श्री खाटू श्याम आरती
अन्य नाम / खोज: om jaya shri shyama hare baba jaya shri shyama · khatu shyam aarti lyrics
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✦ अर्थ
खाटू श्याम आरती श्याम बाबा (बर्बरीक) की स्तुति में गाई जाने वाली पारम्परिक हिन्दी आरती है, जो पूजा के अन्त में दीप व घण्टी सहित की जाती है। 'ॐ जय श्री श्याम हरे' से आरम्भ होकर यह खाटू धाम में विराजमान प्रभु के अनुपम रूप का वर्णन करती है और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करती है।
उत्पत्ति और कथा
Traditional Hindi devotional aarti · Traditional · Devotional era
खाटू श्याम जी बर्बरीक हैं, भीम के पराक्रमी पौत्र, जिनका शीश — सम्पूर्ण महाभारत युद्ध देखने का वरदान पाकर — कृष्ण द्वारा पूजित हुआ। उनके सर्वोच्च त्याग व भक्ति से प्रसन्न होकर कृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे कृष्ण के ही नाम 'श्याम' से पूजे जाएँगे और अपने भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करेंगे। खाटू (सीकर, राजस्थान) में उनका मन्दिर लाखों को आकर्षित करता है; यह आरती उनकी पूजा के अन्त में गाई जाती है।
✦ शास्त्रों में वर्णित
कृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया कि वे असहायों व पराजितों के सहारे — 'हारे का सहारा' — बनेंगे, श्याम रूप में पूजित होकर। खाटू धाम आकर श्रद्धा से यह आरती गाने वाले भक्त बताते हैं कि उनकी सबसे असम्भव मनोकामनाएँ भी श्याम बाबा द्वारा पूर्ण होती हैं।
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ॐ जय श्री श्याम हरे बाबा जय श्री श्याम हरे । खाटू धाम विराजत अनुपम रूप धरे ॥
Om jaya shri shyama hare baba jaya shri shyama hare Khatu dhama virajata anupama rupa dhare
अर्थ:ॐ, श्री श्याम की जय; बाबा, श्री श्याम की जय! खाटू धाम में आप विराजमान हैं, अनुपम रूप धारण किए हुए।
रतन जड़ित सिंहासन सिर पर चँवर ढुरे । तन केसरिया बागो कुण्डल श्रवण पड़े ॥
Ratana jada़ita simhasana sira para chanvara dhure Tana kesariya bago kundala shravana pada़e
अर्थ:रत्नजड़ित सिंहासन पर, सिर के ऊपर चँवर ढुर रहा है; केसरिया वस्त्र धारण किए, कानों में कुण्डल शोभायमान हैं।
गल पुष्पों की माला सिर पर मुकुट धरे । खेवत धूप अग्नि पर दीपक ज्योति जले ॥
Gala pushpom ki mala sira para mukuta dhare Khevata dhupa agni para dipaka jyoti jale
अर्थ:गले में पुष्पों की माला और सिर पर मुकुट; अग्नि पर धूप घुमाई जाती है और दीपक की ज्योति प्रकाशमान जलती है।
मोदक खीर चूरमा सुवरण थाल भरे । सेवक भोग लगावत सेवा नित्य करे ॥
Modaka khira churama suvarana thala bhare Sevaka bhoga lagavata seva nitya kare
अर्थ:मोदक, खीर और चूरमा से स्वर्ण थाल भरे हैं; आपके सेवक भोग अर्पित करते हैं और नित्य आपकी सेवा करते हैं।
झांझ कटोरा और घड़ियावल शंख मृदंग घुरे । भक्त आरती गावे जयकार करे ॥
Jhamjha katora aura ghada़iyavala shamkha mridamga ghure Bhakta arati gave jayakara kare
अर्थ:झांझ, कटोरा, घड़ियाल, शंख और मृदंग गूँजते हैं; भक्त आरती गाते हैं और जयकार करते हैं।
जो ध्यावे फल पावे सब दुःख से उबरे । सेवक जन निज मुख से श्री श्याम श्याम उचरे ॥
Jo dhyave phala pave saba duhkha se ubare Sevaka jana nija mukha se shri shyama shyama uchare
अर्थ:जो आपका ध्यान करता है वह फल पाता है और हर दुःख से उबर जाता है; भक्त अपने ही मुख से 'श्री श्याम, श्याम' उच्चारते हैं।
श्री श्याम बिहारी जी की आरती जो कोई नर गावे । कहत भक्त मनवांछित फल पावे ॥
Shri shyama bihari ji ki arati jo koi nara gave Kahata bhakta manavamchhita phala pave
अर्थ:जो कोई श्री श्याम बिहारी की यह आरती गाता है — भक्त कहता है — वह अपने हृदय की मनोवांछित फल प्राप्त करता है।
श्री खाटू श्याम आरती पाठ के लाभ
खाटू श्याम जी (बर्बरीक, भीम के पौत्र, जिन्हें कृष्ण ने वरदान दिया कि कलियुग में वे कृष्ण के ही नाम 'श्याम' से पूजे जाएँगे) को गाई जाती है।
मनोकामनाओं की पूर्ति, दुःखों के निवारण और 'हारे के सहारे' की प्रसिद्ध कृपा के लिए गाई जाती है।
खाटू धाम (सीकर, राजस्थान) में, फाल्गुन में और एकादशी — श्याम बाबा के विशेष दिन — पर सर्वाधिक प्रभावशाली।
श्याम बाबा की पूजा के अन्त में खाटू श्याम चालीसा के साथ की जाती है।
श्री खाटू श्याम आरती जप विधि
दीप (घी या कपूर का) जलाएँ और उसे हाथ में लेकर, गाते हुए देवता के समक्ष घुमाते हुए आरती करें, यथासम्भव घण्टी के साथ। पुष्प व प्रसाद अर्पित करें, और आरती की आशीष लेकर (हाथ ज्योति के ऊपर ले जाकर नेत्रों से लगाकर) समाप्त करें। भक्ति व निर्मल हृदय से गाएँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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