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श्री बाँके बिहारी आरती

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः और सायं; जन्माष्टमी·🎵 ऑडियो सहित·📜 Traditional Hindi devotional aarti

अन्य नाम / खोज: he giridhara teri arati gaun pyare apako rijhaun · banke bihari aarti lyrics

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अर्थ

बाँके बिहारी आरती वृन्दावन में विराजित भगवान कृष्ण के मनोहारी रूप श्री बाँके बिहारी जी की आरती है, जिन्हें संत स्वामी हरिदास ने प्रकट किया। यह दिव्य प्रेम, भक्ति और मन की शांति के लिए गाई जाती है। 'हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ' से आरम्भ होकर यह उनके मोरमुकुट और मुरली-धारी रूप का गुणगान करती है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Hindi devotional aarti · Traditional · Devotional era

श्री बाँके बिहारी जी भगवान कृष्ण का मनोहारी त्रिभंग रूप हैं, जिन्हें महान संत-संगीतज्ञ स्वामी हरिदास ने वृन्दावन में प्रकट किया — इतने मोहक कि मंदिर में विग्रह के सम्मुख एक पर्दा खींचा जाता है, ऐसा न हो कि बिहारी की दृष्टि भक्त को अभिभूत कर दे। यह आरती, उनके मोरमुकुट और मुरली का ध्यान करते हुए, उनकी पूजा के अंत में गाई जाती है।

शास्त्रों में वर्णित

बाँके बिहारी का दर्शन इतना मनोहारी है कि मंदिर का पर्दा हर कुछ क्षणों में खींच दिया जाता है — कहते हैं कि बिहारी पर निरंतर दृष्टि प्रेम में आत्मा को शरीर से खींच सकती है। भक्त इस आरती को गाने और उस मुरली-धारी रूप का, क्षण भर के लिए ही सही, दर्शन करने वृन्दावन उमड़ पड़ते हैं।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

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श्लोक 1

हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ, प्यारे आपको रिझाऊँ श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊँ, श्री बाँके बिहारी तेरी आरती गाऊँ

He giridhara teri arati gaun, pyare apako rijhaun Shyama sundara teri arati gaun, shri banke bihari teri arati gaun

अर्थ:हे गिरिधर, मैं तेरी आरती गाऊँ और तुझे रिझाऊँ, मेरे प्यारे; हे श्यामसुन्दर, मैं तेरी आरती गाऊँ — हे श्री बाँके बिहारी, मैं तेरी आरती गाऊँ।

श्लोक 2

मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे, प्यारी बंसी मेरो मन मोहे देख छवि बलिहारी मैं जाऊँ

Mora mukuta pyare shisha pe sohe, pyari bamsi mero mana mohe Dekha chhavi balihari maim jaun

अर्थ:मोरमुकुट तेरे प्यारे शीश पर सुशोभित है और तेरी मधुर बंसी मेरे मन को मोह लेती है; तेरी छवि देखकर मैं तुझ पर पूर्णतः न्योछावर हो जाता हूँ।

श्लोक 3

चरणों से निकली गंगा प्यारी, जिसने सारी दुनिया तारी मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ

Charanom se nikali gamga pyari, jisane sari duniya tari Maim una charanom ke darshana paun

अर्थ:तेरे चरणों से वह प्यारी गंगा प्रवाहित हुई जिसने सारे संसार को तार दिया; मैं उन चरणों के दर्शन पाऊँ।

श्लोक 4

दास अनाथ के नाथ आप हो, दुःख-सुख जीवन प्यारे साथ आप हो हरि चरणों में शीश झुकाऊँ

Dasa anatha ke natha apa ho, duhkha-sukha jivana pyare satha apa ho Hari charanom mem shisha jhukaun

अर्थ:तू अनाथ दास का नाथ है; सुख-दुःख में तू जीवन का प्यारा साथी है; हरि के चरणों में मैं शीश झुकाता हूँ।

श्लोक 5

श्री हरिदास के प्यारे तुम हो, मेरे मोहन जीवनधन हो देख युगल छवि बलि-बलि जाऊँ

Shri haridasa ke pyare tuma ho, mere mohana jivanadhana ho Dekha yugala chhavi bali-bali jaun

अर्थ:तू श्री हरिदास का प्यारा है; तू मेरा मोहन, मेरे जीवन का धन है; उस युगल छवि (राधा-कृष्ण) को देखकर मैं बार-बार स्वयं को न्योछावर करता हूँ।

श्री बाँके बिहारी आरती पाठ के लाभ

श्री बाँके बिहारी जी — वृन्दावन में विराजित भगवान कृष्ण के मनोहारी रूप, जिन्हें संत स्वामी हरिदास ने प्रकट किया, की आरती।

दिव्य प्रेम (प्रेमा), भक्ति, मन की शांति और कृष्ण-दर्शन के आनन्द के लिए गाई जाती है।

विशेष रूप से वृन्दावन में, जन्माष्टमी पर और बाँके बिहारी मंदिर के उत्सवों में गाई जाती है।

कृष्ण-पूजा के अंत में कृष्ण-आरती और भजनों के साथ की जाती है।

श्री बाँके बिहारी आरती जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः और सायं; जन्माष्टमी
दिशाFacing the deity

बाँके बिहारी (कृष्ण) की छवि के सम्मुख दीप जलाएँ और घंटी के साथ गाते हुए उसे घुमाकर आरती करें। पुष्प, तुलसी और भोग (विशेषकर माखन और मिष्ठान्न) अर्पित करें, और अंत में आरती का आशीर्वाद लेकर समाप्त करें। प्रेमपूर्वक गाएँ, मुरली और मोरमुकुट वाले मनोहारी त्रिभंग रूप में मन रमाते हुए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाँके बिहारी जी वृन्दावन के प्रसिद्ध बाँके बिहारी मंदिर में विराजित भगवान कृष्ण का प्रिय रूप हैं। 'बाँके' का अर्थ है तीन स्थानों पर झुका हुआ (त्रिभंग) और 'बिहारी' का अर्थ है रसिक; इस विग्रह को महान संत और संगीतज्ञ स्वामी हरिदास ने प्रकट किया।
यह हिन्दी आरती 'हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ' है, जो पूजा के अंत में श्री बाँके बिहारी (कृष्ण) की स्तुति में गाई जाती है, और उनके मनोहारी मुरली-धारी, मोरमुकुटधारी रूप का ध्यान करती है।
यह कृष्ण की प्रातः और सायं पूजा में, और विशेष रूप से वृन्दावन में तथा जन्माष्टमी पर गाई जाती है। दीप जलाएँ, विग्रह के सम्मुख उसे घुमाते हुए गाएँ, और आरती का आशीर्वाद लें।

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