़ा) पर विशेष रूप से पूजी जाती हैं, जब शीतल और बासी भोजन अर्पित किया जाता है, तथा गर्मी के महीनों में भी।
श्री शीतला माता आरती जप विधि
घी या कपूर का दीपक जलाकर उसे हाथ में लेकर देवी के सम्मुख घुमाते हुए आरती करें, साथ में घण्टी बजाएँ तो उत्तम। पुष्प और प्रसाद अर्पित करें, और अन्त में ज्योति पर हाथ फेरकर नेत्रों से लगाते हुए आरती का आशीर्वाद लें। स्थिर मन और श्रद्धा के साथ गाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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