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श्री गंगा आरती

🕉️ hindu·📿 1× जप·🕐 प्रातः या संध्या, पूजा के समापन पर; पर्व-दिन·🎵 ऑडियो सहित·📜 Traditional Hindi devotional aarti

अन्य नाम / खोज: namami gamge tava padapamkajam surasuraih vandita divyarupam · ganga aarti lyrics

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अर्थ

गंगा आरती माँ गंगा की स्तुति में गाई जाने वाली पारंपरिक हिंदी आरती है, जो 'ॐ जय गंगे माता' से प्रसिद्ध है। यह हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी के घाटों पर दीप और घंटी के साथ गाई जाती है। भक्ति से इसका गायन पाप-नाश, पवित्रता और शांति प्रदान करता है।

उत्पत्ति और कथा

Traditional Hindi devotional aarti · Traditional · Devotional era

माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर भगवान शिव की जटाओं के माध्यम से उतरीं, जिन्हें राजा भगीरथ के तप से राजा सगर के साठ हजार पुत्रों के उद्धार हेतु नीचे लाया गया। नदियों में सर्वाधिक पवित्र और पवित्रता व मुक्ति की साक्षात् मूर्ति के रूप में पूजित, उनकी आरती प्रत्येक संध्या महान घाटों पर दीपों और घंटियों के बीच 'हर हर गंगे' की पुकार के साथ गाई जाती है।

शास्त्रों में वर्णित

कहा जाता है कि गंगा-जल की एक बूँद, या उनके चरणों में एक सच्ची शरण, अनेक जन्मों के पापों को धो सकती है और आत्मा को मृत्यु के भय से परे ले जा सकती है। प्रत्येक संध्या हरिद्वार और वाराणसी में हजारों लोग एकत्र होते हैं जब दीप उठाए जाते हैं और यह आरती 'हर हर गंगे' की पुकार के साथ उठती है।

सुनें और साथ में जपें

सम्पूर्ण पाठ अर्थ सहित

किसी भी पंक्ति या ▶ बटन पर टैप कर सुनें

श्लोक 1

नमामि गंगे तव पादपंकजम् सुरासुरैः वन्दित दिव्यरूपम् भक्तिं मुक्तिं ददासि नित्यं भावानुसारेण सदा नराणाम्

Namami gamge tava padapamkajam surasuraih vandita divyarupam Bhaktim muktim cha dadasi nityam bhavanusarena sada naranam

अर्थ:हे गंगे, मैं आपको प्रणाम करता हूँ; मैं आपके चरण-कमलों को नमन करता हूँ, आपके दिव्य रूप को जो देवताओं और असुरों दोनों से समान रूप से वंदित है। आप सदा, उनकी भक्ति के अनुसार, सभी लोगों को भक्ति और मुक्ति दोनों प्रदान करती हैं।

श्लोक 2

जय गंगे माता श्री जय गंगे माता जो नर तुमको ध्याता मनवांछित फल पाता

Om jaya gamge mata shri jaya gamge mata Jo nara tumako dhyata manavamchhita phala pata

अर्थ:ॐ, माँ गंगा की जय, माँ गंगा की जय! जो भी आपका ध्यान करता है वह अपने हृदय की इच्छित फल प्राप्त करता है।

श्लोक 3

चन्द्र-सी जोत तुम्हारी जल निर्मल आता शरण पड़ें जो तेरी सो नर तर जाता

Chandra-si jota tumhari jala nirmala ata Sharana pada़em jo teri so nara tara jata

अर्थ:आपका प्रकाश चंद्रमा के समान है और आपका जल निर्मल और स्वच्छ बहता है; जो भी आपकी शरण लेता है, वह व्यक्ति पार उतर जाता है।

श्लोक 4

पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता कृपा दृष्टि तुम्हारी त्रिभुवन सुखदाता

Putra sagara ke tare saba jaga ko jnata Kripa drishti tumhari tribhuvana sukhadata

अर्थ:आपने राजा सगर के पुत्रों का उद्धार किया और समस्त जगत की ज्ञाता हैं; आपकी कृपा दृष्टि तीनों लोकों को सुख देने वाली है।

श्लोक 5

एक ही बार जो तेरी शरणागति आता यम की त्रास मिटाकर परमगति पाता

Eka hi bara jo teri sharanagati ata Yama ki trasa mitakara paramagati pata

अर्थ:जो भी एक बार भी आपकी शरण में आता है — उसका यम (मृत्यु) का भय नष्ट हो जाता है और वह परमगति प्राप्त करता है।

श्लोक 6

आरती मात तुम्हारी जो जन नित्य गाता दास वही सहज में मुक्ति को पाता

Arati mata tumhari jo jana nitya gata Dasa vahi sahaja mem mukti ko pata

अर्थ:जो भी जन प्रतिदिन आपकी आरती गाता है, हे माँ — वह सेवक सहज ही मुक्ति प्राप्त करता है।

श्री गंगा आरती पाठ के लाभ

गंगा के पवित्र घाटों — हरिद्वार, ऋषिकेश, वाराणसी, प्रयागराज — और घरों में माँ गंगा की पावन कृपा पाने के लिए गाई जाती है।

माना जाता है कि यह पापों को धो देती है, आंतरिक पवित्रता और शांति देती है, और भक्त को संसार-सागर से पार उतार देती है।

दिवंगत पूर्वजों (पितृ) की शांति और मोक्ष के लिए पढ़ी जाती है, क्योंकि गंगा मुक्ति की नदी है।

गंगा दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति और नदी-तट की गंगा आरती के समय विशेष रूप से प्रभावशाली।

श्री गंगा आरती जप विधि

जप संख्या1बार
उत्तम समयप्रातः या संध्या, पूजा के समापन पर; पर्व-दिन
दिशाFacing the deity

दीप (घी या कपूर का) जलाकर, उसे हाथ में लेकर देवी के समक्ष घुमाते हुए गाते हुए आरती करें, आदर्श रूप से घंटी के साथ। पुष्प और प्रसाद अर्पित करें, और आरती की भेंट लेकर (हाथों को ज्वाला के ऊपर ले जाकर नेत्रों तक) समापन करें। भक्ति और निर्मल हृदय से गाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह गंगा की स्तुति में गाई जाने वाली पारंपरिक हिंदी आरती है, जो उपासना के अंत में दीप और घंटी के साथ की जाती है। यह पृष्ठ इसके पूर्ण बोल हिंदी में, लिप्यंतरण और पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ के साथ देता है।
आरती प्रातः और संध्या की उपासना के अंत में, और विशेषकर देवी के पर्व-दिनों पर गाई जाती है। दीप जलाएँ, गाते हुए उसे देवी के समक्ष घुमाएँ, और आरती की भेंट लेकर समापन करें।
भक्ति से आरती गाना देवी को प्रसन्न करता है, विघ्नों और शोकों को दूर करता है, और हृदय की सच्ची कामनाएँ, शांति तथा रक्षा प्रदान करता है।

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