प्रेम और संबंधों के मंत्र
Sacred mantras for love, harmony and strong relationships.
These mantras — invoking Krishna and Radha, and the divine union of Shiva and Parvati — nurture love, harmony, understanding and devotion in relationships and marriage. Chanted with a sincere heart, they soften discord, deepen bonds and open the heart to selfless love (prema). Each mantra below includes full Sanskrit lyrics, transliteration, meaning and a chanting guide.
57 mantras available in this collection
अद्वेष्टा सर्वभूतानाम्
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।
पढ़ें और जपें →अहं सर्वस्य प्रभवो
अहं सर्वस्य प्रभवो
पढ़ें और जपें →நாச்சியார் திருமொழி — வாரணம் ஆயிரம்
வாரணம் ஆயிரம் சூழ வலம்செய்து
पढ़ें और जपें →अर्धनारीनटेश्वर स्तोत्रम्
चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै
पढ़ें और जपें →श्री बाँके बिहारी आरती
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊँ, प्यारे आपको रिझाऊँ ।
पढ़ें और जपें →श्रीमद्भगवद्गीता ११.५४ — भक्त्या त्वनन्यया
भक्त्या त्वनन्यया शक्यमहमेवंविधोऽर्जुन।
पढ़ें और जपें →श्रीमद्भगवद्गीता १७.१५ — अनुद्वेगकरं वाक्यम्
अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्।
पढ़ें और जपें →श्री कृष्णाष्टकम् (भजे व्रजैकमण्डनम्)
भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं
पढ़ें और जपें →गोपाल गोपाल देवकीनन्दन गोपाल
गोपाल गोपाल देवकीनन्दन गोपाल ।
पढ़ें और जपें →गोपिका गीत
गोप्य ऊचुः -
पढ़ें और जपें →हे कृष्ण करुणासिन्धो
हे कृष्ण करुणासिन्धो दीनबन्धो जगत्पते ।
पढ़ें और जपें →जय राधा माधव
(जय) राधा-माधव (जय) कुञ्ज-बिहारी ।
पढ़ें और जपें →कार्येषु मन्त्री करणेषु दासी
कार्येषु मन्त्री करणेषु दासी
पढ़ें और जपें →श्री कामाख्या स्तोत्रम्
जय कामेशि चामुण्डे जय भूतापहारिणि।
पढ़ें और जपें →करवा चौथ चन्द्र अर्घ्य मंत्र (ॐ सोमाय नमः)
ॐ सोमाय नमः।
पढ़ें और जपें →कस्तूरीतिलकम् (गोपाल ध्यान श्लोक)
कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं
पढ़ें और जपें →कात्यायनी मंत्र
ॐ कात्यायन्यै नमः ॥
पढ़ें और जपें →क्लीं बीज मंत्र
ॐ क्लीं
पढ़ें और जपें →श्रीकृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली
श्रीकृष्णाय नमः
पढ़ें और जपें →कृष्ण चालीसा
बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।
पढ़ें और जपें →कृष्णकर्णामृतम् (चयनिका)
चिन्तामणिर्जयति सोमगिरिर्गुरुर्मे
पढ़ें और जपें →कृष्ण मंत्र
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः ॥
पढ़ें और जपें →आरती कुंजबिहारी की
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
पढ़ें और जपें →मधुराष्टकम्
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।
पढ़ें और जपें →मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो।
पढ़ें और जपें →माङ्गल्यं तन्तुनानेन
माङ्गल्यं तन्तुनानेन मम जीवनहेतुना।
पढ़ें और जपें →मेरे तो गिरधर गोपाल
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।
पढ़ें और जपें →नन्दकुमाराष्टकम्
सुन्दरगोपालमुरवनमालं नयनविशालं दुःखहरम् ।
पढ़ें और जपें →नन्दनन्दनाष्टकम्
सुचारुवक्त्रमण्डलं सुकर्णरत्नकुण्डलम् ।
पढ़ें और जपें →அலைபாயுதே கண்ணா
அலைபாயுதே கண்ணா என் மனம் மிகவே
पढ़ें और जपें →पार्वती चालीसा
॥ दोहा ॥
पढ़ें और जपें →पसायदान (संत ज्ञानेश्वर)
आता विश्वात्मके देवे। येणे वाग्यज्ञे तोषावे॥
पढ़ें और जपें →पत्रं पुष्पं फलं तोयम्
पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।
पढ़ें और जपें →ಜಗದೋದ್ಧಾರನ
ಜಗದೋದ್ಧಾರನ ಆಡಿಸಿದಳೆಶೋದೆ
पढ़ें और जपें →श्री राधा रानी की आरती
आरती श्री वृषभानु-सुता की ।
पढ़ें और जपें →श्री राधा चालीसा
श्री राधे वृषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार।
पढ़ें और जपें →श्री राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्रम्
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि
पढ़ें और जपें →राधे राधे — राधा कृष्ण धुन
राधे राधे राधे राधे, राधे गोविन्द राधे।
पढ़ें और जपें →श्री राधा षोडशनाम स्तोत्रम्
श्रीनारायण उवाच ।
पढ़ें और जपें →श्री राधिका स्तव
राधे जय जय माधवदयिते
पढ़ें और जपें →सा त्वस्मिन् परमप्रेमरूपा
सा त्वस्मिन् परमप्रेमरूपा ॥ २ ॥
पढ़ें और जपें →सन्तान गोपाल स्तोत्रम्
श्रीशं कमलपत्राक्षं देवकीनन्दनं हरिम् ।
पढ़ें और जपें →सप्तपदी मन्त्र
ॐ एकमिषे विष्णुस्त्वान्वेतु।
पढ़ें और जपें →शुक्र गायत्री मंत्र
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि ।
पढ़ें और जपें →शुक्र कवचम्
श्रीगणेशाय नमः ।
पढ़ें और जपें →शुक्र स्तोत्र
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि ।
पढ़ें और जपें →श्री सीता आरती
आरती श्री जनकदुलारी की ।
पढ़ें और जपें →सीता चालीसा
॥ दोहा ॥
पढ़ें और जपें →सियाराममय सब जग जानी
सियाराममय सब जग जानी ।
पढ़ें और जपें →तप्तकाञ्चनगौराङ्गी (राधा प्रणाम)
तप्तकाञ्चनगौराङ्गी राधे वृन्दावनेश्वरी ।
पढ़ें और जपें →ठुमक चलत रामचंद्र
ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियाँ।
पढ़ें और जपें →திருப்பாவை
மார்கழித் திங்கள் மதிநிறைந்த நன்னாளால்
पढ़ें और जपें →उमामहेश्वर स्तोत्रम्
नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यां
पढ़ें और जपें →श्री वृन्दादेव्यष्टकम्
गाङ्गेयचाम्पेयतडिद्विनिन्दिरोचिःप्रवाहस्नपितात्मवृन्दे ।
पढ़ें और जपें →यो मां पश्यति सर्वत्र
यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति।
पढ़ें और जपें →मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणाम्
मैत्रीकरुणामुदितोपेक्षाणां सुखदुःखपुण्यापुण्यविषयाणां भावनातश्चित्तप्रसादनम् ॥
पढ़ें और जपें →युगलाष्टकम्
कृष्णप्रेममयी राधा राधाप्रेममयो हरिः ।
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