धन और समृद्धि के मंत्र
Powerful mantras to attract wealth, abundance and financial prosperity.
These mantras invoke Goddess Lakshmi and Lord Kubera, the deities of wealth and abundance, to remove poverty and debt and to attract prosperity, success and good fortune. Chanting them regularly — especially on Fridays and at Diwali — with a grateful, contented heart is believed to open the flow of abundance. Each mantra below includes full Sanskrit lyrics, transliteration, meaning and a chanting guide.
81 mantras available in this collection
महालक्ष्मी ध्यान (अक्षस्रक्परशुं)
ॐ अक्षस्रक्परशुं गदेषुकुलिशं पद्मं धनुष्कुण्डिकां
पढ़ें और जपें →अनन्याश्चिन्तयन्तो माम्
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां
पढ़ें और जपें →अङ्गं हरेः पुलकभूषणम्
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती
पढ़ें और जपें →अङ्गारक स्तोत्रम्
अस्य श्री अङ्गारकस्तोत्रस्य ।
पढ़ें और जपें →श्री अन्नपूर्णा जी की आरती
बारम्बार प्रणाम, करूँ महारानी ।
पढ़ें और जपें →अन्नपूर्णा चालीसा
॥ दोहा ॥
पढ़ें और जपें →श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम्
नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी
पढ़ें और जपें →अन्नपूर्णे सदापूर्णे
अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे ।
पढ़ें और जपें →अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम्
॥ आदिलक्ष्मी ॥
पढ़ें और जपें →अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
पढ़ें और जपें →भाग्य सूक्तम्
प्रातरग्निं प्रातरिन्द्रं हवामहे प्रातर्मित्रावरुणा प्रातरश्विना ।
पढ़ें और जपें →ಭಾಗ್ಯದ ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಬಾರಮ್ಮ
ಭಾಗ್ಯದ ಲಕ್ಷ್ಮೀ ಬಾರಮ್ಮ
पढ़ें और जपें →भू सूक्तम्
ॐ भूमिर्भूम्ना द्यौर्वरिणान्तरिक्षं महित्वा।
पढ़ें और जपें →श्री बृहस्पति देव आरती
ॐ जय बृहस्पति देवा ।
पढ़ें और जपें →बृहस्पति गायत्री मंत्र
ॐ वृषभध्वजाय विद्महे क्रुणिहस्ताय धीमहि ।
पढ़ें और जपें →बृहस्पतिकवचम्
॥ श्रीगणेशाय नमः ॥
पढ़ें और जपें →बुध गायत्री मंत्र
ॐ गजध्वजाय विद्महे शुकहस्ताय धीमहि ।
पढ़ें और जपें →चतुःश्लोकी
कान्तस्ते पुरुषोत्तमः फणिपतिः शय्यासनं वाहनं
पढ़ें और जपें →दारिद्र्य दहन शिव स्तोत्रम्
विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय
पढ़ें और जपें →देव्या यया ततमिदं जगत् (शक्रादि स्तुति का प्रारम्भ)
ऋषिरुवाच
पढ़ें और जपें →धनतेरस धन्वन्तरि मंत्र एवं गायत्री
ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वन्तरये
पढ़ें और जपें →एवं भगवती देवी सा नित्यापि
एवं भगवती देवी सा नित्यापि पुनः पुनः ।
पढ़ें और जपें →गणाधिप स्तोत्रम् (गणाधिपताष्टकम्)
श्रियमनपायिनीं प्रदिशतु श्रितकल्पतरुः
पढ़ें और जपें →इन्द्रकृत लक्ष्मीस्तोत्रम्
ॐ नमः कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नमः।
पढ़ें और जपें →श्री जानकी स्तोत्रम्
जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्।
पढ़ें और जपें →ककाररूपा कल्याणी (ललिता त्रिशती आरम्भ)
ककाररूपा कल्याणी कल्याणगुणशालिनी ।
पढ़ें और जपें →कामधेनुगुणा विद्या
कामधेनुगुणा विद्या ह्यकाले फलदायिनी।
पढ़ें और जपें →कमला स्तोत्रम् (ओंकाररूपिणी देवि)
ओंकाररूपिणी देवि विशुद्धसत्त्वरूपिणी।
पढ़ें और जपें →कनकधारा स्तोत्रम्
वन्दे वन्दारुमन्दारमिन्दिरानन्दकन्दलम् ।
पढ़ें और जपें →लक्ष्मीं क्षीरसमुद्रराजतनयाम् (महालक्ष्मी ध्यान)
लक्ष्मीं क्षीरसमुद्रराजतनयां श्रीरङ्गधामेश्वरीं
पढ़ें और जपें →कुबेर अष्टोत्तरशतनामावली
ॐ कुबेराय नमः
पढ़ें और जपें →कुबेर मंत्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय
पढ़ें और जपें →ॐ जय लक्ष्मी माता आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
पढ़ें और जपें →लक्ष्मी चालीसा
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
पढ़ें और जपें →लक्ष्मि लज्जे महाविद्ये
दंष्ट्राकरालवदने शिरोमालाविभूषणे ।
पढ़ें और जपें →लक्ष्मी पूजा मन्त्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद।
पढ़ें और जपें →ललिता प्रातःस्मरण स्तोत्रम्
प्रातः स्मरामि ललितावदनारविन्दं
पढ़ें और जपें →महालक्ष्मी अष्टकम्
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
पढ़ें और जपें →महालक्ष्मी कवचम्
इन्द्र उवाच —
पढ़ें और जपें →मन्त्रमातृकापुष्पमालास्तवः
कल्लोलोल्लसितामृताब्धिलहरीमध्ये विराजन्मणि-
पढ़ें और जपें →श्री मूकाम्बिकाष्टकम्
नमस्ते जगद्धात्रि सद्ब्रह्मरूपे
पढ़ें और जपें →मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः
मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारेः
पढ़ें और जपें →नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि
नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरेः प्रिये ।
पढ़ें और जपें →महालक्ष्मी मन्त्र (पद्मासने पद्मकरे)
पद्मासने पद्मकरे सर्वलोकैकपूजिते।
पढ़ें और जपें →श्री अनन्तपद्मनाभ मङ्गल स्तोत्रम्
श्रियःकान्ताय कल्याणनिधये निधयेऽर्थिनाम् ।
पढ़ें और जपें →प्रदोष स्तोत्रम्
सत्यं ब्रवीमि परलोकहितं ब्रवीमि
पढ़ें और जपें →श्री राजराजेश्वर्यष्टकम्
अम्बा शाम्भवि चन्द्रमौलिरबला अपर्णा उमा पार्वती
पढ़ें और जपें →ऋणहर्ता गणपति स्तोत्रम् (ऋणविमोचन गणेश स्तोत्रम्)
अस्य श्रीऋणविमोचनमहागणपतिस्तोत्रमन्त्रस्य शुक्राचार्य ऋषिः,
पढ़ें और जपें →ऋणमोचक मङ्गल स्तोत्रम्
॥ श्रीगणेशाय नमः ॥
पढ़ें और जपें →सरसिजनिलये (महालक्ष्मी ध्यान श्लोक)
सरसिजनिलये सरोजहस्ते
पढ़ें और जपें →सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसमन्वितः ।
पढ़ें और जपें →सर्वदेवकृत लक्ष्मीस्तोत्रम्
नमः श्रियै लोकधात्र्यै ब्रह्ममात्रे नमो नमः।
पढ़ें और जपें →श्री सत्यनारायण जी की आरती
जय लक्ष्मीरमणा, स्वामी जय लक्ष्मीरमणा ।
पढ़ें और जपें →शाकम्भरी स्तोत्रम्
शाकम्भरी शिवा धात्री दुर्गा रक्षणकारिणी।
पढ़ें और जपें →श्रीं बीज मंत्र
ॐ श्रीं
पढ़ें और जपें →श्री यन्त्र मंत्र (षोडशी मंत्र)
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं
पढ़ें और जपें →शुक्र गायत्री मंत्र
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि ।
पढ़ें और जपें →शुक्र कवचम्
श्रीगणेशाय नमः ।
पढ़ें और जपें →शुक्र स्तोत्र
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि ।
पढ़ें और जपें →सिन्दूरारुण विग्रहां (ललिता सहस्रनाम ध्यान)
सिन्दूरारुण विग्रहां त्रिनयनां माणिक्यमौलि स्फुरत्
पढ़ें और जपें →सौन्दर्यलहरी श्लोक ३ — अविद्यानामन्तः
अविद्यानामन्त-स्तिमिर-मिहिरद्वीपनगरी
पढ़ें और जपें →सौन्दर्यलहरी श्लोक ९९ — सरस्वत्या लक्ष्म्या
सरस्वत्या लक्ष्म्या विधिहरिसपत्नो विहरते
पढ़ें और जपें →श्रीमाता श्रीमहाराज्ञी (ललिता सहस्रनाम आरम्भ)
ॐ श्रीमाता श्रीमहाराज्ञी श्रीमत्सिंहासनेश्वरी ।
पढ़ें और जपें →श्री रुद्रं चमकम्
॥ प्रथम अनुवाक ॥
पढ़ें और जपें →श्री स्तुति
मानातीत-प्रथित-विभवां मङ्गलं मङ्गलानां
पढ़ें और जपें →श्री सूक्तम्
हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् ।
पढ़ें और जपें →तां म आवह जातवेदो
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।
पढ़ें और जपें →त्रिपुरसुन्दर्यष्टकम्
कदम्बवनचारिणीं मुनिकदम्बकादम्बिनीं
पढ़ें और जपें →तुलसी स्तोत्रम्
जगद्धात्रि नमस्तुभ्यं विष्णोश्च प्रियवल्लभे।
पढ़ें और जपें →त्वदीयं वस्तु गोविन्द — समर्पण मन्त्र
त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये ।
पढ़ें और जपें →उद्योगिनं पुरुषसिंहम्
उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीर्
पढ़ें और जपें →वास्तु शान्ति मन्त्र (वास्तोष्पते)
वास्तोष्पते प्रति जानीह्यस्मान्त्स्वावेशो अनमीवो भवा नः।
पढ़ें और जपें →श्री वेङ्कटेश करावलम्ब स्तोत्रम्
श्रीशेषशैलसुनिकेतन दिव्यमूर्ते
पढ़ें और जपें →श्री वेङ्कटेश मङ्गलाशासनम्
श्रियः कान्ताय कल्याणनिधये निधयेऽर्थिनाम् ।
पढ़ें और जपें →श्री वेङ्कटेश्वर स्तोत्रम् (कमलाकुचचूचुक)
कमलाकुचचूचुक कुङ्कुमतो
पढ़ें और जपें →न चोरहार्यं न च राजहार्यम्
न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि।
पढ़ें और जपें →विघ्नराज गणपति स्तोत्रम् (हेरम्ब गणपति स्तोत्रम्)
श्रीगणेशाय नमः ।
पढ़ें और जपें →वृथा वृष्टिः समुद्रेषु
वृथा वृष्टिः समुद्रेषु वृथा तृप्तेषु भोजनम्।
पढ़ें और जपें →या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-बुद्धि-लक्ष्मीरूपेण
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।
पढ़ें और जपें →या श्रीः स्वयं सुकृतिनाम्
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः
पढ़ें और जपें →यस्यास्ति वित्तं स नरः कुलीनः
यस्यास्ति वित्तं स नरः कुलीनः
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